कोलकाता : 10 दिन पहले मालदा जिले के मानिकचक में ग्राम पंचायत बोर्ड का गठन करने को लेकर तृणमूल और भाजपा के बीच हुए हिंसक संघर्ष में घायल तीन साल के मासूम मृणाल मंडल को रविवार को कोलकाता एसएसकेएम अस्पताल ले जाया गया. लेकिन अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही का आलम ऐसा कि उसे अस्पताल में भर्ती करने को लेकर करीब तीन घंटे तक परिजनों को इधर से उधर भटकना पड़ा.
अस्पताल में ना तो उसे स्ट्रेचर दिया गया और ना ही एंबुलेंस. यहां तक कि अस्पताल की ओर से किसी कर्मचारी ने उसे भर्ती लेने की सक्रियता भी नहीं दिखायी. इसे लेकर परिजनों में रोष देखा गया. एक व्यक्ति ने बताया कि सुबह से घरवाले मृणाल को लेकर चादर में लपेटे हुए एक जगह से दूसरी जगह दौड़ते रहे.
कभी टिकट खिड़की पर तो कभी इमरजेंसी में करीब तीन घंटे तक उन्हें परेशान किया गया, जिसके बाद सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचे मीडियाकर्मियों ने जब पूछताछ शुरू की, तब जाकर अस्पताल कर्मी सक्रिय हुए और उसे भर्ती किया.
उल्लेखनीय है कि 10 दिन पहले मानिकचक में ग्राम पंचायत बोर्ड गठन के दौरान भाजपा की विजयी उम्मीदवार पुतुल मंडल ने तृणमूल के पंचायत प्रधान का समर्थन कर दिया था.
इसके बाद कथित तौर पर उनके घर भाजपा कार्यकर्ताओं ने हमला बोल दिया. इस दौरान किसी के हाथ से चली गोली जाकर तीन साल के मासूम मृणाल के सिर में लग गयी थी. मालदा मेडिकल कॉलेज में उनका उसका लगातार इलाज चल रहा था. 10 दिनों की चिकित्सा के बाद वह कुछ स्वस्थ हो चला है.
उसे और अधिक बेहतर चिकित्सा मिले इसके लिए चिकित्सकों ने एसएसकेएम अस्पताल में रेफर कर दिया है. रविवार को घरवाले उसे लेकर यहां पहुंचे थे, लेकिन अस्पतालकर्मियों की लापरवाही की वजह से परिजनों को उसे गोद में लेकर एक जगह से दूसरी जगह करीब तीन घंटे तक भटकना पड़ गया.
