कोलकाता : आदिवासियों को धामसा मादल खरीदने के लिए एक करोड़ देगी राज्य सरकार

Updated at : 18 Dec 2018 6:49 AM (IST)
विज्ञापन
कोलकाता :  आदिवासियों को धामसा मादल खरीदने के लिए एक करोड़ देगी राज्य सरकार

कोलकाता : पश्चिम बंगाल के जंगलमहल क्षेत्र में रहने वाले आदिवासियों के लिए आयोजित होने वाले जंगलमहल उत्सव के पूर्व राज्य सरकार ने इस दौरान विशेष तौर पर बजाए जाने वाले ढोल “धामसा-मादल” खरीदने के लिए एक करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित की है. पश्चिमांचल ग्रामीण विकास विभाग की ओर से सोमवार को इस बारे […]

विज्ञापन
कोलकाता : पश्चिम बंगाल के जंगलमहल क्षेत्र में रहने वाले आदिवासियों के लिए आयोजित होने वाले जंगलमहल उत्सव के पूर्व राज्य सरकार ने इस दौरान विशेष तौर पर बजाए जाने वाले ढोल “धामसा-मादल” खरीदने के लिए एक करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित की है. पश्चिमांचल ग्रामीण विकास विभाग की ओर से सोमवार को इस बारे में जानकारी दी गयी है.
बताया गया है कि आगामी 13 से 20 जनवरी के बीच आयोजित होने वाले जंगलमहल उत्सव के पहले इस धनराशि की मदद से बड़ी संख्या में उत्सव के दौरान आदिवासियों द्वारा बजाए जाने वाले विशेष ढोल को खरीदा जाएगा और उसे विभिन्न क्षेत्रों के आदिवासियों के बीच बांटा भी जाएगा.
इसके लिए विशेष तौर पर जंगलमहल के उन 24 ब्लॉकों का चयन किया गया है जो पूर्व में माओवादियों का गढ़ रहा है. यहां आदिवासियों की उपजाति और लोक संस्कृति समूहों को यह ढोल वितरित किए जाएंगे.
उल्लेखनीय है कि मई महीने में संपन्न हुए पंचायत चुनाव के दौरान जंगल महल के अधिकतर क्षेत्रों में भाजपा अथवा निर्दलीय उम्मीदवारों की ही जीत हुई थी और वहां के लोगों ने तृणमूल के उम्मीदवारों से किनारा कर लिया था.
इस वजह से राज्य सरकार बड़े पैमाने पर आदिवासी समुदाय के लोगों को लोकसभा चुनाव से पहले अपने खेमे में खींचने के लिए तमाम तरह की जन लुभावन परियोजनाएं घोषित और लागू कर रही है.
हाल ही में आदिवासियों की मुख्य बोली संथाली और अल्चिकी के विकास के लिए बोर्ड गठित करने की घोषणा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने की है. इसके बाद अब जंगलमहल उत्सव के दौरान एक करोड़ रुपये के ढोल खरीदकर वितरित करने की प्रक्रिया भी इसी कोशिश का एक हिस्सा माना जा रहा है.
विभाग की ओर से बताया गया है कि 2017 में राज्य के 7 जिले के 74 ब्लॉक में रहने वाले आदिवासी व लोक संस्कृति से जुड़े 480 समूहों को ढोल वितरित किए गए थे. इस बार 960 समूहों में वितरित किए जाएंगे.
वहीं, इस पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा है कि मूल कार्य से परे हटकर धनबल के जरिए राज्य सरकार आदिवासियों का मन जीतने की कोशिश कर रही है लेकिन यह संभव नहीं हो सकेगा.
उन्होंने कहा कि जब ममता विपक्ष में थीं तो आदिवासियों ने उन्हें सिर पर बिठाया था, लेकिन जब सत्ता में आई तो उनके नेताओं को षड्यंत्र के तहत एक जगह से दूसरी जगह बुलाकर पुलिस के हाथों एनकाउंटर करवा दिया गया.
सात सालों के दौरान आदिवासी क्षेत्रों का विकास तो दूर की बात वहां के लोग भूख और बिना इलाज के दम तोड़ने को मजबूर हैं. अब राज्य सरकार मुफ्त में ढोल बांटकर उन्हें अपना बनाना चाहती है तो यह संभव नहीं होगा.
हालांकि, आदिवासी विकास मंत्री शांतिराम महतो ने भाजपा के दावे को खारिज किया है और कहा है कि इस ढोल वितरण प्रक्रिया में कोई राजनीति नहीं है और ना ही इसे वोट को ध्यान में रखकर बांटा जा रहा है.
हमारा लक्ष्य आदिवासियों को अधिक से अधिक आत्मनिर्भर बनाना है. लोक संस्कृति से जुड़े जो भी आदिवासी समूह हैं उन्हें जितना अधिक ढोल मिलेगा वे उतना अधिक अपना कार्यक्रम कर पाएंगे जिससे आदिवासी संस्कृति का संरक्षण भी होगा और लोग बड़ी संख्या में लोक संस्कृति से जुड़ेंगे भी.
उन्होंने कहा कि इस बार जंगलमहल उत्सव और भी व्यापक पैमाने पर मनाया जाएगा. गौर हो कि 13 से 20 जनवरी तक झाड़ग्राम के कुमुद कुमारी इंस्टीट्यूशन मैदान में आयोजित होने वाले जंगलमहल उत्सव का उद्घाटन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी करेंगी.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola