गंगासागर में 46 लाख श्रद्धालुओं ने किया संक्रांति स्नान

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 15 Jan 2020 9:26 PM

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।। शिव कुमार राउत ।। सागरद्वीप : यूं तो दुनिया में बहुत से मेले लगते हैं. शिप्रा, गोदावरी व त्रिवेणी के तटों से लेकर स्टॉकहोम, ब्रिसबेन, हडसन और कनाडा की ओटावा तक, लेकिन गंगासागर मेले की बात ही निराली है. पौराणिक काल से प्रसिद्ध इस मेले में संक्रांति पर देश-विदेश से आये हर उम्र व […]

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।। शिव कुमार राउत ।।

सागरद्वीप : यूं तो दुनिया में बहुत से मेले लगते हैं. शिप्रा, गोदावरी व त्रिवेणी के तटों से लेकर स्टॉकहोम, ब्रिसबेन, हडसन और कनाडा की ओटावा तक, लेकिन गंगासागर मेले की बात ही निराली है.

पौराणिक काल से प्रसिद्ध इस मेले में संक्रांति पर देश-विदेश से आये हर उम्र व आयु वर्ग के लगभग 46 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने डूबकी लगायी. वहीं पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्लानंद सरस्वती ने हर-हर गंगे के उद्घोष के साथ अपने अनुयायियों के संग पुण्य स्नान किया.

पंचायत मंत्री सुब्रत मुखर्जी ने संवाददाताओं को बताया कि इस बार बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान हेतु गंगासागर पधारे हैं. संक्रांति स्नान का मुहुर्त रात 1:24 बजे से ही शुरू हो गया था. उस समय से लेकर बुधवार सांय 5.30 बजे तक 46 लाख पुण्यार्थियों ने सागर में डुबकी लगाई है. इतना ही नहीं श्रद्धालुओं के लिए कल रात से ही कपिल मुनि का कपाट खोल दिया गया था.

श्री मुखर्जी ने कहा कि रिकार्ड कायम करते हुए मेला में इस बार यूएस, फ्रांस, बेलारूस, भूटान, नेपाल, बांग्लादेश व रसिया व ऑस्ट्रेलिया से 270 विदेशी तीर्थयात्रियों का समागम हुआ है. उन्होंने आगे कहा कि चेमागुड़ी में बस दुर्घटना के अलावा किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना नहीं घटी. प्रशासन मुस्तैदी के साथ जुटा रहा. एक मरीज को एयर एंबुलेस से हावड़ा के जिला अस्पताल पहुंचाया गया. जिसका नाम उमाशंकर तिवारी उम्र 63 साल यू.पी के निवासी हैं. अभी खतरे से बाहर हैं.

* 689 बिछड़ों को मिलाया गया

श्री मुखर्जी ने बताया कि मेला में अब तक 1622 श्रद्धालु अपने परिजनों से बिछड़ गये थे, जिनमें से 689 को ढूंढ कर उन्हें उनके परिजनों से मिला दिया गया है. जो बाकी बचे हैं, उन्हें भी आज रात तक खोज लिया जायेगा.

* गो-दान के प्रति लोगों में उत्साह नहीं

इस मोक्षनगरी में गंगास्नान के बाद गो-दान की परंपरा रही है. मोतिहारी से गो-दान कराने के लिए गंगासागर पहुंचे सर्वेश्वर पांडेय ने बताया कि इतनी दूर से गाय लेकर आना संभव नहीं हैं. इसलिए यहीं से गाय व चौकी दो-ढ़ाई हजार के किराया पर लेकर गो-दान कराते हैं, लेकिन इस बार लोगों में गो-दान के प्रति उत्साह ही नहीं दिखा. किराया का पैसा भी नहीं निकला.

वहीं, देवघर से आए अंकित पांडेय भी निराश होकर बोले कि गंगासागर मेला हम जैसे पंडितों-पुजारियों के लिए रोजी-रोटी का एक माध्यम भी है, लेकिन इसे समझने वाला कौन है? सभी मॉर्डन हो गये हैं. कोई भी काम करने से पहले सवाल करते हैं. गाय की पूंछ पकड़कर वैतरणी पार करने की बात किसी के पल्ले नहीं पड़ती है. इसलिए गो-दान नहीं करा रहे हैं. हिंदू परंपरा खत्म होते जा रही है. इस बात की बड़ी चिंता है. वही इस साल मेले में गो दान कराने वाले पंडितों की संख्या भी अधिक है इसलिए जो लोग गो-दान करा भी रहें हैं वे बंट जा रहें हैं

* सागर अधिकारियों को चैन नहीं

संक्रांति मेले के सफल आयोजन के लिए अक्टूबर के महीने से इसकी तैयारियों में जुटा जिला प्रशासन को अब जाकर राहत मिली है, लेकिन अधिकारियों को अब भी चैन नहीं है. उन्हें जनवरी के अंतिम सप्ताह में ही छुट्टी मिलेगी. इस बारे में एक अधिकारी ने बताया कि ‘उन्हें सागर तट व मेला परिसर की सफाई करवाना है. फिर 20 या 21 जनवरी को प्रदूषण कंट्रोल विभाग के अधिकारी मेला परिसर का निरीक्षण कर जब यह सुनिश्चित करेंगे की सफाई हुई है या नहीं, इसके बाद ही हमें छुट्टी मिलेगी.

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