आज भी प्रजनन संबंधी फैसले नहीं ले पातीं महिलाएं

Updated at : 09 Mar 2019 1:24 AM (IST)
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आज भी प्रजनन संबंधी फैसले नहीं ले पातीं महिलाएं

कोलकाता : फूड एंड न्यूट्रिशियन बोर्ड ने विभिन्न गैर सरकारी संगठनों के सहयोग से केंद्रिय महिला और बाल विकास योजना के तहत गुरुवार को ‘अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस’ के अवसर पर महिलाओं के स्वास्थ्य और सशक्तीकरण मुद्दों को लेकर एक संगोष्ठी का आयोजन किया. इस अवसर पर कलकत्ता विश्वविद्यालय समाजशास्त्र विभाग की पूर्व प्रमुख बूला भद्र […]

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कोलकाता : फूड एंड न्यूट्रिशियन बोर्ड ने विभिन्न गैर सरकारी संगठनों के सहयोग से केंद्रिय महिला और बाल विकास योजना के तहत गुरुवार को ‘अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस’ के अवसर पर महिलाओं के स्वास्थ्य और सशक्तीकरण मुद्दों को लेकर एक संगोष्ठी का आयोजन किया. इस अवसर पर कलकत्ता विश्वविद्यालय समाजशास्त्र विभाग की पूर्व प्रमुख बूला भद्र ने कहा कि व्यवसायिक सरोगेसी को 2018 के अंत तक रोक दिया गया.

इस विषय में समाजशास्त्रियों का कहना है कि भारत में आज भी महिलाएं प्रजनन संबंधी फैसले लेने के लिए स्वतंत्र नहीं हैं. इसके सकारात्मक पक्ष पर ध्यान आकर्षित करते हुए आईएसडीएस कोलकाता में जिला कार्यक्रम अधिकारी पीयूष साहा ने कहा कि पश्चिम बंगाल में शिशु मृत्यु दर और माता मृत्यु दर के आंकड़े अन्य राज्यों की तुलना में अब बेहतर हैं.

हेल्थ सर्विस के अतिरिक्त निदेशक पाप्री नायक ने कहा कि राज्य में बाल स्वास्थ्य विभाग ने महसूस किया है कि जीवन के महत्वपूर्ण समय में सशक्तीकरण के लिए स्वास्थ्य, पोषण, सुरक्षा और शिक्षा, ये चार महत्वपूर्ण जरूरतें हैं. इसके लिए सभी महिलाओं तक अभिसरण विधि के माध्यम से पहुंचा जा सकता है, जिसमें सरकारी, गैर सरकारी संगठन और अन्य सभी हितधारक भाग ले सकते हैं. इस विचार का समर्थन सीआईएनआई के संस्थापक निदेशक डॉ समीर चौधरी ने किया.

उन्होंने कहा कि उनका एनजीओ इस मुद्दे पर पूर्वी और उत्तर पूर्वी भारत के विभिन्न हिस्सों में काम करता है. सोसाइटी ऑफ मिडवाइव्स-इंडिया (एसओएमआई) की सचिव व नर्सिंग मेडिकल कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर मानसी जाना ने कहा कि उनका अगला लक्ष्य आईएमआर का आंकड़ा एक अंक (वर्तमान में लगभग 25 प्रतिशत) और एमएमआर का आंकड़ा (101 से 1000) को दो अंकों तक कम करना है.

लिंग-संतुलन पर उन्होंने कहा, नर भी सराहनीय संख्या में नर्सिंग पेशे में आ रहे हैं. प्रेस सूचना ब्यूरो की उप निदेशक चित्रा गुप्ता ने सरकार की योजनाओं जैसे सुकन्या समृद्धि योजना, 26 सप्ताह के लिए मातृत्व अवकाश आदि पर प्रकाश डाला जो महिलाओं और बालिकाओं को सशक्त बनाने के लिए एक लंबा रास्ता तय करते हैं. सीआईएनआई एनजीवो जो महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए जमीनी स्तर पर काम करता है. उन्होंने गरीबी, उपेक्षा, यातना और अन्य बुराइयों से मुक्ति पाने के लिए सभी बाधाओं के खिलाफ लड़ाई लड़नेवाली महिलाओं को सम्मानित किया.

संगोष्ठी में भाग लेने वाले गणमान्य व्यक्तियों में भारत सरकार के खाद्य और पोषण बोर्ड के उप तकनीकी सलाहकार एन एन तिवारी, बंगाल ऑब्स्टेट्रिक और स्त्री रोग सोसायटी के सचिव बासब मुखर्जी, पश्चिम बंगाल आशा कार्यक्रम की प्रधान अधिकारी शराबनी मजूमदार आदि उपस्थित थे.

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