सफाई का मोहताज वार्ड 86, जहां-तहां है कचरे का अंबार
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 28 Dec 2019 3:01 AM
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शिव कुमार राउत, कोलकाता : महानगर में वार्डों की सूरत बदलने के लिए भले ही कोलकाता नगर निगम लाखों रुपये खर्च कर रहा हो, लेकिन अब भी कई वार्ड ऐसे हैं, जो विकास की दौड़ में पिछड़े हुए हैं. इन्हीं में से एक दक्षिण कोलकाता का वार्ड- 86 है, जहां महानगर के अन्य वार्डों में […]
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शिव कुमार राउत, कोलकाता : महानगर में वार्डों की सूरत बदलने के लिए भले ही कोलकाता नगर निगम लाखों रुपये खर्च कर रहा हो, लेकिन अब भी कई वार्ड ऐसे हैं, जो विकास की दौड़ में पिछड़े हुए हैं. इन्हीं में से एक दक्षिण कोलकाता का वार्ड- 86 है, जहां महानगर के अन्य वार्डों में दिन में करीब दो बार सफाई होती है.
इस वार्ड के कई इलाके सफाई के मोहताज हैं और जगह-जगह कचरे का अंबार है. वार्ड के डोवर लेन इलाके में वर्षों से केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) क्वार्टर के खाली पड़े तीन कॉम्प्लेक्स में कचरे का लगा अंबार इसका जीता-जागता उदाहरण है. जर्जर हो चुके क्वार्टर में झाड़ियां उग गयी हैं. यहां रात में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगता है. समय-समय पर पुलिस गश्त भी लगाती है.
इसके बाद भी स्थिति जस की तस है. लगभग 19195 की आबादी वाले इस वार्ड में प्रवेश करते ही टूटी सड़कें दिखेंगी. जगह-जगह बिखरा कूड़ा, निगम के ‘क्लिन सिटी, ग्रीन सिटी’ अभियान को मुंह चिढ़ा रहा होता है. इस वार्ड में बस्तियों की संख्या अधिक है. डोवर टैरेस, गरचा फस्ट लेन, लेक वेस्ट रोड, कियातला आदि बस्ती बहूल इलाके हैं.
बीमारियों का घर बना क्वार्टर : 85 और 86 नंबर वार्ड की सीमा पर स्थित डोवर लेन एक जनबहुल इलाका है. यहां वर्षों से खाली पड़ा सीपीडब्ल्यूडी क्वार्टर खंडहर में तब्दील हो गया है. क्वार्टर की इमारतें जर्जर हो गयी हैं.
चारों तरफ फैली गंदगी, प्लास्टिक की बोतलें आदि डेंगू व मलेरिया जैसी बीमारियों को दावत दे रहे हैं. सीपीडब्ल्यूडी आवास के निवासी दीपक राय ने बताया कि बस्ती में रहनेवाले कुछ युवक रात में क्वार्टर को नशे का अड्डा बना देते हैं. निगम क्वार्टर की सफाई भी नहीं कर रहा है. इस कारण यहां मॉनसून के समय मच्छरों का उत्पात बढ़ जाता है.
साफ-सफाई का अभाव : वार्ड में स्थायी व अस्थायी करीब 78 सफाईकर्मी हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि अन्य वार्डों में दिन में दो बार सड़कों की सफाई की जाती है, लेकिन इस वार्ड में सुबह में ही कूड़े का निस्तारण किया जाता है. सिंघी पार्क इलाके में भी दो जगहों पर खुले में कचरा फेंके जाने से राहगीरों को परेशानी होती है. उक्त क्वार्टर के पास निगम का एक ओपेन वैट है, जहां दिनभर का कचरा जमा रहता है.
पेयजल का अभाव: राजेश साव ने बताया कि वार्ड के बस्ती इलाकों के निगम के नलकूपों में पानी का फ्लो काफी कम है. गर्मी के दिनों में जलापूर्ति की समस्या बढ़ जाती है.
विरोधी पार्टी का पार्षद होने के कारण वार्ड में निगम द्वारा विकास कार्य नहीं किया जा रहा है. सफाई के अलावा यहां पेयजल की भी समस्या है. सफाई कर्मियों का भी अभाव है. वहीं सीपीडब्ल्यूडी क्वार्टर खंडहर हो चुका है. निगम अगर चाहे तो यहां कॉम्पैक्टर स्टेशन लगा सकता है.
इसके लिए कई बार निगम से मांग भी की गयी है लेकिन यह कह कर टाल दिया जाता है कि केंद्र की अनुमति के बगैर उक्त स्थान पर कॉम्पैक्टर स्टेशन नहीं बनाया जा सकता. जब इसके लिए केंद्र सरकार की अनुमति चाहिये तो फिर दुर्गा प्रसाद मुखर्जी ने अपने कार्यकाल के दौरान कैसे यहां ओपेन वैट बनवाया था.
यह ओपन वैट भी अब क्षतिग्रस्त हो गया है. पहले क्वार्टर के पास लाइट की भी व्यवस्था नहीं थी, लेकिन क्वार्टर के सामने निहार मुंशी आई फाउंडेशन के पास एक मिनी मास्क लाइट लगवायी गयी है. वार्ड 85 में दिन में चार बार जलापूर्ति होती है, लेकिन वार्ड 86 में दिन में दो बार ही पेयजल की आपूर्ति की जाती है.
तिस्ता विश्वास दास, पार्षद, वार्ड 86, कोलकाता नगर निगम.
क्वार्टर की साफ-सफाई के लिए निगम के ठोस कचरा प्रबंधन विभाग को निर्देश दिया गया है. साथ ही यहां एक कॉम्पैक्टर स्टेशन लगाने की भी योजना है.
वैश्वानर चटर्जी, मेयर परिषद सदस्य कानून, पीपीपी व गीतांजलि आवासन एवं पूर्व चैयरमैन बोरो आठ, कोलकाता नगर निगम
एक नजर
वार्ड – 86, बोरो : आठ
पार्षद : तीस्ता विश्वास दास
पार्टी : भाजपा
जनसंख्या : 19195 (2011 तक)
कुल मतदाता : 18 हजार (लगभग)
यह वार्ड 2005 व 2010 तक तृणमूल कांग्रेस के दखल में रहा
2005 में तृणमूल कांग्रेस की दीप्ति मुखर्जी
2010 में तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर दुर्गा प्रसाद मुखर्जी जीते
2015 में पहली बार भाजपा ने यह सीट जीती
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