कोलकाता : कैंसर से हर वर्ष मरते हैं 13.5 लाख भारतीय

Updated at : 04 Feb 2019 3:11 AM (IST)
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कोलकाता  :  कैंसर से हर वर्ष मरते हैं 13.5 लाख भारतीय

कोलकाता : भारत दुनिया की मुंह के कैंसर की राजधानी बन गया है. तंबाकू जनित बीमारियों से हर साल 13.5 लाख भारतीयों की मौत होती है. इसमें तंबाकू के कारण होनेवाले कैंसर से 10 प्रतिशत से अधिक लोग शामिल हैं. तंबाकू, कैंसर होने का सबसे बड़ा कारण है. वर्तमान में 90 प्रतिशत मुंह और फेफड़े […]

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कोलकाता : भारत दुनिया की मुंह के कैंसर की राजधानी बन गया है. तंबाकू जनित बीमारियों से हर साल 13.5 लाख भारतीयों की मौत होती है. इसमें तंबाकू के कारण होनेवाले कैंसर से 10 प्रतिशत से अधिक लोग शामिल हैं. तंबाकू, कैंसर होने का सबसे बड़ा कारण है. वर्तमान में 90 प्रतिशत मुंह और फेफड़े के कैंसर के साथ-साथ कई अन्य तरह के कैंसर को भी रोका जा सकता है, क्योंकि इनके होने का कारण तंबाकू है.

21.4 प्रतिशत भारतीय करते हैं चबानेवाले तंबाकू का सेवन

भारत की समस्या धूम्रपान से अधिक चबानेवाले तंबाकू की है. ग्लोबल एडल्ट तंबाकू सर्वेक्षण, 2017 के अनुसार 10.7 प्रतिशत वयस्क भारतीय (15 वर्ष और उससे अधिक) धूम्रपान करते हैं, जबकि चबाने वाले तंबाकू का सेवन 21.4 प्रतिशत लोग करते हैं. भारत में पान मसाला का विज्ञापन जारी है, जो इसी नाम के तंबाकू उत्पादों के लिए भी विपणन को प्रोत्साहन (सरोगेट एडवरटाइजमेंट) दे रहे हैं. सिगरेट और तंबाकू उत्पाद अधिनियम (केाटपा) के प्रावधानों के अनुसार तंबाकू उत्पादों का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष विज्ञापन प्रतिबंधित है.
देश में 10.7 फीसदी लोग करते हैं धूम्रपान
देश में धूम्रपान करनेवाले 10.7 प्रतिशत वयस्क भारतीय (15 वर्ष और उससे अधिक) की तुलना में धूम्रपान धुआं रहित तंबाकू (एसएलटी) का सेवन करनेवाले 21.4 प्रतिशत हैं. इससे त्रिपुरा (48 प्रतिशत), मणिपुर (47.7 प्रतिशत), ओड़िशा (42.9 प्रतिशत) और असम (41 प्रतिशत) सबसे बुरी तरह प्रभावित राज्य हैं, जबकि हिमाचल प्रदेश (3.1 प्रतिशत), जम्मू और कश्मीर (4.3 प्रतिशत), पुडुचेरी (4.7 प्रतिशत) और केरल (5.4 प्रतिशत) सबसे कम प्रभावित राज्य हैं.
12.8 % महिलाएं भी करती हैं धूम्रपान
ग्लोबल एडल्ट तंबाकू सर्वेक्षण, 2017 के अनुसार देश में कुल धुआं रहित तंबाकू उपयोगकर्ताओं (199.4 मिलियन) में से 29.6 प्रतिशत पुरुष और 12.8 प्रतिशत महिलाएं हैं. भारत में महिलाओं द्वारा धूम्रपान अभी भी सामाजिक रूप से अस्वीकार्य है, लेकिन उनके बीच धुआं रहित तंबाकू का उपयोग आम बात है. वर्तमान में सात करोड़ महिलाएं 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र की धुआं रहित तम्बाकू का उपयोग करती हैं.
क्या कहना है विशेषज्ञों का
धूम्ररहित तंबाकू के उपयोगकर्ताओं की संख्या में वृद्धि हुई है, क्योंकि पहले के तंबाकू विरोधी विज्ञापनों में सिगरेट और बीड़ी की तस्वीरें दिखायी जाती थीं. लोगों का मनना है कि केवल सिगरेट और बीड़ी का सेवन हानिकारक है और इसलिए धीरे-धीरे धुआं रहित तंबाकू की खपत बढ़ गयी है.
डॉ सौरभ दत्ता, वॉयस ऑफ टोबैको विक्टिम्स (वीओटीवी) के संरक्षक, नारायण सुपरस्पेशलिटी अस्‍पताल
मेरे लगभग 90 प्रतिशत मरीज तम्बाकू के उपयोगकर्ता व उपभोक्ता हैं. हमने पाया है कि धुआं रहित तंबाकू सेवन करनेवालों को कम उम्र में कैंसर हो जाता है और इनकी मृत्यु दर भी अधिक है.
प्रोफेसर डॉ पंकज चतुर्वेदी, हेड नेक कैंसर सर्जन टाटा मेमोरियल सेंटर
विभिन्न कार्यक्रमों और बड़े आयोजनों में पान मसाला के आकर्षित करनेवाले विज्ञापन होते हैं, जो तंबाकू उत्पादों के लिए सरोगेट हैं. कई फिल्मी सितारे हॉलीवुड, पियर्स ब्रॉसनन सहित टेलीविजन, सिनेमा और यहां तक कि क्रिकेट मैचों में पान मसाला का प्रचार करते हैं. चबाने वाले तंबाकू के निर्माता पान मसाला का बहुत विज्ञापन कर रहे हैं. आक्रामक विज्ञापन से आकर्षित होनेवाले बच्चों को बचाने के लिए राज्य सरकारों को इसे प्रभावी रूप से लागू करना चाहिए.
संजय सेठ, ट्रस्टी, संबंध हेल्थ फाउंडेशन (एसएचएफ)
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