सरिता योलमो बनी यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे की पहली महिला टीटीई

Darjeeling : सरिता योलमो ने कहा इससे पहले उन्होंने कभी भी टीटीई के रूप में कार्य नहीं किया, लेकिन फिर भी उन्होंने इस चैलेंज को कबूल करते हुए यह जिम्मेदारी ली.
मुख्य बातें
Darjeeling : दार्जिलिंग. यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित की गई दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे को 145 साल में सरिता योलमो के रूप में पहली बार महिला ट्रैवलिंग टिकट एग्जामिनर (टीटीई) मिली हैं. 55 साल की योलमो को यहां ‘क्वीन ऑफ हिल्स’ के नाम से फेमस हेरिटेज जंगल सफारी ‘टॉय ट्रेन’ में नियुक्त किया गया है. पूर्वोत्तर सीमा रेलवे (एनएफआर) की अनुभवी कर्मचारी सरिता योलमो ने पांच फरवरी को अपनी नयी भूमिका में पहली बार न्यू जलपाईगुड़ी से दार्जिलिंग तक टॉय ट्रेन में सफर किया. योलमो ने कहा- मैं दार्जिलिंग से हूं, लेकिन मुझे डीएचआर में काम करने का कोई पूर्व अनुभव नहीं था. उन्होंने कहा कि वह पहले एक यात्री के रूप में टॉय ट्रेन में यात्रा कर चुकी हैं. वह वर्तमान में एनजेपी-दार्जिलिंग मार्ग पर एकमात्र महिला टीटीई हैं.
पहली महिला टीटीई के रूप में कार्यरत
योलमो ने मीडिया से बात करते हुए कहा- दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे की टॉय ट्रेन के इतिहास में पहली महिला टीटीई होने पर मुझे गर्व है. डीएचआर की अधिकारी प्रतीक्षा छेत्री ने इसकी पुष्टि की कि योलमो टॉय ट्रेन सेवा में पहली महिला टीटीई के रूप में कार्यरत हैं. योलमो ने कहा कि जब उन्हें यूनेस्को की विरासत रेलवे सेवा में काम करने का अवसर मिला तो उन्हें रोमांच महसूस हुआ और जिम्मेदारी का भी एहसास हुआ. यह यात्रा एक तरफ से लगभग आठ घंटे की होती है और रास्ते में देरी के कारण कभी-कभी इसमें अधिक समय भी लग सकता है. योलमो रोजाना एनजेपी और दार्जिलिंग के बीच चलने वाली ट्रेन सेवा में अपनी बारी आने पर ड्यूटी पर जाती हैं. वह एनजेपी से सुबह की ट्रेन में सवार होती हैं और अगले दिन पर्वतीय शहर में रात भर रुकने के बाद लौट आती हैं.
टीटीई के रूप में काम करने का कोई पूर्व अनुभव नहीं
दार्जिलिंग को पहाड़ों की रानी कहा जाता है. एनजेपी-दार्जिलिंग मार्ग के लिए यात्रा टिकट परीक्षकों (टीटीई) की नियुक्ति एनजेपी स्थित मुख्य यात्रा टिकट निरीक्षक (सीटीटीआई) कार्यालय द्वारा की जाती है, जहां योलमो तैनात हैं. उन्होंने कहा- मुझे ट्रेनों में टीटीई के रूप में काम करने का कोई पूर्व अनुभव नहीं था, फिर भी मैंने हिम्मत की और टॉय ट्रेन सेवा में टीटीई की जिम्मेदारी संभाली. उन्होंने कहा- अपनी पहली यात्रा में मैं थोड़ी घबराई हुई थी, लेकिन यात्रा पूरी करने और दार्जिलिंग पहुंचने के बाद मुझे बहुत अच्छा लगा. उन्होंने बताया कि उनके पति डी योलमो भी दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे में ही सीनियर सेक्शन इंजीनियर थे. वह एक साल पहले ही रिटायर हुए हैं। उनकी बेटी विदेश से पढ़ाई कर रही हैं.
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By Ashish Jha
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