अन्य दलों से भाजपा में शामिल होने की प्रक्रिया पर लगी लगाम
Updated at : 29 Jul 2019 1:43 AM (IST)
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कोलकाता : लोकसभा चुनाव के बाद तृणमूल सहित अन्य पार्टियों से भाजपा में शामिल होनेवाले नेता, विधायक और अन्य नेताओं का तांता लग गया था. लेकिन पार्टी के अंदर आपत्ति के बाद अब अन्य दलों से भाजपा में शामिल होने की प्रक्रिया लगभग थम-सी गयी है. दूसरी ओर, अन्य पार्टियों से भाजपा में शामिल हुए […]
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कोलकाता : लोकसभा चुनाव के बाद तृणमूल सहित अन्य पार्टियों से भाजपा में शामिल होनेवाले नेता, विधायक और अन्य नेताओं का तांता लग गया था. लेकिन पार्टी के अंदर आपत्ति के बाद अब अन्य दलों से भाजपा में शामिल होने की प्रक्रिया लगभग थम-सी गयी है. दूसरी ओर, अन्य पार्टियों से भाजपा में शामिल हुए विधायक व अन्य नेता खुद को अलग-थलग महसूस करने लगे हैं.
उनलोगों ने अपनी सक्रियता कम कर दी है. कई नेताओं का आरोप है कि उन्हें पार्टी में उचित सम्मान और स्थान नहीं मिल पा रहा है. इन नेताओं का आरोप है कि वे अपने इलाके में काम नहीं कर पा रहे हैं. दूसरी ओर, प्रदेश नेतृत्व की ओर से उन लोगों से फिलहाल चुपचाप रहने का निर्देश दिया गया है.
बागदा के कांग्रेस के विधायक दुलाल बर दल-बदल कर भाजपा में शामिल हुए हैं. श्री बर का कहना है कि पिछले 30 वर्षों से वह राजनीति कर रहे हैं, लेकिन भाजपा उनका इस्तेमाल नहीं कर रही है. स्थानीय नेता उनके साथ कोई संपर्क नहीं रखते हैं. न ही पार्टी के किसी कार्यक्रम की उन्हें जानकारी दी जाती है.
वह हताश महसूस कर रहे हैं. उल्लेखनीय है कि श्री बर दल-बदल कर बनगांव लोकसभा क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की इच्छा जतायी थी. लेकिन पार्टी ने उनकी दावेदारी को नजरदांज कर शांतनु ठाकुर को टिकट दे दिया था और शांतनु ठाकुर विजयी भी हुए हैं. अब उस इलाके में श्री बर की गणना बागी भाजपा नेताओं में होने लगी है.
दुलाल बर की तरह ही विष्णुपुर से कांग्रेस के विधायक तुषारकांति भट्टाचार्य भाजपा में शामिल हुए थे. उनका कहना है कि पार्टी ने उन्हें फिलहाल शांत रहने का निर्देश दिया है. वह उस निर्देश को मान रहे हैं. उन्हें कहा गया है कि समय आने पर उन्हें उनके योग्य दायित्व दिया जायेगा. वह इसका इंतजार कर रहे हैं.
विधानसभा में फिलहाल भाजपा के छह विधायक हैं, लेकिन यदि अन्य दलों से भाजपा में शामिल हुए विधायकों की संख्या देखी जाये, तो इनकी संख्या 14 है. विधानसभा के बजट सत्र के दौरान अन्य पार्टियों से भाजपा में शामिल हुए विधायक विधानसभा की कार्यवाही में नहीं दिखे और न ही उनकी सक्रियता ही दिखी. प्रदेश भाजपा कार्यालय में इस विषय पर चर्चा के लिए इन विधायकों को बुलाया गया था, लेकिन इनमें से अधिकतर विधायक बैठक से नदारद रहे.
इसी तरह से हेमताबाद के विधायक देवेंद्रनाथ राय माकपा से भाजपा में शामिल हुए हैं. श्री राय का कहना है कि औपचारिक रूप से उन्हें पार्टी में अभी तक कोई पद नहीं दिया गया है. इस कारण पार्टी के किसी भी बैठक में वह हिस्सा नहीं ले पा रहे हैं. भाजपा में सबकुछ नियम के अनुसार होता है.
इस कारण पद नहीं रहने पर कई कार्यक्रमों की उन्हें जानकारी नहीं मिल पाती है. तृणमूल से भाजपा में शामिल हुए बनगांव उत्तर के विधायक विश्वजीत दास अपने समर्थक पार्षदों की सुरक्षा की व्यवस्था को लेकर परेशान हैं. उनका कहना है कि वह अपने इलाके में नहीं जा पा रहे हैं. उनके साथ बनगांव नगरपालिका के कई पार्षद भी हैं. इसके बाद कहा जा रहा है कि वे पार्टी का काम नहीं कर रहे हैं.
प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष व अन्य पार्टियों से भाजपा में शामिल हुए विधायकों के बीच समन्वय काम करनेवाले भाजपा नेता जयप्रकाश मजूमदार का कहना है कि अन्य पार्टियों से भाजपा में शामिल हुए नेताओं को तरह-तरह से भय दिखाया जा रहा है. उनके हर काम करने में बाधा दी जा रही है. हालांकि आरंभ में कुछ परेशानी है, लेकिन शीघ्र ही ये विधायक अपनी गति से काम करने लगेंगे.
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