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#NobelPrize : अभिजीत का प्रिय विषय गणित और अंग्रेजी था, दोस्त ने बतायी ये खास बातें

Updated at : 15 Oct 2019 8:18 AM (IST)
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#NobelPrize : अभिजीत का प्रिय विषय गणित और अंग्रेजी था, दोस्त ने बतायी ये खास बातें

नोबेल पुरस्कार विजेता के सहपाठी ने अभिजीत के कॉलेज के दिनों को याद कियाकोलकाता : अर्थशास्त्र के लिए संयुक्त रूप से नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत विनायक बनर्जी के प्रेसिडेंसी में सहपाठी रहे अभिजीत पाठक ने बीते दिनों को याद करते हुए कहा कि कॉलेज के दिनों में अभिजीत बनर्जी का प्रिय विषय गणित व अंग्रेजी […]

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नोबेल पुरस्कार विजेता के सहपाठी ने अभिजीत के कॉलेज के दिनों को याद किया
कोलकाता :
अर्थशास्त्र के लिए संयुक्त रूप से नोबेल पुरस्कार विजेता अभिजीत विनायक बनर्जी के प्रेसिडेंसी में सहपाठी रहे अभिजीत पाठक ने बीते दिनों को याद करते हुए कहा कि कॉलेज के दिनों में अभिजीत बनर्जी का प्रिय विषय गणित व अंग्रेजी था. उन्होंने बताया कि 70 के दशक में एसोसिएशन ऑफ इम्प्रूवमेंट ऑफ मैथ्स टीचिंग नामक संस्था गणित पर एक टैलेंट सर्च परीक्षा का आयोजन जगबंधु स्कूल में करती थी. उस परीक्षा में एक बार अभिजीत बैठे थे और उन्हें पुरस्कार भी मिला था. साउथ प्वायंट स्कूल के छात्र रहे अभिजीत का झुकाव शुरू से गणित और अंग्रेजी की ओर था.

विशेषकर गणित में उसका कोई सानी नहीं था. अंग्रेजी साहित्य भी उन्हें बेहद प्रिय था. प्रेसिडेंसी में दाखिले के लिए उस वक्त जो परीक्षा ली जाती थी वह खासी कठिन मानी जाती थी. अभिजीत ने गणित और इकोनॉमिक्स, दोनों के दाखिले के लिए परीक्षा दी थी और दोनों में ही अव्वल रहे. उनके घर का नाम ‘झीमा’ था. अभिजीत के नाम में विनायक की मौजूदगी के संबंध में पाठक बताते हैं कि दरअसल अभिजीत की मां, निर्मला बनर्जी जो खुद इकोनॉमिक्स की प्रोफेसर थी, वह मराठी मूल की थी. इसलिए उन्होंने अभिजीत के नाम के साथ विनायक को जोड़ा था. अभिजीत के पिता प्रोफेसर दीपक बनर्जी, प्रेसिडेंसी में ही इकोनॉमिक्स विभाग के प्रमुख थे.

साउथ प्वाइंट स्कूल के एल्यूमनी अभिजीत बनर्जी ने 1976 में माध्यमिक और 1978 में हायर सेकेंडरी की परीक्षा दी थी. प्रेसिडेंसी कॉलेज में जल्द ही उन्हें बतौर बेहद मेधावी विद्यार्थी की पहचान मिल गयी थी. अपनी पिता की कक्षा में अभिजीत पीछे के बेंच में अमूमन शांत बैठे रहते थे. कॉलेज में उनकी पोशाक पैंट व कुर्ता थी. पेशे से चार्टर्ड एकाउंटेंट अभिजीत पाठक बताते हैं कि प्रेसिडेंसी में पार्ट वन की परीक्षा में एक बार अभिजीत बनर्जी को बेहद कम अंक मिले थे. इससे ऑनर्स मिलना मुश्किल हो गया था. लेकिन पार्ट टू में उन्होंने इतना अच्छा प्रदर्शन किया कि उन्हें फिर कोई मुश्किल नहीं हुई. इधर पार्ट वन की उत्तर पुस्तिकाओं का रीव्यू कराने पर उनके अंक भी बढ़ गये थे. बाद में अभिजीत जेएनयू फिर हार्वर्ड भी गये. पढ़ाई के बाहर अभिजीत को गानों का शौक था. कॉफी हाउस में खूब मजा भी वह करते थे. उस वक्त कॉलेज स्ट्रीट इलाके में अमेरिकन सेंटर था. वहां अभिजीत के साथ उन्होंने चार्ली चैपलीन की दो फिल्में भी देखी.

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