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बांग्ला सहित अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में भी हो प्रश्नपत्र - ममता

Updated at : 07 Nov 2019 1:36 AM (IST)
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बांग्ला सहित अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में भी हो प्रश्नपत्र - ममता

कोलकाता : मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अब जेइइ मेंस में क्षेत्रीय भाषाओं में प्रश्नपत्र की मांग की है. उन्होंने कहा है कि यदि ऐसा नहीं होता, तो तीव्र आंदोलन छेड़ा जायेगा. उल्लेखनीय है कि मंगलवार को तृणमूल सांसद अभिषेक बनर्जी ने ट्वीट करके कहा था कि जेइइ मेंस 2020 की परीक्षा अंग्रेजी और हिंदी के […]

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कोलकाता : मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अब जेइइ मेंस में क्षेत्रीय भाषाओं में प्रश्नपत्र की मांग की है. उन्होंने कहा है कि यदि ऐसा नहीं होता, तो तीव्र आंदोलन छेड़ा जायेगा. उल्लेखनीय है कि मंगलवार को तृणमूल सांसद अभिषेक बनर्जी ने ट्वीट करके कहा था कि जेइइ मेंस 2020 की परीक्षा अंग्रेजी और हिंदी के अलावा अब गुजराती में भी होगी. उन्होंने कहा था कि विकल्प केवल इन तीन भाषाओं में ही क्यों हो?

संविधान सबके लिए बराबर है. परीक्षा बांग्ला, ओड़िया, कन्नड़, तेलेगु, तमिल, मराठी सहित सभी क्षेत्रीय भाषाओं में होनी चाहिए. बुधवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए ट्वीट करते हुए लिखा कि भारत कई धर्मों, संस्कृतियों, भाषाओं, समुदायों का देश है. लेकिन सभी धर्मों व भाषाओं का अहित करना, केंद्र सरकार का मकसद बन गया है.
मुख्यमंत्री ने लिखा है कि वह गुजराती भाषा से प्रेम करती हैं. लेकिन अन्य क्षेत्रीय भाषाओं की अनदेखी आखिर क्यों की गयी? उनके साथ अन्याय क्यों किया गया? यदि परीक्षा गुजराती में होनी जरूरी है, तो बांग्ला समेत सभी क्षेत्रीय भाषाओं में भी परीक्षा होनी चाहिए. मुख्यमंत्री का कहना है कि यदि यह मुद्दा शिष्टता के साथ निपटाया नहीं जाता, तो इसका तीव्र विरोध किया जायेगा. अन्य क्षेत्रीय भाषाई लोगों की भावनाएं इस अन्याय की वजह से आहत हो रही हैं.
माना जा रहा है कि इस मुद्दे को तृणमूल की ओर से संसद के शीतकालीन सत्र में भी उठाया जायेगा. तृणमूल के इस मुद्दे का समर्थन कांग्रेस की ओर से भी किये जाने की संभावना है.
मानव संसाधन मंत्रालय करे हस्तक्षेप
कोलकाता : मुख्यमंत्री ममता बनर्जी व भाजपा के राज्यसभा के सांसद डॉ स्वपन दासगुप्ता दोनों ही विरोधी राजनीतिक विचाराधारा का प्रतिनिधित्व करते हैं, लेकिन जेइइ की परीक्षा अंग्रेजी और हिंदी के साथ गुजराती भाषा में कराये जाने के निर्णय पर डॉ दासगुप्ता ने मुख्यमंत्री के साथ सुर में सुर मिलाकर इस निर्णय का विरोध किया है. डॉ स्वपन दासगुप्ता ने ट्वीट किया: यह गलत है. यदि अंग्रेजी और हिंदी के अतिरिक्त गुजराती को जेइइ के लिए अनुमति दी जाती है,तो अन्य क्षेत्रीय भाषाओं को क्यों शामिल नहीं किया गया.
मैं केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय से अनुराध करता हूं कि इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करे और इस भेदभाव को दूर करे. डॉ दासगुप्ता ने प्रभात खबर से बातचीत करते हुए कहा कि यदि गुजराती भाषा को शामिल किया जाता है, तो फिर मराठी, तेलगू, तमिल, ओडिया और बांग्ला जैसे क्षेत्रीय भाषाओं को क्यों नहीं शामिल किया गया? इस बारे में मानव संसाधन मंत्रालय को तत्काल कोई निर्णय लेना चाहिए.
उन्होंने कहा कि इसके पहले मराठी और गुजराती में परीक्षा हुई थी,लेकिन मराठी में अच्छा रिस्पांस नहीं मिलने के कारण इस वर्ष हिंदी और अंग्रेजी के साथ केवल गुजराती में रखा गया है,लेकिन जिन भाषाओं की मांग है. उन सभी को अवसर दिया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि इस तरह के गलत फैसले के कारण ही मुख्यमंत्री को एक मुद्दा मिल गया है, जो पूरी तरह से अवांछनीय है.
दिलीप ने भी उठायी क्षेत्रीय भाषा में जेइइ परीक्षा की मांग, राज्य सरकार से पहल करने का अनुरोध
कोलकाता. प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष दिलीप घोष ने भी जेइइ की परीक्षा बांग्ला सहित अन्य क्षेत्रीय भाषा में भी परीक्षा कराने की मांग की है. श्री घोष ने कहा कि यदि गुजराती भाषा में जेइइ की परीक्षा हो रही है, तो फिर बांग्ला भाषा में भी हो. अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में भी यह परीक्षा होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बांग्ला भाषा में जेइइ की परीक्षा कराने की पहल करे.
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