राजेंद्र नगर टर्मिनल के नीचे इंजीनियरिंग का कमाल, रेलवे पटरियों के नीचे बिना रुके चल रही विशाल TBM मशीनें

सांकेतिक तस्वीर
Patna Metro : पटना मेट्रो का निर्माण अब सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि इंजीनियरिंग का शानदार उदाहरण बनता जा रहा है. शहर के सबसे व्यस्त इलाकों में से एक राजेंद्र नगर टर्मिनल के नीचे बिना किसी रुकावट के सुरंग निर्माण जारी है. टनल बोरिंग मशीनें दिन-रात काम कर रही हैं और ऊपर से गुजरती ट्रेनों के बावजूद निर्माण में कोई बाधा नहीं आ रही.
Patna Metro : पटना मेट्रो प्रोजेक्ट के तहत राजेंद्र नगर टर्मिनल के नीचे चल रहा निर्माण कार्य आधुनिक इंजीनियरिंग का एक ऐसा अद्भुत उदाहरण पेश कर रहा है. शहर के सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशनों में से एक, राजेंद्र नगर टर्मिनल की पटरियों के ठीक नीचे विशालकाय टनल बोरिंग मशीनें (TBM) दिन-रात खुदाई कर रही हैं.
सबसे खास बात यह है कि ऊपर ट्रेनों की आवाजाही पर इसका रत्ती भर भी असर नहीं पड़ रहा है. यह प्रोजेक्ट न केवल पटना की परिवहन व्यवस्था को बदलेगा, बल्कि यह साबित कर रहा है कि सही तकनीक और सटीक योजना से किसी भी भौगोलिक चुनौती को जीता जा सकता है.
बिना रुके बन रही सुरंग
राजेंद्र नगर रेलवे स्टेशन के नीचे सुरंग बनाना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है. यहां जमीन के ऊपर भारी रेल यातायात का दबाव है, जबकि नीचे की मिट्टी को काटकर मेट्रो का रास्ता बनाना है. इस जटिल कार्य को अंजाम देने के लिए ‘सॉइल प्रेशर बैलेंसिंग’ जैसी उन्नत तकनीकों का सहारा लिया जा रहा है.
मोइनुल हक स्टेडियम से राजेंद्र नगर के बीच का यह अंडरग्राउंड स्ट्रेच पटना मेट्रो के सबसे महत्वपूर्ण हिस्सों में से एक है, जो भविष्य में लाखों यात्रियों के समय की बचत करेगा.
24 घंटे हो रही है डिजिटल निगरानी
रेलवे ट्रैक के नीचे काम करना जोखिम भरा होता है, इसलिए सुरक्षा के मानकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रखा गया है. पूरे निर्माण स्थल पर ‘रियल-टाइम मॉनिटरिंग’ सिस्टम लगाया गया है, जो जमीन के भीतर होने वाली हलचल की पल-पल की जानकारी कंट्रोल रूम को भेजता है.
सुरक्षा टीम का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि ऊपर चल रही ट्रेनों के परिचालन में शून्य डिस्टर्बेंस हो और आसपास की इमारतों की संरचनात्मक स्थिरता पर कोई आंच न आए.
जाममुक्त पटना का सपना होगा सच
पटना मेट्रो का यह भूमिगत खंड केवल एक इंजीनियरिंग उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह शहर को ट्रैफिक जाम से मुक्ति दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम है.
यह प्रोजेक्ट दिखाता है कि कैसे तकनीक और प्लानिंग के जरिए सबसे जटिल चुनौतियों को भी आसानी से पार किया जा सकता है. आने वाले समय में यह मेट्रो नेटवर्क पटना के ट्रैफिक सिस्टम को पूरी तरह बदल देगा.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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