कोलकाता : 20 सितंबर तक विस्तृत रिपोर्ट तलब यौन उत्पीड़न मामला, हाइकोर्ट ने जीडी बिरला स्कूल प्रबंधन को लगायी फटकार

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 11 Sep 2018 9:30 AM

विज्ञापन

जज ने कहा : स्कूल में आने वाले बच्चों को क्या वह अपने बच्चे की तरह मानते हैं? कोलकाता : जीडी बिरला स्कूल में चार वर्षीया बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में सोमवार को कलकत्ता हाइकोर्ट ने स्कूल प्रबंधन को आड़े हाथों लिया. न्यायाधीश नादिरा पाथेरिया ने स्कूल प्रबंधन से जानना चाहा कि […]

विज्ञापन
जज ने कहा : स्कूल में आने वाले बच्चों को क्या वह अपने बच्चे की तरह मानते हैं?
कोलकाता : जीडी बिरला स्कूल में चार वर्षीया बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में सोमवार को कलकत्ता हाइकोर्ट ने स्कूल प्रबंधन को आड़े हाथों लिया. न्यायाधीश नादिरा पाथेरिया ने स्कूल प्रबंधन से जानना चाहा कि स्कूल में आने वाले बच्चों को क्या वह अपने बच्चे की तरह मानते हैं? पीड़ित बच्ची एक वर्ष से घर में बैठी है. उसका भविष्य खराब हो रहा है.
कहा : जितनी जल्दी हो सके ट्रस्टीज से बात करके प्रबंधन के किसी भी स्कूल में भर्ती कराने की व्यवस्था की जा सकती है या नहीं वह देखें. आगामी 20 सितबंर के भीतर स्कूल प्रबंधन को हलफनामे की सूरत में विस्तृत रिपोर्ट अदालत में पेश करनी होगी. पीड़ित बच्ची के अभिभावकों को भी आगामी 14 सितंबर के भीतर यह बताने के लिए कहा गया है कि अन्य स्कूल में भर्ती कराने से बच्ची को सुविधा होगी या नहीं.
उल्लेखनीय है कि पुलिस के खिलाफ निष्क्रिय रहने व अति सक्रियता दिखाने का आरोप लगाते हुए पीड़ित बच्ची के पिता ने मामला दायर किया है. मामले के आवेदन में स्कूल की प्रिंसिपल के खिलाफ भी आरोप लगाये गये हैं. शुक्रवार को मामले की सुनवाई में सरकारी वकील ताले मसूद सिद्दिकी ने कहा कि मामले की जांच चल रही है.
आरोपियों के खिलाफ कदम उठाये गये हैं. पीड़ित बच्ची के पिता की वकील प्रियंका टिबड़ेवाल का कनहा था कि स्कूल प्रबंधन ने स्कूल के सभी विद्यार्थियों के अभिभावकों को पत्र लिखा था जिसमें पीड़ित बच्ची के नाम का उल्लेख करते हुए घटना का विवरण लिखा गया था.
स्कूल प्रबंधन का यह कदम प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्शुअल ऑफेंस(पॉक्सो) के कानून के तहत दंडनीय है. लेकिन पुलिस ने इसपर प्रबंधन के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया. स्कूल प्रबंधन की ओर से वकील सब्यसाची बंद्योपाध्याय के पास कोई निर्देश न रहने पर अदालत के किसी प्रश्न का जवाब वह न दे सके.
स्कूल प्रबंधन से अदालत ने यह जानना चाहा कि शिक्षक नियुक्ति के वक्त स्कूल प्रबंधन कोई गाइडलाइन मानता है या नहीं? शैक्षिक योग्यता के अलावा और क्या देखा जाता है? शिक्षकों के घर में कोई समस्या है या नहीं वह क्या देखा जाता है? स्कूल के बच्चों के लिए कोई काउंसिलर है या नहीं?
न रहने पर वह कैसे समझते हैं कि किसे क्या समस्या है? ऐसी कोई समस्या रहने पर वैसे शिक्षको को कहीं और रहना चाहिए, स्कूल में नहीं. स्कूल में सिखाया जाता था कि चोरी करना पाप है, झूठ बोलना पाप है. वैसी शिक्षा को आज भी मानकर चला जाता है.
बचपन की यह शिक्षा बेहद महत्वपूर्ण है. अदालत का कहना था कि उक्त घटना के बाद स्कूल ने कुछ नहीं किया. प्राथमिक तौर पर अदालत को ऐसा ही लगता है. स्कूल जाने पर बच्ची को आघात लगा है, इसलिए वह स्कूल नहीं जाना चाहती.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola