हिंसा के रास्ते से कभी समाज का नहीं हो सकता विकास
Updated at : 22 Dec 2019 12:51 AM (IST)
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कोलकाता : गांधी ने माना कि अहिंसा ही मनुष्य की बुनियादी प्रवृति है. समूहों, समाजों, राष्ट्रों के बीच भेदभाव वस्तुतः हिंसा की राजनीति और हिंसा की अर्थनीति पैदा कर रही है. हिंसा का रास्ता समाज को कभी विकास की ओर नहीं ले जा सकता. आज हिंदुस्तान की स्त्रियां कह रही हैं- घर से कर्मस्थल तक […]
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कोलकाता : गांधी ने माना कि अहिंसा ही मनुष्य की बुनियादी प्रवृति है. समूहों, समाजों, राष्ट्रों के बीच भेदभाव वस्तुतः हिंसा की राजनीति और हिंसा की अर्थनीति पैदा कर रही है. हिंसा का रास्ता समाज को कभी विकास की ओर नहीं ले जा सकता.
आज हिंदुस्तान की स्त्रियां कह रही हैं- घर से कर्मस्थल तक हिंसा से बचाओ, छोटे राष्ट्र कह रहे हैं कि हमें युद्धों से बचाओ. दरअसल शांति और न्याय की बुनियाद पर ही अहिंसक समाज बन सकता है. यह बात आज भारतीय भाषा परिषद में ‘गांधी और हिंसा के वर्तमान रूप’ पर बोलते हुए प्रो आनंद कुमार ने कही.
मुजफ्फरपुर से आये प्रो प्रमोद कुमार ने कहा कि पिछले दिनों यौन लिंचिंग के शिकार दलित और मुसलमान बड़े पैमाने पर हुए हैं, यह गांधी के देश में शर्मनाक है. हिंसा का एक रूप आज नागरिकता कानून है. स्त्रियों के प्रति हिंसा इन दिनों बढ़ी है. यह गांधी के सपनों का टूटना है.
दिल्ली विश्वविद्यालय में इतिहास के सहायक प्रोफेसर एवं गांधी चिंतक प्रो सौरभ वाजपेयी ने कहा कि गांधी की हिंसा की अवधारणा आज ज्यादा महत्वपूर्ण है. आज हिंसा और प्रतिहिंसा के अनगिनत रूप हैं, अनगिनत तहें हैं. आज धार्मिक विद्वेष बढ़ा है. गांधी ने कहा है कि आपस की हिंसा यदि बढ़ी तो आजादी का ह्रास होगा.
अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए वागर्थ के संपादक और भारतीय भाषा परिषद के निदेशक डॉ शंभुनाथ ने कहा कि गांधी ने सावधान किया था कि हिंसा और लोकतंत्र एक साथ नहीं चल सकते. दुनिया के देशों के सामने सिर्फ दो विकल्प हैं- स्वेच्छाचारी होना या ऐसा अहिंसक समाज बनाना जहां लोग भयहीन हो कर जी सकें.
गांधी के लिए अहिंसा और प्रेम दो शब्द नहीं हैं, जिस तरह उनके लिए सत्य ईश्वर का दूसरा नाम है. गांधी का प्रधान लक्ष्य था हिंसा मुक्त भारत बनाना. इसके लिए जाहिर है कि हम समाज में भिन्नता की जगह साझा सत्य खोजें. देश में उपस्थित अभूतपूर्व संकट के दौर में गांधी को स्मरण करते हुए प्रार्थना सभा आयोजित हुई.
अहिंसा के लिए प्रार्थना सभा में विश्वभारती, शांतिनिकेतन से प्रशिक्षित आनंद वर्धन ने गांधी के प्रिय भजन सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया. परिषद की अध्यक्ष डॉ कुसुम खेमानी ने स्वागत भाषण देते हुए गांधी से जुड़े कई संस्मरण सुनाये.धन्यवाद ज्ञापन दिया कोलकाता विश्वविद्यालय हिंदी विभाग की प्रोफेसर राजश्री शुक्ला ने. कार्यक्रम का संचालन सुशील कांति ने किया.
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