2019 लोकसभा चुनाव: राजनीतिक सरगर्मियां तेज, उमर का फॉर्मूला, राहुल बनें अगुवा और कांग्रेस बने रीढ़

Updated at : 29 Jul 2018 11:08 PM (IST)
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2019 लोकसभा चुनाव: राजनीतिक सरगर्मियां तेज, उमर का फॉर्मूला, राहुल बनें अगुवा और कांग्रेस बने रीढ़

कोलकाता : नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि केंद्र में भाजपा को सत्ता से हटाने के लिए 2019 के लोकसभा चुनावों के प्रचार अभियान में कांग्रेस को विपक्षी एकता की ‘धुरी’ और राहुल गांधी को इसका अगुवा बनना होगा. एक न्यूज एजेंसी के साथ साक्षात्कार में अब्दुल्ला ने कहा कि कांग्रेस […]

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कोलकाता : नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि केंद्र में भाजपा को सत्ता से हटाने के लिए 2019 के लोकसभा चुनावों के प्रचार अभियान में कांग्रेस को विपक्षी एकता की ‘धुरी’ और राहुल गांधी को इसका अगुवा बनना होगा. एक न्यूज एजेंसी के साथ साक्षात्कार में अब्दुल्ला ने कहा कि कांग्रेस को धुरी बनना पड़ेगा, क्योंकि एक विशेष पार्टी से विपक्ष की सीटों का हिस्सा इसी से होगा, क्योंकि कई ऐसे राज्य हैं, जहां पर कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधी टक्कर होगी. आखिरकार केंद्र में सरकार बनाने के लिए 272 सीटों की जरूरत होगी, जो क्षेत्रीय दलों को मिलने नहीं जा रही हैं. यदि गैर-भाजपा सरकार बनाने के लिए इस आंकड़े तक नहीं पहुंचते हैं, तो आप 100 सीटों के करीब होने के कारण कांग्रेस की तरफ देखेंगे.

राहुल गांधी को विपक्ष का चेहरा बनाये जाने के मुद्दे पर अब्दुल्ला ने कहा कि सबसे बड़े विपक्षी दल का अध्यक्ष होने के नाते वह उम्मीद कर रहे हैं कि वह चुनाव अभियान की अगुआई करेंगे, लेकिन याद रखना होगा कि सोनिया गांधी यूपीए की नेता हैं. इसलिए कोई भी उम्मीद करेगा कि सोनिया गांधी भी अभियान का हिस्सा होंगी. अब्दुल्ला ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की थी. इसके बाद ममता ने कहा था कि 2019 के संभावित गठबंधन के लिए पीएम का नाम अभी तय नहीं किया जाना चाहिए. उमर ने राहुल की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाने वालों पर कहा कि अगर किसी को उनके नेतृत्व के गुण पर संदेह होना चाहिए, तो यह उनकी पार्टी को होना चाहिए. उनकी पार्टी को इससे कोई समस्या नहीं है, तब किसी और को आपत्ति क्यों होनी चाहिए. इधर, लोस चुनाव से पहले कांग्रेस के सेवा दल ने ‘भाजपा के राष्ट्रवाद’ को चुनौती देने के लिए अगले महीने सभी प्रदेशों में ‘तिरंगा मार्च’ निकालने का फैसला किया है.

कई क्षेत्रीय दल राहुल के नेतृत्व के खिलाफ
विपक्षी मोर्चा बनाने के लिए प्रयास तेजी से किये जा रहे हैं, लेकिन क्षेत्रीय दलों के नेताओं का एक वर्ग नहीं चाहता है कि कांग्रेस इसकी अगुआई करे. वे एक गैर-भाजपा एवं गैर-कांग्रेस मोर्चा बनाने की बात कर रहे हैं. ममता बनर्जी का कहना है कि अगले लोकसभा चुनावों के लिए संभावित विपक्षी मोर्चा की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर किसी का भी नाम नहीं चुना जाना चाहिए. वहीं, सपा प्रमुख अखिलेश ने अभी तक अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है. उधर, टीआरएस प्रमुख चंद्रशेखर राव भी गैर-भाजपा एवं गैर-कांग्रेस मोर्चा बनाने की बात कर चुके हैं. मायावती की भी ऐसी ही राय है. इससे पहले राजद नेता तेजस्वी ने लोकसभा चुनाव के लिए सिर्फ राहुल ही प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नहीं है. हालांकि तेजस्वी ने यह भी कहा था कि कांग्रेस विपक्षी दलों में सबसे बड़ी पार्टी है और 2019 में सभी दलों को एकजुट करने की जिम्मेवारी राहुल गांधी की है.

एकता को प्रभावित करने के लिए उठाया गया चेहरे का मुद्दा
उमर ने कहा कि विपक्ष का चेहरा कौन हो, यह मुद्दा एकता को प्रभावित करने के लिए उठाया गया है. क्षेत्रीय पार्टियां अपने राज्यों में मजबूत हैं. पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी भाजपा के खिलाफ लड़ाई का नेतृत्व कर रही हैं. बिहार में भाजपा विरोधी चेहरा लालू प्रसाद हैं. उन्हें कांग्रेस का समर्थन है. उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव, मायावती हैं. तमिलनाडु में करुणानिधि और स्टालिन हैं. पूरे देश में होने के नाते कांग्रेस के पास बड़ी जिम्मेदारी है. इसलिए हमें रणनीति बनाकर आगे बढ़ना चाहिए.

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