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उपभोक्ता फोरम गिरफ्तारी वारंट जारी नहीं कर सकता : हाइकोर्ट

Updated at : 08 Apr 2025 1:00 AM (IST)
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उपभोक्ता फोरम गिरफ्तारी वारंट जारी नहीं कर सकता : हाइकोर्ट

हाइकोर्ट की न्यायाधीश शुभ्रा घोष ने उपभोक्ता फोरम के आदेश को किया खारिज

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कहा : फोरम को गिरफ्तारी वारंट जारी करने का अधिकार नहीं कोलकाता. कलकत्ता उच्च न्यायालय ने कहा है कि उपभोक्ता फोरम किसी निष्पादन कार्यवाही में गिरफ्तारी का वारंट जारी नहीं कर सकता है और वह केवल सिविल जेल में हिरासत का आदेश दे सकता है. जिला उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम के उस आदेश को चुनौती देने वाली एक अर्जी पर फैसला सुनाया गया, जिसके तहत याचिकाकर्ता के खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट जारी किया गया था. अर्जी पर सुनवाई में न्यायमूर्ति शुभ्रा घोष ने कहा कि कानून फोरम को अपने आदेश के प्रवर्तन के लिए दंड प्रक्रिया संहिता के तहत ऐसा वारंट जारी करने का अधिकार नहीं देता है. न्यायमूर्ति घोष ने याचिकाकर्ता के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि यह उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम में निर्धारित प्रावधान के दायरे से बाहर है. यह मामला 2013 में एक ट्रैक्टर की खरीद के लिए एक वित्त कंपनी और ऋणदाता के बीच ऋण समझौते से उत्पन्न हुआ था. ऋण लेने वाले ने कंपनी को 25,716 रुपये का भुगतान नहीं किया, जिसके लिए कंपनी ने वाहन को अपने कब्जे में ले लिया था. इसके बाद ऋण लेने वाले ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज करायी. ऋण लेने वाले ने प्रतिवादी को ट्रैक्टर का पंजीकरण प्रमाण पत्र सौंपने तथा वाहन को उसके पक्ष में जारी करने का निर्देश देने की मांग की. फोरम ने प्रतिवादी को निर्देश दिया था कि वह शिकायतकर्ता से 25,716 रुपये की बकाया राशि प्राप्त करने के बाद ट्रैक्टर का पंजीकरण प्रमाण पत्र उसे सौंप दे. विपक्षी पक्ष द्वारा एक निष्पादन मामला दायर किया गया था और आयोग ने 13 दिसंबर 2019 के आदेश के माध्यम से याचिकाकर्ता के खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट जारी किया था. न्यायमूर्ति शुभ्रा घोष ने कहा कि इसमें कानूनी मुद्दा यह है कि क्या उपभोक्ता फोरम को निष्पादन कार्यवाही में याचिकाकर्ता के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने का अधिकार है. उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय की एक समन्वय पीठ ने 2022 में कहा था कि निष्पादन आवेदन में आयोग अपने आदेश के प्रवर्तन में गिरफ्तारी का वारंट जारी नहीं कर सकता है. इसने माना था कि फोरम सिविल प्रक्रिया संहिता के तहत निर्धारित प्रावधान के अनुसार सिविल जेल में ऋणी को हिरासत में रखने के लिए वारंट जारी कर सकता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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GANESH MAHTO

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By GANESH MAHTO

GANESH MAHTO is a contributor at Prabhat Khabar.

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