सोमनाथ दा को दोबारा पार्टी में शामिल न कराने पर पश्चिम बंगाल के माकपा नेताओं ने जताया अफसोस

Updated at : 13 Aug 2018 9:13 PM (IST)
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सोमनाथ दा को दोबारा पार्टी में शामिल न कराने पर पश्चिम बंगाल के माकपा नेताओं ने जताया अफसोस

कोलकाता : पश्चिम बंगाल में माकपा नेताओं के एक वर्ग ने लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष और दिग्गज सांसद सोमनाथ चटर्जी के निधन पर शोक जताते हुए सोमवार को इस बात पर अफसोस जताया कि वे उन्हें पार्टी में दोबारा शामिल नहीं करा पाये. माकपा नेता ज्योति बसु के करीबी रहे चटर्जी को 2008 में माकपा […]

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कोलकाता : पश्चिम बंगाल में माकपा नेताओं के एक वर्ग ने लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष और दिग्गज सांसद सोमनाथ चटर्जी के निधन पर शोक जताते हुए सोमवार को इस बात पर अफसोस जताया कि वे उन्हें पार्टी में दोबारा शामिल नहीं करा पाये. माकपा नेता ज्योति बसु के करीबी रहे चटर्जी को 2008 में माकपा ने पार्टी के रुख से गंभीर रूप से समझौता करने को लेकर निष्कासित कर दिया था.

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सोम दा ने लोकसभा अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने से मना कर दिया था. उनका मानना था कि लोकसभा अध्यक्ष का पद किसी दलगत राजनीति से स्वतंत्र और निष्पक्ष है. जुलाई, 2008 में माकपा ने यूपीए सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया था. इसके बाद पार्टी ने उन्हें लोकसभा अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के लिए कहा था. चटर्जी ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था. प्रकाश करात तब माकपा के महासचिव थे. लंबी बीमारी के बाद सोमवार सुबह शहर के एक निजी अस्पताल में उनका निधन हो गया. वे उम्र 89 साल के थे.

माकपा के वरिष्ठ नेता नेपालदेब भट्टाचार्य ने कहा कि पार्टी में दोबारा शामिल होने के लिए रजामंद करने की खातिर पिछले कुछ सालों में कई नेता चटर्जी से मिले, लेकिन मुद्दा सुलझ नहीं पाया. उन्होंने कहा कि हमें पूरी जिंदगी यह अफसोस रहेगा कि हम उन्हें दोबारा पार्टी में नहीं ला पाये. हम आज एक मुश्किल स्थिति में हैं और अच्छा होता अगर वह हमारे साथ होते. हमने पूर्व में उन्हें वापस लाने की पूरी कोशिश की, लेकिन नाकाम रहे.

माकपा की केंद्रीय समिति के सदस्य सुजान चक्रवर्ती ने कहा कि पार्टी से निष्कासन के बाद भी पार्टी सदस्यों के साथ चटर्जी के संबंध पहले जैसे ही रहे. उन्होंने कहा कि हमारे उनके साथ हमेशा बेहद मधुर संबंध थे. काश, वह पार्टी के सदस्य बने रहते. उनका निधन हमारे लिए एक अपूरणीय क्षति है. माकपा की पश्चिम बंगाल इकाई के सचिव सूर्यकांत मिश्रा ने चटर्जी को धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक ताकतों के लिए लड़ने वाला सांसद बताया, जिनके लिए सभी राजनीतिक दलों के नेताओं में प्रेम और सम्मान था.

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में वह पार्टी के संपर्क में नहीं थे, लेकिन यह मायने नहीं रखता. वह पार्टी से ऊपर थे. उन्होंने संसदीय लोकतंत्र में और धर्मनिरपेक्ष एवं लोकतांत्रिक ताकतों के लिए जो भूमिका निभायी, उसे किसी एक दल के संदर्भ में नहीं देखा जा सकता. माकपा के एक दूसरे नेता ने नाम सार्वजनिक ना करने के अनुरोध के साथ कहा कि चटर्जी को माकपा से निकालने का कारण पार्टी के तत्कालीन नेतृत्व का अहंकार था.

लोकसभा सदस्य मोहम्मद सलीम, पार्टी के वरिष्ठ नेता श्यामल चक्रवर्ती और राबिन डे चटर्जी को सोमवार कोअस्पताल जाकर श्रद्धांजलि देने वाले नेताओं में शामिल थे. माकपा की प्रदेश समिति ने सुबह पार्टी मुख्यालय में चटर्जी के निधन की खबर आने के बाद अपनी बैठक स्थगित कर दी. करीब 10 बार लोकसभा सदस्य रहे चटर्जी 1968 से 2008 तक माकपा के सदस्य थे.

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