बाढ़ पीड़ितों ने नाव को ही बनाया आशियाना
Updated at : 21 Sep 2018 3:47 AM (IST)
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मालदा : जिले के बाढ़ग्रस्त लोग बुनियादी सुविधाओं से इस तरह से वंचित हैं कि उन्हें नावों पर ही जीवन यापन करना पड़ रहा है. इस तरह के दृश्य कालियाचक तीन नंबर ब्लॉक अंतर्गत पारअनुपनगर इलाके में देखे जा सकते हैं. खासतौर पर पारअनुपनगर के अलावा पारलालपुर, गोलापमंडलपाड़ा, शोभापुर, पारदेवनापुर में इसी तरह से किसी […]
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मालदा : जिले के बाढ़ग्रस्त लोग बुनियादी सुविधाओं से इस तरह से वंचित हैं कि उन्हें नावों पर ही जीवन यापन करना पड़ रहा है. इस तरह के दृश्य कालियाचक तीन नंबर ब्लॉक अंतर्गत पारअनुपनगर इलाके में देखे जा सकते हैं. खासतौर पर पारअनुपनगर के अलावा पारलालपुर, गोलापमंडलपाड़ा, शोभापुर, पारदेवनापुर में इसी तरह से किसी तरह लोग अपने अस्तित्व को बचाये रख रहे हैं. इनकी हालत आज ऐसी है कि इनके लिये दुर्गोत्सव कोई मायने नहीं रखता. राज्य सरकार की ओर से राहत सहायता के तहत दिये गये नावों को ही इन बाढ़पीड़ितों ने अपना आशियाना बना लिया है. उसी नाव पर रहने और रसोई बनाने का काम लिया जा रहा है.
बाढ़पीड़ितों कई लोगों का कहना है कि स्कूलों में रहने की जगह नहीं है. आंधी-पानी में खुले आसमान में गोद में बच्चों को साथ लेकर रहना असंभव है. इसीलिये उन्होंने नाव में रहकर किसी तरह जिंदगी बसर करना शुरु किया है. पारअनुपनगर गांव के निवासी बलराम मंडल और उनकी पत्नी राधा मंडल ने बताया कि दुर्गा पूजा में कुछ ही दिन रह गये हैं. लेकिन बाढ़ में उनका सबकुछ बर्बाद हो गया है. रोजगार नहीं है. बच्चों के लिये कपड़े वगैरह खरीदने की सामर्थ्य नहीं है. जितनी फसल बची थी उसे बेचकर किसी तरह समय काट रहे हैं. फिलहाल नदी का पानी कम होने की बात सुनने में आ रही है. हालांकि इलाके में नये सिरे से कटाव शुरु हो गया है. पता नहीं कि गंगा के कटाव में उनकी आवासीय जमीन रहेगी भी कि नहीं.
उधर, सिंचाई विभाग के अनुसार गंगा का जलस्तर कम हो रहा है. इसके बाद ही पारअनुपनगर में कटाव शुरु हो गया है. इससे नदी के कछार पर रह रहे सैकड़ों लोगों में दहशत है. स्थानीय लोगों का कहना है कि बहुत से लोगों ने आम बागानों और स्कूलों में आश्रय ले रखा है. बहुत से परिवारों ने नाव में ही आश्रय ले रखा है. वहीं, सिंचाई विभाग के अनुसार गंगा का जलस्तर 24.57 मीटर है जो फिलहाल खतरे के निशान से नीचे है. इसी तरह से फुलहार नदी का जलस्तर भी 27.20 मीटर पर खतरे के निशान से नीचे ही है. धीरे धीरे इन नदियों का जलस्तर कम हो रहा है. इस स्थिति में कटाव होना स्वाभाविक है. प्रशासन और सिंचाई विभाग हालात पर नजर रख रहे हैं.
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