मच्छर जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए जागरूकता जरूरी : डॉ जयदीप घोष

Published by : GANESH MAHTO Updated At : 20 Aug 2025 1:32 AM

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उन्होंने बताया कि डेंगू बुखार एक मच्छर जनित वायरल बीमारी है, जो तब फैलती है जब एक संक्रमित एडीज एजिप्टी मच्छर किसी व्यक्ति को काटता है और वायरस को शरीर में फैला देता है.

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कोलकाता. विश्व मच्छर दिवस प्रतिवर्ष 20 अगस्त को मनाया जाता है. इसका उद्देश्य मच्छरों से फैलने वाले रोगों के प्रति जागरूकता फैलाना और उनसे बचाव एवं नियंत्रण के उपायों को प्रोत्साहित करना है. ऐसे में आनंदपुर स्थित फोर्टिस हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन विभाग के कंसल्टेंट डॉ जयदीप घोष ने विश्व मच्छर दिवस से पूर्व संध्या हमें बताया कि इन दिनों मच्छरों से होने वाली बीमारी डेंगू को काफी खतरनाक माना जाता है. यह एक जानलेवा बीमारी है. उन्होंने बताया कि डेंगू बुखार एक मच्छर जनित वायरल बीमारी है, जो तब फैलती है जब एक संक्रमित एडीज एजिप्टी मच्छर किसी व्यक्ति को काटता है और वायरस को शरीर में फैला देता है. उन्होंने बताया कि इस बीमारी से खुद को बचाने का सबसे प्रभावी तरीका मच्छरों के काटने से बचना है. इसका मतलब है कि अपने आस-पास साफ-सफाई बनाये रखना, यह सुनिश्चित करना कि मच्छरों के प्रजनन के लिए कोई जमा पानी न हो, और घर और बाहर मच्छर भगाने वाले उत्पादों का इस्तेमाल करना. उन्होंने कहा कि इस मॉनसून के दौरान, मच्छरों के काटने से त्वचा के संपर्क को कम करने के लिए पूरी बाजू की शर्ट और पतलून पहनना भी उतना ही जरूरी है. उन्होंने कहा कि वर्तमान में डेंगू के लिए कोई विशिष्ट टीका या एंटीवायरल उपचार उपलब्ध नहीं है. यह बीमारी आमतौर पर अचानक तेज बुखार के साथ शुरू होती है, जिसके साथ अक्सर ठंड लगना, तेज सिरदर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द और कभी-कभी चकत्ते भी हो सकते हैं. चार से पांच दिनों के बाद, मरीज के शरीर में प्लेटलेट्स में गिरावट आ सकता है. पेट में दर्द या रक्तस्राव की प्रवृत्ति हो सकती है, जो जटिलताओं का संकेत है. मसूड़ों, नाक, मूत्र या मल से रक्तस्राव हो सकता है, और गंभीर मामलों में, यह जानलेवा. उन्होंने बताया कि डेंगू पीड़ित मरीज के शरीर में पानी की मात्रा का होना जरूरी है. वहीं, यदि प्लेटलेट्स का स्तर गंभीर रूप से कम हो जाता है, तो रक्त आधान की आवश्यकता हो सकती है. समय पर चिकित्सा हस्तक्षेप और सावधानीपूर्वक निगरानी के साथ, अधिकांश रोगी 7 से 10 दिनों के भीतर पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं.

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