हावड़ा की जनता का आशीर्वाद मेरे साथ : प्रसून

Updated at : 18 Apr 2019 1:04 AM (IST)
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हावड़ा की जनता का आशीर्वाद मेरे साथ : प्रसून

हावड़ा सदर से तृणमूल प्रत्याशी प्रसून बनर्जी का साक्षात्कार हावड़ा : हावड़ा सदर लोकसभा केंद्र से तृणमूल प्रत्याशी व भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान प्रसून बनर्जी ने 11 अप्रैल को अपना नामांकन किया. ढोल-नगाड़ों की आवाज और कार्यकर्ताओं से खचा-खच भरे डीएम परिसर से नामांकन दाखिल करने के बाद उत्साह से लबरेज प्रसून बनर्जी […]

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हावड़ा सदर से तृणमूल प्रत्याशी प्रसून बनर्जी का साक्षात्कार

हावड़ा : हावड़ा सदर लोकसभा केंद्र से तृणमूल प्रत्याशी व भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान प्रसून बनर्जी ने 11 अप्रैल को अपना नामांकन किया. ढोल-नगाड़ों की आवाज और कार्यकर्ताओं से खचा-खच भरे डीएम परिसर से नामांकन दाखिल करने के बाद उत्साह से लबरेज प्रसून बनर्जी ने कहा कि हावड़ा की जनता का आशीर्वाद एक बार फिर उनके साथ है, लिहाजा वह इस बार जीत की हैट्रिक करेंगे. श्री बनर्जी कहते हैं कि उन्हें जितना समय मिला, उसमें हावड़ा के लिए काफी कार्य किये, लेकिन अभी काम बाकी हैं. श्री बनर्जी कहते हैं कि हावड़ा में हिंदी माध्यम के तीन नये स्कूल और एक सामुदायिक कम्यूनिटी हॉल भी बनाने की योजना है.
प्र. हावड़ा लोकसभा क्षेत्र विविधताओं से भरा है. इस चुनाव में क्या रणनीति है ?
उत्तर : तणमूल कांग्रेस एक अनुशासित पार्टी है. दीदी ने 12 मार्च को तृणमूल प्रत्याशियों की सूूची जारी की थी और हम 13 मार्च से ही प्रचार अभियान शुरू कर दिये. जिला अध्यक्ष अरूप राय सभी पार्षदों के सहयोग से जोरदार प्रचार कर रहे हैं. उन्होंने चुनाव की कमान खुद संभाली है. 2014 के लोकसभा चुनाव और उसके बाद हुए विधानसभा चुनावों के वोट प्रतिशत का गहन मंथन किया गया है.
प्र. हावड़ा में हिंदीभाषी वोटर निर्णायक स्थित में हैं, ऐसे में आपने हिंदीभाषियों के विकास के लिए क्या सोचा है?
उत्तर : हिंदीभाषी कोई बाहर के नहीं हैं. बिहार व उत्तर प्रदेश के लोग 200 साल पहले बंगाल में आये थे, उन्होंने बंगालियों के साथ कंधा से कंधा मिला कर अपना खून-पसीना लगा कर राज्य के विकास में योगदान किया. इतना ही नहीं, बिहार व उत्तर प्रदेश के लोगों ने यहां स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजी हुकूमत के साथ लोहा लिया. मैं चाहता हूं कि हावड़ा में तीन और हिंदी माध्यम स्कूल खुले. इसके साथ ही एक ऊर्दू स्कूल भी खोलने की योजना है. चुनाव बाद लिलुआ, शालीमार और सांकराइल में इसके लिए कार्य शुरू हो जायेंगे. सांकराइल में जूट मिल के मजदूरों के बच्चों के लिए हिंदी स्कूल नहीं है. इसके साथ ही हावड़ा के 19 नंबर वार्ड में हरिजनों के लिए एक सामुदायिक कम्यूनिटी हॉल बनायेंगे.
प्र. हावड़ा कभी माकपा का गढ़ माना जाता था, अभी क्या स्थिति है?
उत्तर : हावड़ा कभी भी माकपा का गढ़ नहीं था, बल्कि वहां की आम जनता को डरा कर जबरन वोट दिलवाया जाता था. अब ऐसा नहीं है, लोगों को वोट करने का अधिकार मिला है.
प्र. तृणमूल सुप्रीमो ने एक बार फिर इस फुटबॉलर पर भरोसा किया है, कैसा लग रहा है ?
उत्तर : क्रिकेटर, एथलिट्स और हॉकी प्लेयर तो एमपी बने, लेकिन देश ने कभी एक फुटबॉलर को सांसद बनते नहीं देखा था. फुटबॉलर को यह सम्मान दीदी ने ही दिया. एक फुटबॉलर का सम्मान करके दीदी ने बंगाल के उन लाखों-करोड़ों लोगों का मान बढ़ाया है, जो इस खेल को दिलो जान से प्यार व सम्मान करते हैं. अभी तो प्रधानमंत्री भी कहते हैं कि कैप्टन साहब कैसे हैं.
प्र. कभी राष्ट्रीय स्तर का यह फुटबॉलर क्या इस बार भी राजनीति में जीत का किक मारेगा?
उत्तर : भारतीय फुटबाल टीम का कप्तान भी मैं रहा, अर्जुन अवार्ड भी प्राप्त किया, लेकिन एक दिन मुझे बुला कर ममता दीदी ने आग्रह किया कि तुम देश की सेवा करो. दीदी के आग्रह पर 2013 में मैंने फुटबॉल व स्टेट बैंक की अपनी अच्छी नौकरी से इस्तीफा दे दिया. मैं डरा नहीं और दीदी के एक बुलावे पर अत्याचार से मुकाबला करने निकल पड़ा. दीदी ने कभी हारना नहीं सीखा.
प्र. इस बार किन मुद्दों को लेकर जनता के पास जा रहे हैं?
उत्तर : माकपा के शासन में जनता बिजली, सड़क और रोजगार से महरूम हो गयी थी. राज्य में माकपा और कांग्रेस का अस्तित्व समाप्त हो चुका है. सरकारी एजेंसियों और रुपये के बल पर भाजपा राज्य में पैठ बनाना चाहती है. भाजपा से मैं पूछना चाहता हूं कि वह बंगाल में क्यों आना चाहती है. उसने बंगाल के लिए किया ही क्या है. मोदी सरकार ने कहा था कि देश में अच्छे दिन लाऊंगा, अभी तक तो नहीं आये अच्छे दिन.
प्र. हावड़ा की मुख्य समस्या क्या है, उसका समाधान किस प्रकार करेंगे.
उत्तर : 2013 में हुए उपचुनाव में हावड़ा सदर सीट से मैं विजयी हुआ. सांसद चुने जाने के बाद मैंने देखा कि हावड़ा नगर निगम की स्थिति काफी खराब थी. कई इलाकों में पानी नहीं पहुंच रहा था. सड़कें भी खराब थी. कानून व्यवस्था की स्थिति भी सही नहीं थी. हावड़ा के कुछ इलाकों में एंटी सोशल का बोलबाला था. आज नलों में पानी और घरों में बिजली है. सड़क की स्थिति काफी अच्छी हो गयी है. लोग शांति से हावड़ा में निवास कर रहे हैं.
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