वीवर्ली जूट मिल के श्रमिकों को सताने लगी है रोजी-रोटी की चिंता

Updated at : 23 Feb 2020 2:57 AM (IST)
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वीवर्ली जूट मिल के श्रमिकों को सताने लगी है रोजी-रोटी की चिंता

बैरकपुर : होली का त्योहार निकट आ गया है और ऐसे समय में श्यामनगर स्थित वीवर्ली जूट मिल के बंद होने से यहां काम करने वाले करीब तीन हजार श्रमिकों के सामने होली मानना तो दूर रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है. उन्हें घर चलाने और अपने बच्चों की आगे की पढ़ाई की […]

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बैरकपुर : होली का त्योहार निकट आ गया है और ऐसे समय में श्यामनगर स्थित वीवर्ली जूट मिल के बंद होने से यहां काम करने वाले करीब तीन हजार श्रमिकों के सामने होली मानना तो दूर रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है. उन्हें घर चलाने और अपने बच्चों की आगे की पढ़ाई की चिंता अभी से ही सताने लगी है. अगर जल्द ही मिल नहीं खुली तो यहां काम करने वाले श्रमिकों की होली बेरंग ही गुजरेगी.

बता दें कि शुक्रवार यानी 21 फरवरी को पूर्व निर्धारित तिथि पर मिल खुलनी थी,लेकिन सुबह में जब श्रमिक जब मिल गेट पर पहुंचे तो वहां सस्पेंशन ऑफ वर्क्स का नोटिस देख कर भड़ गये. इसके बाद मिल में घुस कर तोड़फोड़ कर वहां खड़ी दो गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया था. इस दौरान प्रभात खबर ने श्रमिकों से बातचीत की जिसके कुछ अंश :
मोहम्मद इब्राहिम : पिछले तीन महीनों से वेतन सही समय पर नहीं मिल रहा था. परिवार और बच्चों को पढ़ाने में बहुत ही मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था. मिल प्रशासन की गलती के कारण ग्रेच्युटी के पैसे अभी भी अवकाश प्राप्त श्रमिकों को नहीं मिले हैं. यहां के श्रमिकों की हालत बहुत ही दयनीय हो गयी है.
रमेश दुबे : 2016 से इसी तरह मिल प्रशासन, श्रमिकों के साथ अत्याचार करता आ रहा है. मिल प्रशासन की गलती के कारण ही आज 3000 श्रमिक बेरोजगार हो गये हैं.
बबलू सिंह : वेतन समय पर नहीं मिलता था, जिसके कारण घर चलाने में काफी समस्याएं आ रही थीं, अब मिल बंद होने से और बड़ी एक समस्या सामने खड़ी हो गयी है.
असगर अली : इस मिल में 20 वर्षों से काम कर रहा हूं. जब से यह नये मिल प्रबंधक आये हैं. तब से इस तरह की समस्याएं लगी रहती हैं. मिल प्रबंधक ने ग्रेच्यूटी का रुपया सरकारी खाते में जमा नहीं किया. इस कारण 1200 रिटायर मजदूरों को अभी तक ग्रेच्यूटी का रुपया नहीं मिला पाया है.
राजेंद्र प्रसाद : 2008 में रिटायरमेंट हो चुका हूं. लेकिन ग्रेच्यूटी का पैसा नहीं मिला है. पैसे के अभाव में अपने आंखों का इलाज नहीं करवा पा रहे हैं.
मंटू सिंह : मिल प्रबंधक की गलतियों से आज 3000 श्रमिक बेरोजगारहो गये और उनके परिवार के सामने कई समस्याओं उत्पन्न हो चुकी हैं. यहां के क्वार्टरों की हालत भी खराब हो चुकी है. कभी भी गिर सकते हैं. मिल प्रबंधन से कई बार लिखित शिकायत करने के बाद भी इस मिल क्वार्टरों को कभी भी रिपेयरिंग नहीं किया और ना ही देखरेख.
अशोक कुमार चौधरी : 2014 में रियाटर हुआ था, लेकिन मिल प्रबंधक ने अभी भी ग्रेच्युटी के पैसे नहीं दिये हैं. पैसा मांगने से मिल अघिकारी कहते हैं. फिर से मिल में काम करीये तीन सौ रुपये मजदूरी दी जायेगी.
रंगीला प्रसाद : कई महीने पहले मेरे सर पर क्वार्टर का टुकड़ा गिर गया था जिससे मैं घायल हो चुका था, लेकिन मिल प्रबंधक ने इन क्वार्टरों की मरम्मत पर कोई ध्यान नहीं दिया. वेतन समय नहीं मिलने के कारण परिवार चलाना मुश्लिक हो रहा था, अब तो मिल ही बंद हो गयी.
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