भवानीपुर में ममता बनर्जी vs शुभेंदु अधिकारी, जानें BJP का ’बूथ-दर-बूथ’ सोशल इंजीनियरिंग प्लान

Bhabanipur Election Strategy 2026: भवानीपुर विधानसभा चुनाव 2026 में ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी के बीच कांटे की टक्कर होने की संभावना है. जानें कैसे एसआईआर में कटे 47,000 नामों और 2024 के लोकसभा चुनाव के आंकड़ों ने टीएमसी की नींद उड़ा दी है.
Bhabanipur Election Strategy 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 का सबसे बड़ा और रोमांचक मुकाबला मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के गढ़ भवानीपुर में होने जा रहा है. यहां मुकाबला केवल 2 पार्टियों के बीच नहीं, बल्कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) की ‘इमोशनल अपील’ और भाजपा की ‘सोशल इंजीनियरिंग’ के बीच है. नंदीग्राम की हार के बाद ममता बनर्जी के लिए यह साख की लड़ाई है. शुभेंदु अधिकारी के लिए ‘मिनी इंडिया’ कहे जाने वाले इस क्षेत्र में सेंध लगाने का बड़ा मौका है.
TMC की रणनीति : घर की बेटी और इमोशनल कनेक्ट
तृणमूल कांग्रेस ने भवानीपुर में आक्रामकता की बजाय भावनाओं का कार्ड खेला है. पार्टी ने नया नारा दिया है- बांग्लार उन्नयन घोरे घोरे, घोरेर मेये भबानीपुरे (बंगाल का विकास घर-घर में, घर की बेटी भवानीपुर में). ममता बनर्जी के निवास क्षेत्र (वार्ड 73 में) खास ‘फोटो कॉर्नर’ बनाये गये हैं, जहां लोग ममता बनर्जी के कटआउट के साथ सेल्फी ले सकते हैं.
Bhabanipur Election Strategy 2026: घर-घर जाकर बांटे जा रहे पर्चे
तृणमूल कांग्रेस ने भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में डोर-टू-डोर कैंपेन शुरू कर दिया है. पार्षद घर-घर जाकर विकास कार्यों के पर्चे बांट रहे हैं और जनता से अपनी ‘बेटी’ का समर्थन करने और उनके साथ खड़े होने की अपील कर रहे हैं. अभिषेक बनर्जी ने यहां जीत का अंतर 60,000 के पार ले जाने का लक्ष्य रखा है. 2021 के उपचुनाव में ममता बनर्जी 58 हजार वोट से जीतीं थीं.
बंगाल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
BJP का चक्रव्यूह : जातियों का गणित और रामनवमी
भाजपा ने भवानीपुर को ‘अजेय’ मानना बंद कर दिया है. पार्टी के पास यहां के हर समुदाय का सटीक डेटा है.
- जातीय समीकरण : भाजपा के आंतरिक सर्वे के अनुसार, यहां 26.2 प्रतिशत कायस्थ, 24.5 प्रतिशत मुस्लिम, 14.9 प्रतिशत पूर्वी भारत के प्रवासी, 10.4 प्रतिशत मारवाड़ी और 7.6 प्रतिशत ब्राह्मण मतदाता हैं.
- रामराज्य कार्ड : शुभेंदु अधिकारी ने हाल ही में सीएम आवास के पास से गुजरी रामनवमी यात्रा में शामिल होकर ‘तुष्टीकरण बनाम सुशासन’ का मुद्दा गर्म कर दिया है. भाजपा का लक्ष्य बंगाली और गैर-बंगाली हिंदुओं को एकजुट करना है.
इसे भी पढ़ें : भवानीपुर चुनाव 2026: ममता बनर्जी vs शुभेंदु अधिकारी, क्या बचेगा दीदी का सबसे मजबूत किला?
वोटर लिस्ट का ‘खेल’ और बदलता रुझान
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद भवानीपुर की लड़ाई सांख्यिकी (Statistics) में उलझ गयी है.
- वोटर लिस्ट से नाम हटना : SIR के तहत भवानीपुर से 47,000 नाम हटाये गये हैं. जांच के दायरे में आये नामों में 56 प्रतिशत मुस्लिम हैं. आबादी में उनकी हिस्सेदारी मात्र 24 प्रतिशत है. टीएमसी इसे अपने समर्थकों को निशाना बनाने की साजिश बता रही है.
- वोट का घटता अंतर : वर्ष 2021 के उपचुनाव में ममता बनर्जी 58,000 वोटों से जीती थीं, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में यहां टीएमसी प्रत्याशी की बढ़त घटकर महज 8,297 रह गयी. 8 वार्डों में से 5 में भाजपा प्रत्याशी को टीएमसी से ज्यादा वोट मिले.
भाजपा ने ममता बनर्जी को डिफेंसिव मोड में ला दिया – विश्लेषक
राजनीतिक विश्लेषक विश्वनाथ चक्रवर्ती का मानना है कि भाजपा ने वैचारिक ध्रुवीकरण के जरिये ममता बनर्जी को डिफेंसिव मोड (रक्षात्मक स्थिति) में ला दिया है. भवानीपुर अब वह ‘अभेद्य दुर्ग’ नहीं रहा, जो कभी हुआ करता था. अबकी बार ममता बनर्जी अपना किला बचा पायेंगी या नहीं, इसका फैसला 4 मई को होगा, जब बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे आयेंगे.
इसे भी पढ़ें
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पास कितनी प्रॉपर्टी है, कहां करतीं हैं निवेश!
चुनाव 2026 को ममता बनर्जी कर रहीं हाईजैक! चुनाव आयोग पहुंची BJP, बंगाल में ‘अराजकता’ के लगाये आरोप
दरक रहा ममता बनर्जी का अल्पसंख्यक दुर्ग? ओवैसी, हुमायूं और नौशाद ने बढ़ायी तृणमूल की टेंशन
बंगाल की बदहाली पर ममता बनर्जी सरकार को शमिक भट्टाचार्य की ललकार, पूछे ये 3 तीखे सवाल
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए




