चुनावी मौसम में खून की कमी से मुश्किल में सरकारी ब्लड बैंक, ब्लड बैंक से दिया जा रहा है खून के बदले खून

Updated at : 22 Apr 2019 3:05 AM (IST)
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चुनावी मौसम में खून की कमी से मुश्किल में सरकारी ब्लड बैंक,  ब्लड बैंक से दिया जा रहा है खून के बदले खून

कोलकाता : देश भर में लोकसभा चुनाव के लिए घमासान मचा हुआ है. सभी राजनीतिक दल चुनाव व चुनाव प्रचार को लेकर व्यस्त हैं. पश्चिम बंगाल की भी यही हाल है. यहां एक तो लोकसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा भी चढ़ता जा रहा है. ऊपर से भीषण गरमी पड़ रही है, लेकिन चुनाव और […]

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कोलकाता : देश भर में लोकसभा चुनाव के लिए घमासान मचा हुआ है. सभी राजनीतिक दल चुनाव व चुनाव प्रचार को लेकर व्यस्त हैं. पश्चिम बंगाल की भी यही हाल है. यहां एक तो लोकसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा भी चढ़ता जा रहा है.
ऊपर से भीषण गरमी पड़ रही है, लेकिन चुनाव और गर्मी का सबसे ज्यादा असर राज्य के ब्लड बैंकों पर पड़ा रहा है, जहां खून की भारी कमी हो गयी है. जिलों में स्थित ब्लड बैंक्स की हालत तो और भी खराब है. महानगर के मानिकतल्ला स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ ब्लड ट्रांसफ्यूशन मेडिसिन एंड इ
म्यूनो हेमाटोलॉजी (सेंट्रल ब्लड बैंक) की भी यही दशा है. चुनावी मौसम में राज्य के सबसे बड़े सेंट्रल ब्लड बैंक में लोगों को खून के बदले खून दिया जा रहा है. यानी ब्लड डोनेट करने वाले लोगों को ही रक्त दिया रहा है.
विदित हो कि राज्य के इस सबसे बड़े ब्लड बैंक में करीब एक हजार यूनिट रक्त संग्रह कर रखने की क्षमता है. वहीं प्रतिदिन यहां से 200 से 250 यूनिट रक्त की सप्लाई की जाती ह, लेकिन चुनावी मौसम में यहां रक्त की भारी किल्लत देखी जा रही है. खुद सेंट्रल ब्लड बैंक के कर्मचारी भी खून की कमी होने की बात स्वीकार रहे हैं.
रक्तदान में कमी
इस विषय में ज्यादा जानने के लिए हमने स्वयंसेवी संस्था मेडिकल बैंक के सेक्रेटरी डी आशिष से बात की. डी आशिष के अनुसार स्थिति बेहद भयावह है. लोकसभा चुनाव के कारण रक्त संग्रह में लगभग 80 प्रतिशत की कमी आ गयी है.
कोलकाता के ब्लड बैंक की हालत खराब है, लेकिन जिलों के ब्लड बैंकों की स्थिति तो बेहद चिंताजनक है. थैलेसिमिया के रोगियों और हादसे का शिकार होने वालों को मुश्किल से रक्त मिल रहा है.
आशिष ने कहा कि बंगाल में हर साल 15 लाख यूनिट खून की जरूरत पड़ती है. जबकि लगभग 11 लाख यूनिट रक्त संग्रह होता है. वहीं अब लोकसभा चुनाव के कारण 20 से 30 फीसदी ही रक्त संग्रह हो पा रहा है. मुख्य रूप से बंगाल में रक्त का संग्रह रक्तदान शिविर के द्वारा होता है.
रक्तदान शिविर के आयोजन में राजनीतिक दल और क्लब मुख्य भूमिका निभाते हैं. 60 प्रतिशत रक्तदान शिविर का आयोजन राजनीतिक पार्टियां और 40 प्रतिशत रक्तदान का आयोजन क्लब करते हैं. चूंकि लोकसभा चुनाव चल रहा है , इसलिए सभी राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता और क्लब चुनावी सरगरमी में व्यस्त हैं. इसलिए रक्तदान शिविरों का आयोजन पूरी तरह ठप पड़ गया है.
स्वास्थ्य विभाग जिम्मेवार
डी आशिष के अनुसार इस स्थिति के लिए राज्य स्वास्थ्य विभाग भी बहुत हद तक जिम्मेदार है. विभाग को पता है कि गर्मी और चुनाव के इस मौसम में रक्तदान शिविर का आयोजन न के बराबर होता है.
इस स्थिति में विभाग को आमलोगों से रक्तदान के लिए अपील करनी चाहिए, लेकिन पूरे राज्य में कहीं भी रक्तदान की अपील वाला कोई होर्डिंग लगाया नहीं गया है. आशीष ने बताया कि मेडिकल बैंक की ओर से उत्तर व दक्षिण कोलकाता के कुछ इलाकों में रक्तदान के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए होर्डिंग लगाये जा रहे हैं.
पडेट हो जीवन शक्ति एप
राज्य सरकार द्वारा चालित ब्लड बैंकों में रक्त की उपलब्धता के बारे में निश्चित जानकारी के राज्य सरकार द्वारा जीवन शक्ति एप को चालू किया गया है. लेकिन इस एप को ठीक तरह से अपडेट नहीं किया जा रहा है. रविवार को एप पर शनिवार तक उपलब्ध स्टॉक की जानकारी दी जा रही है. ऐसे में आशीष ने राज्य सरकार से एप को अपडेट करने की अपील की है.
राज्य में ब्लड बैंकों की संख्या
जानकरी के अनुसार पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा संचालित 82 तथा केंद्र द्वारा संचिता 16 ब्लड बैंक है. जबकि महानगर समेत राज्यभर में 35 निजी ब्लड बैंक भी है.
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