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पुलवामा के शहीद जवानों के संबंध में सोशल मीडिया पर पोस्ट ने ली शिक्षक की नौकरी

20 Feb, 2019 2:00 am
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पुलवामा के शहीद जवानों के संबंध में सोशल मीडिया पर पोस्ट ने ली शिक्षक की नौकरी

कोलकाता : राज्य के एक प्रतिष्ठित स्कूल के एक शिक्षक ने फेसबुक पर अपने एक पोस्ट को लेकर भड़के गुस्से के बाद इस्तीफा दे दिया. इस पोस्ट में पुलवामा हमले में मारे गये सीआरपीएफ के जवानों को ‘शहीद’ बुलाने पर प्रश्न किया गया था. इतिहास के शिक्षक 36 वर्षीय चित्रदीप सोम ने कहा कि स्कूल […]

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कोलकाता : राज्य के एक प्रतिष्ठित स्कूल के एक शिक्षक ने फेसबुक पर अपने एक पोस्ट को लेकर भड़के गुस्से के बाद इस्तीफा दे दिया. इस पोस्ट में पुलवामा हमले में मारे गये सीआरपीएफ के जवानों को ‘शहीद’ बुलाने पर प्रश्न किया गया था.

इतिहास के शिक्षक 36 वर्षीय चित्रदीप सोम ने कहा कि स्कूल ने 15 फरवरी को लिखे पोस्ट के लिए उन्हें इस्तीफा देने पर मजबूर किया, जिसमें उन्होंने जवानों को शहीद बताने के पीछे तर्क मांगा था, ‘क्योंकि वे तो बस अपनी ड्यूटी कर रहे थे.’ सोशल मीडिया पर रखे गये उनके पक्ष पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और कई ने उनपर सुरक्षा बलों का अपमान करने का आरोप लगाया.
सोम ने बताया कि कुछ लोगों ने स्कूल अधिकारियों के सामने उनकी शिकायत की और उनके घर पर भीड़ ने रविवार को हमला किया था, जिससे मजबूरी में उन्हें अपने एक रिश्तेदार के घर जाना पड़ा. उन्होंने कहा : सोमवार को स्कूल अधिकारियों ने उनसे तत्काल मिलने को कहा. उसके बाद मुझे इस्तीफा देने पर मजबूर किया गया. शिक्षक अपने पक्ष पर अडिग रहे और तर्क दिया कि राय अभिव्यक्त करना गलत नहीं है.
क्या है मामला
जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में 14 फरवरी को हुए आतंकवादी हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गये थे और कई अन्य घायल हुए थे. डॉक्टर ने हालांकि पश्चिम बंगाल सरकार के उसके बचाव में आने के बाद वहीं रहने का निर्णय किया था. डॉक्टर की नौ और सात वर्षीय दो बेटियां हैं, जो शहर के एक बड़े अंग्रेजी माध्यम स्कूल में पढ़ती हैं. पश्चिम बंगाल राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष अनन्या चक्रवर्ती ने कहा कि स्कूल में दोनों बच्चियों के दोस्तों ने उन्हें अलग-थलग कर दिया है. श्रीमती चक्रवर्ती ही डॉक्टर और उनके परिवार की सुरक्षा सुनश्चित कर रही हैं.
श्रीमती चक्रवर्ती ने कहा : डॉक्टर ने मुझे बताया कि उनकी बेटियों के दोस्त उनसे सही से बात नहीं कर रहे. मैंने उनसे परेशान ना होने को कहा है. मैंने स्कूल अधिकारियों से बात की है और उन्होंने कहा कि वह मामले में हस्तक्षेप करेंगे. उन्होंने बताया कि बच्चियों के साथ स्कूल जानेवाले कुछ बच्चों ने उनके साथ जाना बंद कर दिया है. कुछ ने उनसे बात करना भी बंद कर दिया है. उन्होंने कहा : हमने उन्हें पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया है, लेकिन यह एक भयावह स्थिति है, जो ध्रुवीकरण के एकमात्र उद्देश्य के साथ जानबूझकर चुनाव से पहले बनायी जा रही है. डॉक्टर ने मीडिया से बात करने से भी इनकार कर दिया.
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