Premanand Ji Maharaj Quotes on Love: प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार प्रेम (love) केवल आकर्षण, भावनात्मक लगाव या शारीरिक चाहत नहीं है, बल्कि यह एक दिव्य और आध्यात्मिक अनुभूति है. आज के समय में लोग अक्सर काम (Kama) को प्रेम समझ बैठते हैं, जबकि सच्चा प्रेम आत्मा को ईश्वर से जोड़ने वाला मार्ग है. उनके प्रवचनों में प्रेम को सत्-चित्-आनंद की अवस्था बताया गया है, जो मनुष्य को सांसारिक बंधनों से मुक्त करता है.
Premanand Ji Maharaj कहते हैं कि जिस प्रेम में स्वार्थ, अधिकार और अपेक्षा हो, वह प्रेम नहीं बल्कि बंधन है. सच्चा प्रेम व्यक्ति की दृष्टि को बदल देता है और उसे हर जीव व वस्तु में ईश्वर के दर्शन कराता है.
Premanand Ji Maharaj Quotes on Love: प्रेमानंद जी महाराज के अनमोल विचार प्रेम पर

- प्रेम आकर्षण या क्षणिक इच्छा नहीं, बल्कि सत्-चित्-आनंद की दिव्य अनुभूति है.
- सच्चा प्रेम वही है, जिसमें जीव को हर प्राणी और जड़ वस्तु में भी भगवान दिखाई देने लगें.
- सांसारिक प्रेम में अक्सर मलिन भाव – जैसे स्वार्थ, ईर्ष्या और अधिकार छिपे होते हैं.
- काम, क्रोध और लोभ – नरक के तीन द्वार – झूठे प्रेम से ही जन्म लेते हैं.
- ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण और वैराग्य ही आध्यात्मिक प्रेम की पहचान है.
- सांसारिक प्रेम में आत्महत्या करना प्रेम नहीं, बल्कि अज्ञान है और इसका कर्मफल नकारात्मक होता है.
- ईश्वर को प्राप्त करना हर आत्मा का जन्मसिद्ध अधिकार है, जैसे उत्तराधिकारी को विरासत.
- भगवान के नाम का निरंतर स्मरण प्रेम को शुद्ध करता है.
- काम और प्रेम में स्पष्ट भेद समझना ही आध्यात्मिक उन्नति की कुंजी है.
- सच्चा प्रेम सार्वभौमिक, पवित्र और ईश्वर से जुड़ा हुआ होता है.
Premanand Ji Maharaj के ये विचार बताते हैं कि प्रेम का अंतिम लक्ष्य ईश्वर से मिलन है. यही प्रेम जीवन को शुद्ध, व्यापक और दिव्य बनाता है.

