मोटर ह्विकल एक्ट 2019 : अमीरों के लिए मामूली व गरीबों के लिए जानलेवा
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 14 Sep 2019 2:08 AM
कोलकाता : केंद्र सरकार ने तीन दशक के बाद मोटर ह्विकल एक्ट के नियमाें में काफी बदलाव किया है, जिसमें केंद्र सरकार ने ट्रैफिक व यातायात नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना की राशि को काफी अधिक बढ़ा दिया है. इस कानून को लेकर पूरे देश में हाहाकार मचा हुआ है. कई राज्यों ने इसे […]
कोलकाता : केंद्र सरकार ने तीन दशक के बाद मोटर ह्विकल एक्ट के नियमाें में काफी बदलाव किया है, जिसमें केंद्र सरकार ने ट्रैफिक व यातायात नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना की राशि को काफी अधिक बढ़ा दिया है. इस कानून को लेकर पूरे देश में हाहाकार मचा हुआ है. कई राज्यों ने इसे लागू किया है तो कई राज्यों ने केंद्र सरकार के इस नये कानून को मानने से इंकार कर दिया है.
मोटर ह्विकल एक्ट 2019 को लेकर शुक्रवार को प्रभात खबर ने यातायात से जुड़े व्यवसायियों व निजी वाहन चलानेवाले कई लोगों से बात की, जिसमें अधिकतर लोगों का कहना है कि नियम का लागू होना जरूरी है. लेकिन यह कुछ ज्यादा ही कड़ा नियम है. अमीरों के लिए यह मामूली है, लेकिन गरीबों के लिए जानलेवा है.
सजल घोष, संयुक्त सचिव, फेडरेशन ऑफ वेस्ट बंगाल ट्रक ऑपरेटर्स एसोसिएशन : केंद्रीय सरकार को ट्रैफिक नियम में बदलाव करने से पहले आधारभूत सुविधाओं का विकास करना चाहिए. दिल्ली में ओवरलोडिंग के लिए ट्रैफिक पुलिस ने दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया है, लेकिन केंद्र सरकार ओवरलोडिंग देश के राष्ट्रीय राजमार्गों पर बने टोल टैक्स संग्रह केंद्रों पर भी ओवरलोडिंग को चेक करने की मशीन लगाई जा सकती है. इस नियम से सबसे ज्यादा परेशानी ट्रक वालों को हुई है. इस तरह के नियमों से यह व्यवसाय पूरी तरह उठ जाएगा. जुर्माना से ट्रैफिक नियम टूटना बंद नहीं होगें, बल्कि लोगों में आक्रोश बढ़ेगा. राज्य में मुख्यमंत्री ने सेव ड्राइव, सेफ लाइफ की योजना शुरू की है. लेकिन आश्चर्य इस बात का है कि राज्य में मोटर ट्रेनिंग सेंटर की संख्या लगातार कम हो रही है.
नरेश श्रीवास्तव, व्यवसायी : यह कानून आम जनता के लिए जानलेवा है. लोगों के पास रुपये रहेगा, तब तो कोई जुर्माना देगा. यह केंद्र सरकार का तुगलकी फरमान है. सरकार का कहना है कि जुर्माने के डर से लोग सर्तक रहेंगे. लेकिन ऐसा नहीं है. सरकार को लोगों की जागरूकता पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए. पश्चिम बंगाल सरकार ने इसे लागू नहीं करके बहुत अच्छा काम किया है. क्योंकि इस नियम के लागू होने से भ्रष्टाचार और बढ़ेगा.
सुब्रत घोष (शंकर), अध्यक्ष, ज्वायंट काउंसिल ऑफ लग्जरी टैक्सी एसाेसिएशन (प.बं.) : इस नियम से ऑटो इंडस्ट्री पूरी तरह से ध्वस्त हो जायेगी. अमीर लोगों के लिए यह जुर्माना कुछ नहीं है. केंद्रीय मंत्रियों के घर में शादियों में 100 करोड़ रुपये खर्च किये जाते हैं तो वह आम जनता की तकलीफ को कहां समझ पाएंगे. नियम बनाना सही है, लेकिन केंद्र सरकार को कोई भी नियम बनाते समय उसके मानवीय पहलू को भी ध्यान में रखना चाहिए. नये नियम पर केंद्र सरकार को एक बार फिर से गहन चिंतन करके फैसला लेने की आवश्यकता है. जुर्माने का बढ़ाया जाना भ्रष्टाचार को और अधिक बढ़ावा देगा. ट्रैफिक नियम तोड़ने पर इतना अधिक जुर्माना सही नहीं है. इसका विरोध होना चाहिए.
राजीव गुप्ता, महासचिव, ज्वायंट काउंसिल ऑफ लग्जरी टैक्सी एसाेसिएशन (प.बं.) : केंद्र सरकार द्वारा लागू किये गये मोटर ह्विकल कानून को स्वीकार नहीं किया जा सकता. सिर्फ राजस्व कमाने के लिए यह नियम लागू किया है. दो-तीन महीने तक लोग जुर्माना देंगे, लेकिन उसके बाद इसमें भ्रष्टाचार का नया दौर शुरू हो जायेगा. अधिक जुर्माना नहीं देकर लोग किसी भी तरह कम से कम जुर्माना देना चाहेंगे तो ऐसे में भ्रष्टाचार को और अधिक बढ़ावा देगा. बाद में इससे सरकार की बजाय पुलिस वालों को फायदा होगा.
आत्म प्रकाश सिंह, व्यवसायी व समाजसेवी : देश में मोटर ह्विकल एक्ट में संशोधन करने की हिम्मत किसी सरकार ने भी नहीं दिखाई. इससे पहले 1989 में मोटर ह्विकल एक्ट का संसोधन हुआ था, उसके तीन दशक बाद किसी सरकार ने मोटर ह्विकल एक्ट में संसोधन करते हुए जुर्माने की राशि को बढ़ाया है. हालांकि यह मुद्दा आम जनता व वोट बैंक से जुड़ा है. इसलिए 30 वर्षों तक इसे बदलने से सभी कतराते रहे. ट्रैफिक नियम तोड़ने पर जुर्माने के साथ जेल का भी प्रावधान होना चाहिए. इससे लोगों के मन में सजा का डर बना रहेगा.
तेजिंदर पाल सिंह, वरिष्ठ अधिवक्ता : केंद्र सरकार का यह नियम गरीबों पर सर्जिकल स्ट्राइक के समान है. केंद्र सरकार ने नियम को बदलने की हिम्मत जुटायी है, लेकिन लगता है सरकार ने कुछ ज्यादा हिम्मत जुटा लिया है. ट्रैफिक नियमों व जुर्माना की राशि बढ़ा कर समाज में सुधार नहीं हो पाएगा. यह देश की आम जनता पर अत्याचार करना है.
अनूप कुमार उपाध्याय, वरिष्ठ अधिवक्ता : किसी भी नियम में कुछ अच्छाईयां और कुछ बुराइयां भी होती है. मैं खुद इतने अधिक जुर्माने के विरोध में हूं, लेकिन चीजों को सुधारने के लिए कुछ ठोस कदम भी उठाए जाते हैं. जिस प्रकार से रफ ड्राइविंग की घटनाएं बढ़ी हैं, इसे नियंत्रित करने के लिए कड़े कदम उठाने पड़ेंगे. यह नियम कुछ गरीब लोगों के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन कुछ लोगों के लिए सजा भी है.
परमिंदर सिंह, सचिव, कोलकाता ऐप कैब एसोसिएशन : नये नियम में सुधार होना चाहिए. कोई भी नियम अमीरों और ताकतवर लोगों पर लागू नहीं होते. गरीब लोगों पर थोपे जाते हैं. ऐसा नहीं होना चाहिए. नये युवा कुछ ट्रैफिक नियमों को तोड़ते हुए बेढंग तरीके से गाड़ी चलाते हैं, उन्हें सुधारना जरूरी है, लेकिन इतना जुर्माना सही नहीं.
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