निगम को हो सकता 300 करोड़ का नुकसान

कोलकाता: 300 वर्ष से अधिक प्राचीन कोलकाता को सिटी ऑफ जॉय भी कहा जाता है. पर शायद राज्य सरकार व कोलकाता नगर निगम को महानगर का यह उपनाम पसंद नहीं है. तभी तो आइपीएल सात की विजेता कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए स्वागत समारोह के कार्यक्रम की घोषणा करते हुए खेल मंत्री मदन मित्र ने […]
कोलकाता: 300 वर्ष से अधिक प्राचीन कोलकाता को सिटी ऑफ जॉय भी कहा जाता है. पर शायद राज्य सरकार व कोलकाता नगर निगम को महानगर का यह उपनाम पसंद नहीं है.
तभी तो आइपीएल सात की विजेता कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए स्वागत समारोह के कार्यक्रम की घोषणा करते हुए खेल मंत्री मदन मित्र ने यह एलान कर दिया था कि अब कोलकाता सिटी ऑफ जॉय नहीं, बल्कि सिटी ऑफ स्पोर्ट्स कहलायेगा. वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी जैसे महानगर को लंदन की तर्ज पर सजाने के बजाय अब इस शहर को अर्जेटीना की राजधानी ब्यूनस आयर्स की तरह सजाने-संवारने के मूड में दिखायी दे रही हैं. तभी तो उनके इस सपने को साकार करने के लिए महानगर को ब्लू एंड व्हाइट सिटी बनाया जा रहा है.
नीला व सफेद अर्जेटीना का राष्ट्रीय रंग है. शहर को नीले व सफेद रंग में ढकने के लिए कोलकाता नगर निगम ने एक साल के लिए संपत्ति कर में पूरी छूट देने का एलान कर दिया है. निगम को इस तरह टैक्स में छूट देने का एख्तिायर नहीं है. इसलिए इस फैसले को मंजूरी के लिए राज्य सरकार के पास भेजा जायेगा. जाहिर सी बात है कि इस फैसले को मंजूर होने से कोई रोक नहीं सकता है. पर इसका खमियाजा निगम प्रशासन एवं उसके कामकाज पर बुरी तरह पड़ने की आशंका है. निगम की कमाई का मुख्य स्त्रोत संपत्ति कर है. शहर में छह लाख 60 हजार संपत्ति हैं. आर्थिक वर्ष 2013-14 में निगम को रिहायशी व वाणिज्यिक इमारतों से संपत्ति कर के रूप में 650 करोड़ रुपये की आमदनी हुई थी. जानकारों का मानना है कि अगर मुख्यमंत्री के सपने को साकार करने के लिए शहर के सभी लोग अपने घरों को नीले व सफेद रंग में रंग डालते हैं तो इससे संपत्ति कर एक वर्ष का माफ कर दिया जाता है तो इससे निगम के संपत्ति कर का परिमाण आधा हो जायेगा. अर्थात निगम को 300 करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ेगा.
फैसले की चौतरफा आलोचना
पूर्व मेयर विकास रंजन भट्टाचार्य ने फैसले को पूरी तरह गलत बताते हुए कहा कि इस कदम के द्वारा केवल तृणमूल समर्थकों को फायदा पहुंचाया जायेगा. महानगर में लाखों लोग संपत्ति कर देते हैं. पर इस कदम को देख कर लगता है कि टैक्स देने वालों के पैसे से दूसरे फायदा उठायेंगे. निगम में कांग्रेस दल की नेता माला राय ने कहा कि यह फैसला समझ से परे है. अगर निगम अपने पैसे से सभी के घर नीले व सफेद रंग में रंगवा देता तो किसी को आपत्ति नहीं होती. पर यह फैसला केवल कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा है. निगम उन लोगों के लिए क्या व्यवस्था कर रही है, जो टैक्स देते ही नहीं हैं. जिनके पास पैसे ही नहीं हैं. वह लोग कैसे इस सुविधा का लाभ उठायेंगे. यह केवल अमीरों को फायदा पहुंचाने का प्रयास है. भाजपा ने तो निगम के इस फैसले के खिलाफ अदालत जाने की धमकी दे डाली है.
क्या कहना है मेयर का
मेयर शोभन चटर्जी का कहना है कि इस फैसले से राजनीति का कोई लेना-देना नहीं है. अगर सभी लोग अपने घर को एक रंग में रंगते हैं तो इससे न केवल पूरे शहर में एकरूपता आयेगी, बल्कि दुनिया भर में कोलकाता का नाम होगा. इसलिए लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए हम लोगों ने टैक्स माफ करने का फैसला किया है.
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