संकट में है बंगाल का केबल उद्योग
Updated at : 25 Jul 2018 2:54 AM (IST)
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कोलकाता : कुछ वर्षों में बंगाल में एक के बाद एक कल-कारखानें बंद होते गये. इन दिनों हर उद्योग जद्दोजहद से गुजर रहा है. इसी दौर से बंगाल का केबल उद्योग भी गुजर रहा है. जितनी तेजी से सिटी केबल के ग्राहकों की संख्या बढ़ी, उतनी ही तेजी से दरों में भी बढ़ोतरी होती गयी. […]
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कोलकाता : कुछ वर्षों में बंगाल में एक के बाद एक कल-कारखानें बंद होते गये. इन दिनों हर उद्योग जद्दोजहद से गुजर रहा है. इसी दौर से बंगाल का केबल उद्योग भी गुजर रहा है. जितनी तेजी से सिटी केबल के ग्राहकों की संख्या बढ़ी, उतनी ही तेजी से दरों में भी बढ़ोतरी होती गयी. सिटी केबल के दरों में बढोतरी से पश्चिम बंगाल के केबल ऑपरेटर्स परेशान हैं. खासकर ग्रामीण अंचलों में सिटी केबल ऑपरेटर्स अधिक समस्याओं से घिरे हैं. बंगाल में 1.7 लाख लोगों का परिवार केबल उद्योग से जुड़ा है, जो संकट से गुजर रहे हैं.
सीएम ने सुनी थी फरियाद
नेताजी इंडोर स्टेडियम में हाल ही में हुए केबल टीवी समिट 2018 के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केबल ऑपरेटरों की समस्याएं सुनते हुए उच्चस्तरीय कमेटी गठित कर स्वास्थ्य साथी व सामाजिक सुरक्षा योजना के तहत 1.3 लाख केबल ऑपरेटरों को स्वास्थ्य बीमा व पेंशन से लाभान्वित की घोषणा की थी. लेकिन केबल आॅपरेटरों पर मल्टी सिस्टम ऑपरेटर्स (एमएसओ) द्वारा दर बढ़ोतरी उनके लिए बड़ी समस्या बन गयी है.
जुलाई से एमएसओ ने बढ़ायी दर
इधर, केबल अपरेटर्स यूनियन का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में दरों में काफी बढ़ोतरी हुई. एक साल में तीन बार बढ़ी. जुलाई से 100 प्रतिशत दर बढ़ोतरी हुई. बढ़ी दर को लागू कर पाना केबल ऑपरेटरों के लिए संभव नहीं हो पा रहा है, क्योंकि ग्रामीण इसके लिए राजी नही हैं.
डेढ़ दर्जन से ज्यादा है एमएसओ
बंगाल में शहर औऱ ग्रामीण अंचल को प्रथम, द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ चरणों में बांटा गया है. इनमें तृतीय और चतुर्थ ग्रामीण क्षेत्रों को और प्रथम व द्वितीय शहरी अंचलों (कोलकाता और सटे जिले) को कवर करते हैं. शहर और ग्रामीण अंचलों में सिटी केबल आइसीएनसीएल, डीजी, मंथन, हैथवे, जीटीपीएल समेत डेढ़ दर्जन से ज्यादा मल्टीपल सिस्टम ऑपरेटर्स (एमएसओ) है, जिनके जरिये केबल ऑपरेटर्स कनेक्शन लेकर ग्राहकों को देते हैं.\
समस्याओं से घिरे केबल उद्योग से जुड़े हैं 1.7 लाख लोग
क्या कहते हैं केबल ऑपरेटर्स और ग्राहक
केबल ऑपरेटरों का कहना है कि एमएसओ बढ़ोतरी दर प्रति कनेक्शन केबल ऑपरेटर से लेते हैं, जबकि केबल अपरेटर्स सबसक्राइबर (ग्राहकों) पर रेट नहीं बढ़ा पा रहे हैं. पहले 100 रुपये थे. 150 हुए और अब ग्राहक 200 पर अधिकांश जगह राजी नहीं हैं. वर्तमान में डिजिटल होने के बाद कोलकाता में जहां 40 लाख ग्राहक हैं, वहीं ग्रामीण अंचलों में सिटी केबल के ग्राहक 70 लाख ग्राहक है. ऐसे में ग्रामीण अंचल को नजरअंदाज करना ठीक नहीं है. वहीं ग्राहकों का कहना है कि ग्रामीण अंचल में कनेक्शन में गड़बड़ी, नियमित सेवाओं में विलंब, सेट टॉप बॉक्स खराब होने पर तुरंत बनाने में दिक्कतें आदि कई सारी समस्याएं हैं, जिससे गुजरना पड़ता है.
डिजिटल होने से डिक्लेयर कनेक्टिविटी से दर बढ़ना स्वाभाविक
दर बार-बार नहीं, बल्कि साल में बढ़ती है. लेकिन पिछले ढाई साल में पहली बार बढ़ी है. डिजिटल होने पर डिक्लेयर कनेक्टिविटी बढ़ने से दर बढ़ना स्वाभाविक है. केबल ऑपरेटर्स ग्राहकों को समझाकर बढ़ी दर मुताबिक दर लें. आंदोलन करनेवाले सभी ऑपरेटर्स चतुर्थ चरण के हैं. ये पहले बिना डिजिटल चलाते थे, लेकिन अब डिजिटल होने पर सम्भव नहीं है. जो मुख्य ऑपरेटर्स व्यवसायी हैं, वे अपने व्यवसाय में लगे हैं. वे इनके आंदोलन में नहीं हैं.
सुरेश सेठिया, डॉयरेक्टर, सिटी केबल
25 जुलाई को प्रदर्शन करेंगे 25 हजार केबल ऑपरेटर्स
विश्व बांग्ला केबल टीवी ऑपरेटर्स यूनियन ने एमएसओ द्वारा जुलाई से लागू बढ़ी दर के खिलाफ 25 जुलाई को धर्मतल्ला के रानी रासमणि एवेन्यू में आंदोलन करेंगे. केबल ऑपरेटरों की समस्याओं का समाधान करने, ग्राउंड लेबल पर ग्रामीण सेवाएं बेहतर करने समेत कई मांगों को लेकर 25 हजार ऑपरेटर्स प्रदर्शन करेंगे. अगर समस्या नहीं सुनी गयी, तो केबल ऑपरेटर्स आनेवाले समय में परिसेवा बंद कर वृहद आंदोलन करेंगे.
डॉ शंकर मंडल, अध्यक्ष, विश्व बांग्ला केबल टीवी ऑपरेटर्स यूनियन
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