डॉक्टरों की हड़ताल जारी : इलाज के लिए भटकते रहे रोगी व परिजन, दर्द और आंसू थे आंखों में

पश्चिम बंगाल के अस्पतालों में जारी डॉक्टरों की हड़ताल के मद्देनजर गुरुवार को कलकत्ता नेशनल मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (सीएनएमसीएच) में कई मरीजों और उनके परिवारवालों को दर्द और आंसू लिये मजबूरन बिना इलाज के ही लौटना पड़ा. कोई बच्चे को लेकर पहुंचा था, तो कोई अपने बुजुर्ग पिता को, तो कोई अपनी गर्भवती पत्नी […]
पश्चिम बंगाल के अस्पतालों में जारी डॉक्टरों की हड़ताल के मद्देनजर गुरुवार को कलकत्ता नेशनल मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (सीएनएमसीएच) में कई मरीजों और उनके परिवारवालों को दर्द और आंसू लिये मजबूरन बिना इलाज के ही लौटना पड़ा. कोई बच्चे को लेकर पहुंचा था, तो कोई अपने बुजुर्ग पिता को, तो कोई अपनी गर्भवती पत्नी को, तो कोई अपने रिश्तेदार को, लेकिन उन्हें मायूसी के साथ लौटना पड़ा.
तकलीफ होगी, तब होगी भर्ती
गुरुवार दोपहर मल्लिक बाजार निवासी राधा मल्लिक अपनी गर्भवती बेटी यशोदा मल्लिक को लेकर सीएनएमसीएच अस्पताल पहुंची थी. राधा का कहना है कि अस्पताल ने यशोदा को गुरुवार को भर्ती करने का तारीख दिया था, इसलिए गुरुवार को उसे लेकर आये. लेकिन गेट पर कुछ जूनियर डॉक्टर यह कहकर अंदर जाने और भर्ती लेने से मना कर दिये कि जब तकलीफ होगी, दर्द होगा, तब मरीज को भर्ती लेंगे. अभी घर लौट जायें.
तीन दिन से टेस्ट भी नहीं हुआ
बारुईपुर निवासी जाकिर हुसैन मोल्ला ने बताया कि अपनी मां जरीना बीबी को सांस की समस्या से पीड़ित हालत में अस्पताल में भर्ती करवाया था, लेकिन पिछले तीन दिनों से उनका दो टेस्ट भी नहीं किया गया. मरीज को जस की तस हालत में छोड़ दिया गया है. ऐसे में मजबूरन मरीज को निकालकर ले जाना चाहते थे, तो उसमें भी कई घंटों तक परेशानी झेलनी पड़ी. अंत में उसे छोड़ा गया.
मरीज से मिलने भी नहीं दे रहे
कई परिजनों को उनके मरीज से मिलने भी नहीं दिया गया. बजबज निवासी सुभाष अधिकारी ने बताया कि उसके चाचा बलाई अधिकारी बुखार से पीड़ित हैं. पिछले कुछ दिनों से इस अस्पताल में भर्ती हैं. रोजाना चाचा से मिलने के लिए आते हैं, लेकिन डॉक्टर अब ठीक से मिलने भी नहीं दे रहे हैं. कई तरह के नियम-कानून बता रहे हैं. अंदर प्रवेश तक नहीं करने दिया जा रहा है.
हर्ट अटैक का मरीज बिना इलाज लौटा
दक्षिण 24 परगना जिले के बजबज निवासी 85 वर्षीय इमान मोल्ला के लेकर गुरुवार दोपहर उनके परिवार वाले सीएनएमसीएच अस्पताल पहुंचे थे. परिजनों का कहना है कि इमान को हार्ट अटैक आया था, लेकिन अस्पताल ने भर्ती नहीं लिया. डॉक्टरों ने एक नहीं सुनी, मजबूरन लौटना पड़ रहा है. इसी तरह से बजबज निवासी अरमान अली नस्कर ने बताया कि वे अपने परिवार की वृद्धा नूरजहां बीबी (70) को सीने में पानी जमने के कारण विद्यासागर हॉस्पिटल से रेफर के बाद सीएनएमसीएच लेकर आये थे. लेकिन दाखिला नहीं लिया गया. बिना इलाज के ही लौटना पड़ा.
बच्चा तो मर गया, मां को तो बचायें
सीएनएमसीएच के गेट पर घंटों से परेशान चक्कर काट रहे कैनिंग निवासी सुमन मृद्धा ने बताया कि उसकी गर्भवती पत्नी ममता को कुछ दिनों पहले भर्ती कराया गया था. गत रविवार रात काे ऑपरेशन में उसने एक बच्चे को जन्म दिया. लेकिन बच्चा मर गया और अब पत्नी की हालत गंभीर है. ऐसे में डॉक्टर पत्नी से भी सही तरीके से नहीं मिलने दे रहे हैं. उसकी क्या स्थिति है? कुछ साफ-साफ नहीं बता रहे हैं. सिर्फ बोल रहे हैं, मरीज ठीक है. मेरा बच्चा तो मर गया, उसकी मां को तो बचायें.
दिनभर रणनीति बनाते रहे मे़िडकल कॉलेज अस्पताल के जूनियर डॉक्टर
राज्य भर के विभिन्न अस्पतालों में गत तीन दिनों से जारी जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल का असर गुरुवार को भी महानगर के विभिन्न अस्पतालों की तरह मध्य कोलकाता के मेडिकल काॅलेज अस्पताल में भी देखा गया. यहां दिनभर जूनियर डॉक्टर अगली रणनीति बनाने में व्यस्त रहे. अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड के बाहर वे कभी सुरक्षा, तो कभी अपनी मांगें पूरी करने को लेकर नारेबाजी करते दिखे. नारेबाजी कर रहे जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि वे काम पर लौटने का कोई अल्टीमेटम नहीं स्वीकार करेंगे. एनआरएस अस्पताल में उनके साथी के साथ मारपीट के बाद वहां के जूनियर डॉक्टरों के आंदोलन में वे उनके साथ हैं. अस्पताल के सभी वार्ड में चिकित्सकों की सुरक्षा, हॉस्टल की दयनीय स्थिति में सुधार, पीने के पानी की सप्लाई व सफाई जैसी विभिन्न मांगें जबतक नहीं मानी जातीं, तबतक वे आंदोलन जारी रखेंगे. जूनियर डॉक्टरों ने यह भी चेतावनी दी कि किसी दबाव में अगर एनआरएस अस्पताल में उनके साथी जूनियर डॉक्टर इस हड़ताल को वापस भी ले लें, तो भी जबतक सरकार मेडिकल कॉलेज अस्पताल के जूनियर डॉक्टरों की मांगें नहीं मानेगी, तबतक उनका आंदोलन जारी रहेगा. उधर, गुरुवार को आम दिनों से कोलकाता मेडिकल कॉलेज अस्पताल का नजारा काफी अलग था.
वार्ड में पहले से भर्ती मरीजों की इलाज सीनियर चिकित्सक करते दिखे, जबकि जूनियर डॉक्टर इमरजेंसी के बाहर नारेबाजी में व्यस्त रहे. इस दिन इमरजेंसी विभाग से लेकर अन्य वार्ड में नये मरीज का इलाज नहीं हो सका.
भगवान भरोसे आइसीयू व सीसीयू
एनआरएस मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में मंगलवार को चिकित्सकों के साथ हुई मारपीट की घटना के विरोध में राज्यभर के जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर हैं. इस घटना के विरोध में जहां बुधवार को राज्य के सभी सरकारी व निजी अस्पतालों की आउटडोर सेवा 12 घंटे के लिए बंद रखे गये थे, तो वहीं गुरुवार को भी राज्यभर के जूनियर डॉक्टर हड़ताल पर रहे. डॉक्टरों की हड़ताल के कारण सरकारी अस्पतालों की चिकित्सा व्यवस्था ठप हो गयी है. इंडोर व इमरजेंसी विभाग में भर्ती मरीजों को चिकित्सक नहीं मिल पा रहे हैं. चिकित्सकों की हड़ताल के कारण इलाज के अभाव अब राज्यभर में चार से अधिक मरीजों की मौत हो चुकी है. वहीं, हड़ताल के कारण सरकारी अस्पतालों में भर्ती कुछ मरीजों को जबरन छुट्टी भी दी जा रही है. इधर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हड़ताल कर रहे डॉक्टरों को काम पर वापस लौटने की चेतावनी तक दे डाली है. लेकिन हड़ताली डॉक्टरों ने काम पर लौटने से इनकार कर दिया है और सामूहिक इस्तीफा भेज दिया है. सीएम की चेतावनी के बाद भी महानगर के एनआरएस मेडिकल कॉलेज, कलकत्ता नेशनल मेडिकल कॉलेज, कलकत्ता मेडिकल कॉलेज, सागर दत्त मेडिकल कॉलेज में गुरुवार को आउटडोर व इमरजेंसी विभाग को बंद रहे. उधर, सीएम की चेतावनी के बाद जूनियर डॉक्टरों की ओर से प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा गया है कि डॉक्टरों के प्रति मुख्यमंत्री द्वारा दिया गया बयान शर्मनाक है. प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि इमरजेंसी सेवा बहाल करने के लिए हम आपस में चर्चा कर रहे हैं. हम लोगों की सेहत के प्रति फिक्रमंद हैं. लेकिन अगर हमारी सुरक्षा ही दांव पर होगी, तो हम लोगों की सेवा कैसे करेंगे. उधर, एसएसकेएम में हड़ताल कर रहे चिकित्सकों ने सीएम से कहा कि डॉक्टर समाज के सभी लोगों के स्वास्थ्य का ध्यान रखते हैं. लेकिन हमारे साथ ही बुरा बर्ताव किया जाता है. हमें पूरी सुरक्षा व सम्मान चाहिए.
इलाज के साथ भोजन के लिए भी परेशानी
एनआरएस की घटना के बाद तीन दिनों से आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के जूनियर डॉक्टर भी हड़ताल पर रहे. इससे अस्पताल की ओपीडी सेवा पूरी तरह से ठप रही. वहीं इमरजेंसी सेवा जारी रही. दूर-दराज के जिलों से अस्पताल पहुंचे मरीजों का हाल जानने के लिए चिकित्सक तो नदारद थे ही, वहीं अस्पतालों के आस-पास खाने-पीने की दुकानों के बंद होने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा. इलाज के लिए हुगली जिले से आयी पियाली मुखर्जी ने बताया कि उसकी मां काफी बीमार है, लेकिन उसे नहीं पता कि उसे किस प्रकार अस्पताल में भर्ती करवायें, ओपीडी बंद है. उधर अस्पताल के आस-पास खाने-पीने की दुकानें नहीं खुली है. दुकानों के बंद होने से पानी और दवाइयां नहीं मिल रही हैं.
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