ePaper

जब सच का विरोध होगा, वो अपनी गीता सुनायेगा, कृष्ण आयेगा

Updated at : 23 Aug 2019 1:53 AM (IST)
विज्ञापन
जब सच का विरोध होगा, वो अपनी गीता सुनायेगा, कृष्ण आयेगा

कोलकाता : जब-जब इस दुनिया में जुल्म बढ़ेगा, जब सच का विरोध होगा, वो अपनी गीता सुनाएगा, कृष्णा आएगा, इन पंक्तियों को जैसे ही बॉलीवुड इंडस्ट्री के मशहूर गीतकार, कवि व लेखक जावेद अख्तर ने बुधवार को प्रभा खेतान द्वारा 500वें साहित्यिक सत्र में सुनाई. तालियों की गड़गड़ाहट पूरे हॉल में गूंज उठी और ऐसा […]

विज्ञापन

कोलकाता : जब-जब इस दुनिया में जुल्म बढ़ेगा, जब सच का विरोध होगा, वो अपनी गीता सुनाएगा, कृष्णा आएगा, इन पंक्तियों को जैसे ही बॉलीवुड इंडस्ट्री के मशहूर गीतकार, कवि व लेखक जावेद अख्तर ने बुधवार को प्रभा खेतान द्वारा 500वें साहित्यिक सत्र में सुनाई.

तालियों की गड़गड़ाहट पूरे हॉल में गूंज उठी और ऐसा हो भी क्यों न? उर्दू भाषा में महारत हासिल किये प्रसिद्ध गजलों, नज्मों व रतिफ को लिखनेवाले श्री जावेद ने कृष्ण पर बेहद ही खूबसूरत अंदाज में शुद्ध हिंदी में कविता का पाठ किया. वो भी तब जब कुछ दिन बाद ही पूरे भारत वर्ष में जन्माष्टमी मनायी जाएगी. उन्होंने इस कविता का पाठ अपने एक जागरण कार्यक्रम के संस्मरण को सुनाते हुए किया. उन्होंने बताया जब वह 20-21 साल के थे. उन्होंने कविता लिखना शुरू कर दिया था.
उन्होंने अपने साहित्यिक जीवन से जुड़े कई संस्मण को सुनाते हुए कहा कि उनके पिता की लिखी लगभग 200 कविताएं हैं, जो पांच खंडों में प्रकाशित हुई हैं. उन्होंने इन पांच खंडो को आठ केजी का वजन कह कर संबोधित किया.
जब उनसे पूछा गया कि उन्हें सबसे पुरानी भाषा कौन-सी लगती है, क्या यह उर्दू है. उन्होंने कहा कि सबसे पुरानी भाषा उनके अनुसार तमिल और संस्कृत है. श्री अख्तर ने कहा कि हिंदी और उर्दू को पूरी दुनिया में एक ऐसी भाषा पाया गया है, जिसका कोई स्क्रिप्ट नहीं है.
जब गजल के बारे में उनसे पूछा गया तो उन्होंने कहा कि गजल लेखनी का एक बहुत ही रोमांचक तरीका है. वहीं रतिफ पूरी दुनिया में कविता लेखन की बेहद अलग कला है, जिसमें कोई राइम्स नहीं होते. उन्होंने कहा कि कविता लेखन में सिम्बल देखने को मिलते हैं, जहां शब्दों को ही संकेतक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. इसके लिए उन्होंने आशिक, मैखाना, शेख इत्यादि के उदाहरण भी दिए.
श्री अख्तर से जब पूछा गया कि उनमें लेखन की इतनी जबरदस्त कला है, वह कैसे विकसित हुई तो उन्होंने कहा कि उनकी सात पीढ़ियां लेखन का काम करती रही, जिससे लेखन में उनकी रूची बढ़ गयी. उन्होंने फिर हंसते हुए कहा कि उनकी अम्मी कहा करती थीं कि ‘तू कुछ नहीं करेगा, सिर्फ बात ही बनाएगा.’ जिसका अभिप्राय था कि बचपन से ही श्री अख्तर की लेखन में काफी रूची रही.
श्री अख्तर ने कार्यक्रम के दौरान विश्व गुरु रवींद्रनाथ टैगोर की कविताओं का हिंदी अनुवाद पेश किया, जिसे आवाज फिल्ममेकर संगीता दत्त ने दिया. उन्हें आज भी वह कमरा याद आता है, ये आंसू क्या है कविताओं का पाठ किया. इस मौके पर प्रभा खेतान फाउंडेशन के मैनेजिंग ट्रस्टी संदीप भुतोड़िया ने कहा कि किसी भी संस्था के लिए 500 साहित्यिक सत्र करना गौरव की बात है. वह संस्था के माध्यम से सभी भाषाओं के साहित्य व कला को बढ़ावा देना चाहते हैं.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola