वृद्ध दंपती हत्याकांड में कटिहार से पकड़ा गया आरोपी
Updated at : 05 Aug 2019 5:59 AM (IST)
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कोलकाता : नेताजी नगर थाना अंतर्गत अशोक एवेन्यू स्थित एक इमारत में रहने वाले वृद्ध दंपती दिलीप मुखर्जी (80) और स्वपना मुखर्जी (72) की हत्या के आरोप में पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया. आरोपी का नाम मोहम्मद हमरूज आलम (38) बताया गया है. वह पेशे से रंग मिस्त्री है. उसे शनिवार की रात […]
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कोलकाता : नेताजी नगर थाना अंतर्गत अशोक एवेन्यू स्थित एक इमारत में रहने वाले वृद्ध दंपती दिलीप मुखर्जी (80) और स्वपना मुखर्जी (72) की हत्या के आरोप में पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया. आरोपी का नाम मोहम्मद हमरूज आलम (38) बताया गया है.
वह पेशे से रंग मिस्त्री है. उसे शनिवार की रात बिहार के कटिहार से गिरफ्तार किया गया है. वह अपने एक रिश्तेदार के घर पर छिपा हुआ था. उसके कब्जे से दंपती के घर से लूटे गये कुछ गहने और नकद जब्त किये गये हैं. कटिहार की स्थानीय अदालत में पेश कर आरोपी को महानगर लाने की प्रक्रिया की जा रही है. इस बात की पुष्टि कोलकाता पुलिस के संयुक्त आयुक्त (अपराध) मुरलीधर शर्मा ने की है.
पहले से ही संदेह के घेरे में था
वृद्ध दंपती की लाश 30 जुलाई को उनके घर से बरामद की गयी थी. पोस्टमार्टम की प्राथमिक रिपोर्ट और पुलिस की जांच के अनुसार दोनों की हत्या 29 जुलाई की रात 10 से 12 बजे के बीच में हुई थी. घटना के ठीक चार-पांच दिनों पहले दंपती के घर पर रंग और छत पर प्लास्टर का काम खत्म हुआ था. काम का ठेका जिस व्यक्ति ने लिया था,
वह रोज नये मिस्त्री व मजदूरों को लाता था. उससे पूछताछ के बाद पुलिस को कुछ मिस्त्री और मजदूरों के नाम का पता चला. इनमें ज्यादातर बिहार और उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं. इनमें से एक हमरूज भी है. पुलिस ने महानगर में उनके अस्थायी ठिकानों का पता लगाना शुरू किया.
जांच के बाद पुलिस को पता चला कि हमरूज घटना के बाद से गायब था. घटना के बाद से ही उसका कुछ पता नहीं चलने के कारण वह पुलिस के संदेह के घेरे में पहले से ही था. पुलिस को कटिहार के बारसोई में उसके घर का पता चला. वहां पुलिस की एक टीम पहुंची, लेकिन वह घर पर नहीं मिला. काफी तलाशी के बाद पुलिस को उसके एक रिश्तेदार का पता चला, जिसके घर पर वह छिपा हुआ था.
उसका पता चलते ही पुलिस ने शनिवार की रात उसे वहां से दबोच लिया. पुलिस का कहना है कि दिलीप मुखर्जी भी व्यवसायी थे लेकिन कुछ वर्ष पहले उन्होंने व्यवसाय छोड़ दिया था. वे जिस व्यवसाय से जुड़े थे, उस बाबत घरों में रंग करने वाले, प्लंबर व अन्य काम करने वाले मिस्त्री व मजदूरों से उनकी अच्छी पहचान थी.
एक समय उसी काम से जुड़ा होने व दोस्ताना स्वभाव होने के कारण वह मजदूरों से जल्दी घुल-मिल जाते थे. उनके घर काम करने वाली महिला ने पुलिस को बताया था कि दिलीप मजदूरों के सामने ही आलमारी खोलकर रुपये निकालते थे. घटना के कुछ दिनों पहले ही उन्होंने बैंक से करीब 50 हजार रुपये निकाले थे. घटना के बाद रुपये गायब थे.
लूट के लिए हुई थी हत्या
पुलिस का कहना है कि लूट के लिए दंपती की हत्या ही आरोपियों का मुख्य मकसद था. दिलीप को पैरालाइसिस की बीमारी थी और उनकी पत्नी की उम्र भी काफी थी. वे पकड़े गये आरोपी को पहचानते थे. ऐसे में घटना को अंजाम देने वाले आरोपी किसी भी हाल में उन्हें जिंदा नहीं छोड़ना चाह रहे थे. दरवाजा खोलने के बाद ही स्वपना की हत्या कर दी गयी.
उनकी लाश मकान के मुख्य द्वार के सीढ़ियों पर पड़ी मिली थी. उसके बाद दिलीप की हत्या की गयी जो मकान के दूसरे तल्ले पर थे. बताया जा रहा है कि वृद्ध दंपती के घर से संपत्ति के कुछ दस्वावेज गायब हैं. पुलिस ने आशंका व्यक्त की है कि हत्याकांड में और भी कुछ लोग शामिल हो सकते हैं. आरोपी से पूछताछ के बाद पुलिस को कई महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर मिल सकते हैं.
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