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रामणीक में खुलेगा बांगड़ न्यूरो साइंस का दूसरा कैंपस

कोलकाता. राज्य में न्यूरो चिकित्सा के लिए एकमात्र सरकारी अस्पताल बांगर इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो साइंस (बीअाइएन) है. यहां न्यूरो मेडिसीन एवं सर्जरी विभाग को मिला कर करीब 120 बेड हैं. कई बार बेड उपलब्ध नहीं होने पर मरीज को लौटा दिया जाता है. इस अस्पताल के इंडोर विभाग की क्षमता बढ़ाने के लिए भवानीपुर स्थित […]

कोलकाता. राज्य में न्यूरो चिकित्सा के लिए एकमात्र सरकारी अस्पताल बांगर इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो साइंस (बीअाइएन) है. यहां न्यूरो मेडिसीन एवं सर्जरी विभाग को मिला कर करीब 120 बेड हैं. कई बार बेड उपलब्ध नहीं होने पर मरीज को लौटा दिया जाता है.
इस अस्पताल के इंडोर विभाग की क्षमता बढ़ाने के लिए भवानीपुर स्थित रामणीक दास हरलालका अस्पताल को जल्द नये रूप में चालू किया जायेगा. इसे बांगड़ इ‍ंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो साइंस(बीअाइएन) का दूसरा कैंपस बनाया गया है. यहां फिलहाल न्यूरो मेडिसीन पर जोर दिया जा रहा है. ज्ञात हो कि साल 2007 में कोलकाता नगर निगम ने अस्पताल की इमारत को खतरनाक घोषित किया था. इसके बावजूद तत्कालीन राज्य सरकार की ओर से इसकी मरम्मत नहीं करायी गयी, जिस कारण अस्पताल बंद हो गया. तृणमूल के सत्ता में आने के बाद 2014 में मरम्मत कार्य शुरू हुआ. अब इमारत को छह मंजिला बनाया गया है. राज्य सरकार के फंड से निगम ने अस्पताल को तैयार किया है.
स्वास्थ्य भवन के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस महीने के अंत तक या फरवरी की शुरुआत में अस्पताल का उद्घाटन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी करेंगी.
एसएसकेएम (पीजी) अस्पताल के प्रिंसिपल प्रो डॉ मंजू बनर्जी ने बताया कि बांगर अस्पताल के चिकित्सकों की मदद से रामणीक का संचालन किया जायेगा. अस्पताल में डॉक्टरों के निरीक्षण के लिए एक रोस्टर तैयार किया गया है. बांगर के न्यूरो मेडिसीन विभाग के प्रधान चिकित्सक प्रो श्यामल कुमार दास के नेतृत्व में एक टीम बनायी गयी है.टीम के सदस्य अपने तय समय पर अस्पताल आकर इलाज करेंगे.
ऐसे भर्ती लिये जायेंगे मरीज : डॉ बनर्जी ने बताया कि यहां मरीज की सीधे भर्ती नहीं होगी. कोल्ड केस यानी ऐसे मरीज जो गंभीर रूप से बीमार नहीं हों उन्हें यहां भर्ती लिया जायेगा. पीजी में संचालित बीअाइएन के आपातकालीन विभाग में प्राथमिक चिकित्सा के बाद मरीज को यहां भर्ती लिया जायेगा. रमणीक में फिलहाल ईसीजी मशीन इंस्टॉल की गयी है. साथ ही ईएमजी और पोटेबल एक्सरे मशीन भी लगायी जायेगी. स्पीच थैरेपी व रिहेब्लीटेशन फिजियोथैरेपी के लिए एमआरआइ एवं सीटी स्कैन मशीन भी इंस्टॉल की जायेगी. डॉ बनर्जी ने बताया कि अस्पताल की तैयारियों को देखने के लिए हाल में अस्पताल को चालू भी किया गया है. जहां सात मरीजों को भर्ती कर उनकी चिकित्सा की जा रही है.
फिलहाल अस्पताल में होंगे 50 बेड
राज्य के स्वास्थ्य शिक्षा निदेशक प्रो डॉ सुशांत बंद्योपाध्याय ने अनुसार इस अस्पताल में फिलहाल 50 बेड होंगे. बाद में बेड की संख्या बढ़ा कर 72 की जायेगी. न्यूरो जनित बीमारियों के इलाज के लिए यहां हाई डिपेंडेंसी यूनिट (एचडीयू), इंटेंशिव केयर यूनिट (आईसीयू) और ओटी की व्यवस्था होगी. एचडीयू एवं अाइसीयू में चार- चार बेड होंगे.
Prabhat Khabar Digital Desk
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