नाउम्मीदी में कर रहे उम्मीद की तलाश

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 09 Sep 2019 8:53 AM

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कोलकाता : बहूबाजार इलाके में मेट्रो रेलवे द्वारा किये जा रहे भूमिगत कार्य के दौरान क्षतिग्रस्त हुए घरों को आनन-फानन में खाली कराये जाना गत एक हफ्ते से जारी है. सेकरापाड़ा लेन व दुर्गापितुरी लेन स्थित करीब सभी इमारतों‍ को खाली करवा दिया गया है. अब गौर दे लेन में इमारतों को खाली कराया जा […]

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कोलकाता : बहूबाजार इलाके में मेट्रो रेलवे द्वारा किये जा रहे भूमिगत कार्य के दौरान क्षतिग्रस्त हुए घरों को आनन-फानन में खाली कराये जाना गत एक हफ्ते से जारी है. सेकरापाड़ा लेन व दुर्गापितुरी लेन स्थित करीब सभी इमारतों‍ को खाली करवा दिया गया है. अब गौर दे लेन में इमारतों को खाली कराया जा रहा है.

इस बीच, खाली करायी जा चुकीं इमारतों में रहनेवाले लोग रोजाना नयी उम्मीद लेकर अपने घरों के आस-पास जमा हो जाते हैं. सुरक्षा के नाम पर इस इलाके की घेराबंदी कर दी गयी है. मध्य कोलकाता में स्थित इन घरों से एक सितंबर को निकाले जाने के दौरान उन्हें अपना सब कुछ वहीं छोड़ कर निकलना पड़ा था, आधार कार्ड और बैंक कागजातों से लेकर पारिवारिक विरासत में मिले सामान तक.
मेट्रो रेल द्वारा सुरंग खुदाई का काम किये जाने के दौरान बहूबाजार इलाके में दुर्गापितुरी लेन और सेकरापाड़ा लेन के कई घर या तो ढह गये थे या उनमें बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गयी थीं.
महानगर की सबसे घनी आबादीवाले क्षेत्रों में से एक बहूबाजार को शहर का आभूषण केंद्र माना जाता है. यहां सदियों पुरानी कई इमारतें हैं.
अचानक से बेघर हुए 500 से अधिक लोगों में वे लोग भी शामिल हैं, जिनके घर अब तक प्रभावित नहीं हुए थे. लेकिन इन घरों को भी रहने के लिहाज से असुरक्षित करार दिया गया है, क्योंकि वे उस जगह के करीब थे, जहां नुकसान हुआ था.
बेघर हुए ज्यादातर लोगों को कोलकाता मेट्रो रेलवे कॉरपोरेशन लिमिटेड (केएमआरसीएल) द्वारा विभिन्न होटलों में रुकवाया गया है, जबकि कई अन्य रिश्तेदारों के घर पर ठहरे हुए हैं.
केएमआरसीएल इस परियोजना को लागू करने का काम कर रही है. लोगों को 50 से अधिक घरों से निकाला गया और उनमें से कुछ खुशकिस्मत थे, जिन्हें पुलिस ने उनके सलामत बचे घरों में जाकर यह देखने की इजाजत दे दी कि वे वहां छूट गये दस्तावेजों या कीमती सामान को निकाल सकें.
केएमआरसीएल के महाप्रबंधक (प्रशासन) एके नंदी ने कहा : स्थिति के मुताबिक इलाके में 10 और घरों को खाली कराना पड़ सकता है. देश में पहली बार ऐसा हो रहा है, जहां नदी (हुगली) के नीचे सुरंगें खोदी जा रही हैं, जो रैपिड ट्रांजिट सिस्टम के जरिये कोलकाता और हावड़ा को जोड़ेंगी.
कुछ और इमारतों को तोड़ेगा केएमआरसीएल
इस बीच, केएमआरसीएल ने सेकरापाड़ा लेन व दुर्गा पितुरी लेन स्थित कुछ इमारतों को खाली कराने लिए एक सूची तैयार की है. इस सूची में चार से पांच इमारतों को शामिल किया गया है.
आज होगी बैठक :
वहीं, इनमें रहनेवाले लोग इमारतों को खाली करने को तैयार नहीं हैं. ऐसे में इस जटिलता को लेकर कोलकाता नगर निगम व केएमआरसीएल के अिधकािरयों के बीच सोमवार बैठक होगी, जहां उक्त इमारतों को खाली कराये जाने को लेकर चर्चा होगी.
बहूबाजार के अस्तित्व पर खतरा :
बहूबाजार के अधिकांश इलाकों को खाली कर दिया गया है. वहीं, दुर्गापितुरी लेन व सेकरापाड़ा लेन स्थित कई मकान तो गिर चुके हैं. हालांकि इनमें रहनेवाले लोगों को कोई क्षति नहीं पहुंची है. लेकिन यहां के स्थानीय लोगों का कहना है कि कहीं पूरे बहूबाजार का ही सफाया न हो जाये, क्योंकि मकानों के ढहने का क्रम अब भी जारी है.
सीमेंट राउटिंग का काम शुरू :
बहूबाजार इलाके में जमीन के अंदर सुरंग में छेद होने व पानी बहने के कारण चट्टानों के दरकने से इमारतों को क्षति पहुंची है. वहीं, जमीन के अंदर चट्टानों की दरारों को भरने के लिए रविवार सुबह गौर दे लेन इलाके का सीमेंट राउटिंग का काम शुरू किया गया है. यह काम अभी जारी रहेगा.
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