कोलकाता : आदिवासियों को कम कीमत पर पौष्टिक आहार मुहैया करायेगी राज्य सरकार
Updated at : 06 Dec 2018 2:33 AM (IST)
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कोलकाता : पिछले महीने 15 दिनों के अंदर भूख और बिना इलाज सबर और लोधा समुदाय के आठ आदिवासियों की मौत हो गयी थी. इसे लेकर देशभर में किरकिरी होने के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने अब इस समुदाय के आदिवासियों को कम कीमत पर पौष्टिक आहार मुहैया कराने का निर्णय लिया है. बुधवार को […]
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कोलकाता : पिछले महीने 15 दिनों के अंदर भूख और बिना इलाज सबर और लोधा समुदाय के आठ आदिवासियों की मौत हो गयी थी. इसे लेकर देशभर में किरकिरी होने के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने अब इस समुदाय के आदिवासियों को कम कीमत पर पौष्टिक आहार मुहैया कराने का निर्णय लिया है. बुधवार को यह जानकारी राज्य के खाद्य विभाग की एक विज्ञप्ति में दी गयी है.
विज्ञप्ति में बताया गया है कि पश्चिम बंगाल सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के जरिये सबर और लोधा समुदाय के लोगों को दाल और सोयाबीन भी कम कीमत पर मुहैया करायेगी. फिलहाल यह तय नहीं किया जा सका है कि उन्हें कितनी अधिक छूट मिलेगी, लेकिन इस योजना पर काम शुरू कर दिया गया है. इसके लिए समीक्षा का काम चल रहा है और जल्द ही इसे मूर्त रूप दे दिया जायेगा.
विभाग की ओर से बताया गया है कि आदिवासी क्षेत्रों में मौजूद राशन दुकानों से लोगों को दो रुपये किलो चावल और गेहूं तो मिलता ही है, अब उन्हें दाल और सोयाबीन भी कम कीमत पर दिया जायेगा. साथ ही राज्य खाद्य विभाग ने यह भी निर्देश दिया है कि आदिवासियों के बीच वितरित होनेवाले पौष्टिक आहार उच्च गुणवत्ता वाले हों, ताकि लोगों को बेहतर स्वास्थ्य हासिल हो.
इसके लिए राज्य सचिवालय में एक कमेटी का गठन किया गया है, जो आदिवासी बहुल क्षेत्रों का दौरा करेगी और वहां की जरूरतों को समझते हुए उन जगहों को चिह्नित किया जायेगा, जहां और अधिक राशन स्टोर खोले जायें. साथ ही अनाजों की कीमत और अन्य जरूरतें पूरी करने संबंधी रिपोर्ट पेश की जायेगी, जिस पर खाद्य विभाग अमल करेगा.
नवंबर के पहले सप्ताह में इस बात की जानकारी मिली थी कि दुर्गापूजा के दौरान 15 दिनों के अंदर जंगलमहल के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में भूख और बिना इलाज आठ आदिवासियों की मौत हो गयी थी. इसे लेकर राज्य की राजनीति खूब गरमायी थी. देशभर में पश्चिम बंगाल सरकार की किरकिरी हुई थी.
विधानसभा के शीतकालीन सत्र में भी विपक्ष ने इसे लेकर चर्चा की मांग की थी, लेकिन सरकार ने इनकार कर दिया था, जिस पर खूब हंगामा मचा था. हालांकि बाद में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी दावा करती हैं कि जंगलमहल क्षेत्र काफी सुखी है तथा भुखमरी से कोई मौत नहीं हुई है. सभी लोगों की मौत बीमारी व वृद्धावस्था के कारण हुई थी.
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