दार्जिलिंग लोकसभा सीट पर मिले थे मात्र 14.78 फीसदी मत, हुए थे पराजित, सिद्धार्थ शंकर रे ने निर्दल उम्मीदवार के रूप में लड़ा था चुनाव
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 25 Mar 2019 4:07 AM
विज्ञापन
अजय विद्यार्थी, कोलकाता : पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के अलावा केंद्रीय मंत्री, राज्यपाल और राजदूत रहे सिद्धार्थ शंकर रे दार्जिलिंग लोकसभा चुनाव और बोलपुर लोकसभा उपचुनाव में पराजित हुए थे. स्वतंत्रता संग्राम सेनानी देशबंधु चित्तरंजन दास के पोते रहे श्री रे 1972 से 1977 तक पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री थे. लेकिन 1984 में दार्जिलिंग लोकसभा […]
विज्ञापन
अजय विद्यार्थी, कोलकाता : पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के अलावा केंद्रीय मंत्री, राज्यपाल और राजदूत रहे सिद्धार्थ शंकर रे दार्जिलिंग लोकसभा चुनाव और बोलपुर लोकसभा उपचुनाव में पराजित हुए थे. स्वतंत्रता संग्राम सेनानी देशबंधु चित्तरंजन दास के पोते रहे श्री रे 1972 से 1977 तक पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री थे.
लेकिन 1984 में दार्जिलिंग लोकसभा केंद्र से निर्दल उम्मीदवार के रूप से वह चुनाव लड़े थे और उन्हें मात्र 14.78 फीसदी मत मिले थे और तीसरे स्थान पर रहते हुए पराजित हुए थे. निर्दल उम्मीदवार के रूप में पराजित होने के बाद 1985 में वह कांग्रेस की टिकट पर लोकसभा बोलपुर लोकसभा उपचुनाव में प्रतिद्वंद्विता की थी.
इस चुनाव में लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी से 98,999 मतों से पराजित हुए थे, हालांकि 1971 के लोकसभा चुनाव में रायगंज से कांग्रेस के उम्मीदवार में चुनाव लड़ते हुए 49.55 फीसदी मत हासिल कर विजयी हुए थे और माकपा के उम्मीदवार सुबोध सेन को पराजित किया था और केंद्रीय राजनीति में अपनी पकड़ बनायी थी.
श्री रे ने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत पश्चिम बंगाल के पहले मुख्यमंत्री विधान चंद्र राय के मंत्रिमंडल के सदस्य के रूप में 1957 में शुरू की थी. एक दशक बाद वह केंद्रीय राजनीति का हिस्सा रहे और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नजदीकी सलाहकारों में से एक थे.
बांग्लादेश के मुक्ति संघर्ष में वह इंदिरा गांधी के साथ काम करते रहे और संघर्ष करनेवालों और भारत सरकार के बीच वे प्रमुख संपर्क सूत्र थे. पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा देश में आपातकाल लगाने के पीछे मुख्य सलाहाकार श्री रे को ही माना जाता है. वे 1962 से 1971 तक केंद्रीय मंत्रिमंडल में रहे और 1972 में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बने.
मुख्यमंत्री के रूप में नक्सल आंदोलन से निबटने के उनके तौर तरीकों पर बहुत विवाद हुआ. वर्ष 1977 में वह वाममोर्चा से राज्य का चुनाव हार गये और ज्योति बसु वाममोर्चा के पहले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण किया. 1986 में उन्हें पंजाब का राज्यपाल बनाया गया और 1992 से 96 के बीच वह अमेरिका में भारत के राजदूत रहे.
1984 में दार्जिलिंग से लड़ा था चुनाव, हुए थे पराजित
पूर्व मुख्यमंत्री श्री रे ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दार्जिलिंग लोकसभा केंद्र से निर्दल उम्मीदवार के रूप में 1984 में लोकसभा चुनाव में प्रतिद्वंद्विता की थी. इस चुनाव में श्री रे को मात्र 14.78 फीसदी मत मिले थे और तीसरे स्थान पर रहे थे.
जबकि माकपा के उम्मीदवार आनंद प्रसाद पाठक 41.96 फीसदी मत, यानी 228,679 मत के साथ विजयी हुए थे, जबकि कांग्रेस के उम्मीदवार दावा नारबुला 227,290 यानी 41.71 फीसदी के साथ दूसरे स्थान पर रहे थे. श्री रे निर्दल उम्मीदवार के रूप में मात्र 80,557 यानि 14.78 फीसदी मत के साथ तीसरा स्थान प्राप्त किया था.
1985 में सोमनाथ के हाथों हुए थे पराजित
1985 में बोलपुर लोकसभा केंद्र के माकपा के सांसद डॉ सारादिश का अचानक निधन हो गया. उनके निधन के बाद 1985 में लोकसभा उपचुनाव हुए. माकपा के हैवीवेट नेता व लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शंकर रे को 98,999 मतों से पराजित किया था. 1989 में जीत के बाद श्री चटर्जी लोकसभा चुनाव 1989, 1991, 1996,1998, 1999 तथा 2004 में लगातार विजयी रहे.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन










