गणतंत्र दिवस परेड में नहीं होगी बंगाल की झांकी, तृणमूल ने राज्य का अपमान बताया
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 03 Jan 2020 1:54 AM
कोलकाता : नयी दिल्ली में गणतंत्र दिवस पर आयोजित होने वाली परेड में इस साल पश्चिम बंगाल की झांकी नजर नहीं आयेगी, क्योंकि रक्षा मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति ने राज्य के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है. मामले को लेकर तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने गुरुवार को भाजपा नीत केंद्र सरकार पर हमला बोला. राज्य […]
कोलकाता : नयी दिल्ली में गणतंत्र दिवस पर आयोजित होने वाली परेड में इस साल पश्चिम बंगाल की झांकी नजर नहीं आयेगी, क्योंकि रक्षा मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति ने राज्य के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है. मामले को लेकर तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने गुरुवार को भाजपा नीत केंद्र सरकार पर हमला बोला.
राज्य के पूर्व मंत्री व तृणमूल कांग्रेस नेता मदन मित्रा ने आरोप लगाया है कि राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) और नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ राज्य में जारी विरोध की वजह से ही झांकी के प्रस्ताव को खारिज किया गया है. यह पश्चिम बंगाल और यहां की जनता का अपमान है. संसदीय राज्य मंत्री व तृणमूल कांग्रेस के नेता तापस राय ने कहा कि राज्य सरकार ने झांकी की थीम ‘कन्याश्री’ योजना पर रखने का प्रस्ताव दिया था, जिसे स्वीकार नहीं किया गया.
इस योजना को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा जा चुका है. आरोप के अनुसार राज्य के प्रति भाजपा नीत केंद्र सरकार का रवैया पक्षपातपूर्ण है. राज्य में केंद्र सरकार की नीतियों का लगातार विरोध हो रहा है, इसलिए उसके साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है. हालांकि, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष का दावा है कि झांकी का प्रस्ताव इसलिए खारिज हुआ क्योंकि राज्य सरकार ने प्रस्ताव पेश करने में नियमों एवं प्रक्रिया का पालन नहीं किया था.
‘कन्याश्री’ को गणतंत्र दिवस परेड में दिखाना चाहती थी राज्य सरकार
सरकार लड़कियों के लिए चलायी जाने वाली योजना ‘कन्याश्री’ को गणतंत्र दिवस परेड में दिखाना चाहती थी, जिससे संबंधित प्रस्ताव को रक्षा मंत्रालय ने खारिज कर दिया. दरअसल, 2015 में भी बंगाल सरकार का प्रस्ताव खारिज हो गया था, इसलिए इस बार उसने कन्याश्री योजना के अलावा दो वैकल्पिक योजनाओं ‘जॉल धरो, जॉल भरो’ और ‘सबुज साथी’ की झांकियों का प्रस्ताव भी दिया था. रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को बंगाल की झांकी का प्रस्ताव खारिज कर दिया था. मंत्रालय ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार का प्रस्ताव एक विशेषज्ञ समिति द्वारा दो चरणों में पड़ताल करने के बाद खारिज हुआ है.
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