राज्य के आयुष कॉलेज में नहीं लगा बायोमेट्रिक हाजिरी सिस्टम, घोस्ट शिक्षकों की खैर नहीं

Updated at : 21 Jan 2019 2:26 AM (IST)
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राज्य के आयुष कॉलेज में नहीं लगा बायोमेट्रिक हाजिरी सिस्टम, घोस्ट शिक्षकों की खैर नहीं

शिव कुमार राउत, कोलकाता : सेंट्रल काउंसिल अॉफ इंडियन मेडिसिन (सीसीआइएम) ने देश के सभी सरकारी व प्राइवेट आयुष कॉलेजों में कर्मचारियों, शिक्षकों व छात्रों की उपस्थिति की डिजिटल मॉनिटरिंग के लिए जीपीएस आधारित बायोमैट्रिक अटेंडेंस सिस्टम की शुरुआत की है. गत वर्ष 28 दिसंबर को सीसीआइएम की जारी निर्देशिका में सभी आयुर्वेद, यूनानी व […]

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शिव कुमार राउत, कोलकाता : सेंट्रल काउंसिल अॉफ इंडियन मेडिसिन (सीसीआइएम) ने देश के सभी सरकारी व प्राइवेट आयुष कॉलेजों में कर्मचारियों, शिक्षकों व छात्रों की उपस्थिति की डिजिटल मॉनिटरिंग के लिए जीपीएस आधारित बायोमैट्रिक अटेंडेंस सिस्टम की शुरुआत की है.
गत वर्ष 28 दिसंबर को सीसीआइएम की जारी निर्देशिका में सभी आयुर्वेद, यूनानी व सिद्धा के कॉलेजों को 7 जनवरी 2019 तक इस बायोमैट्रिक अटेंडेंस डिवायस इंस्टाल करने का स्पष्ट निर्देश दिया गया था, लेकिन राज्य के किसी भी सरकारी आयुर्वेद कॉलेज में अब तक इसे नहीं लगाया हैं.
विदित हो कि पश्चिम बंगाल में गिनती के मात्र चार ही आयुर्वेदिक कॉलेज हैं, जिनमें दो सरकारी व दो प्राइवेट हैं. वहीं एक प्राइवेट यूनानी मेडिकल कॉलेज भी है.
हालांकि प्राइवेट आयुर्वेदिक कॉलेजों ने सीसीआइएम के निर्देशों का बखूबी पालन किया है. बेले शंकरपुर राजीव गांधी मेमोरियल आयुर्वेद कॉलेज एंड हॉस्पीटल के प्रिंसिपल डॉ तापस मंडल ने बताया कि ‘कॉलेज प्रबंधन ने अपने खर्च पर इस मशीन को इंस्टॉल किया है.
इसके लिए दो मोबाइल फोन व मशीन खरीदने में करीब 50 हजार रुपये की लागत आयी. कॉलेज के करीब 30 शिक्षकों ने भी पूरा सहयोग किया. फिलहाल मशीन से चेक इन व चेक आउट करने में काफी परेशानी हो रही है.
वहीं पंश्चिम बंगाल आयुष डिपार्टमेंट के ज्वाइंट सेक्रेटरी श्यामल मंडल का कहना है कि, इस निर्देशिका के बारे में हमें पूरी जानकारी हैं. जल्द ही बायोमैट्रिक डिवायस लगा दिया जाएगा. शौक्षिणक संस्थानों में पादर्शिता के प्रति राज्य सरकार का ढुलमूल रवैया जहां कईं सवाल खड़े करता हैं.
फर्जी शिक्षकों पर नकेल कसने की सीसीआईएम की पहल
सरकारी संस्थानों में ऐसे कुछ चिकित्सक हैं, जो बतौर शिक्षक एक साथ देश के कई मेडिकल कॉलेजों से जुड़े हुए हैं. ऐसे घोस्ट शिक्षक यानी फर्जीं शिक्षकों पर नकेल कसने की सीसीआईएम की पहल का आयुष छात्रों ने तहेदिल से स्वागत किया.
कुछ छात्रों का कहना है कि कईं तो ऐसे शिक्षक हैं, जिनका नाम कागज पर होता है या फिर ऐसे घोस्ट प्रोफेसर हमें पढ़ाने के बदले या तो अन्य मेडिकल कॉलेज या प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे होते हैं.
फ्री-फंड में हर महीने तनख्वाह ले जाते हैं, जबकि आयुष में शिक्षकों की बहुत कमी हैं. कम से कम अब गुरुजी! कागज से निकल कर बाहर तो दिखगें. और हाजिरी भी लगायेंगें.
बायोमेट्रिक डिवाइस पर दिल्ली से होगी नजर
जीपीएस अधारित यह बायोमेट्रिक अटेंडेस डिवाइस आधार कार्ड से जुड़ा होगा. पहचान के तौर पर फेशियल और कॉर्निया इंप्रेशन ली जायेगी. उपस्थिति राजिस्टर की चेकिंग सीसीआईएम के अधिकारी दिल्ली में बैठकर करेंगे.
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