उच्च माध्यमिक के छात्रों को रोचक तरीके से पढ़ायी जायेगी साइंस

Updated at : 18 Jul 2018 2:00 AM (IST)
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उच्च माध्यमिक के छात्रों को रोचक तरीके से पढ़ायी जायेगी साइंस

कोलकाता : उच्च माध्यमिक में पिछले दो सालों से साइंस विषय में छात्रों का प्रदर्शन काफी खराब रहा है. एक सर्वे रिपोर्ट बताती है कि छात्रों को फिजिक्स, केमेस्ट्री, मैथ, बायोलॉजी को समझने में काफी परेशानी हो रही है. यही कारण है कि उनके अंक इन विषयों में काफी कम आये हैं. इसमें सुधार लाने […]

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कोलकाता : उच्च माध्यमिक में पिछले दो सालों से साइंस विषय में छात्रों का प्रदर्शन काफी खराब रहा है. एक सर्वे रिपोर्ट बताती है कि छात्रों को फिजिक्स, केमेस्ट्री, मैथ, बायोलॉजी को समझने में काफी परेशानी हो रही है. यही कारण है कि उनके अंक इन विषयों में काफी कम आये हैं. इसमें सुधार लाने के लिए अब उच्च माध्यमिक शिक्षा पर्षद ने एक नयी व्यवस्था की है.
पर्षद की ओर से सभी एफिलियेटेड स्कूलों को साइंस विषय को ज्यादा रुचिकर बनाने की अपील की गयी है. इसमें स्कूल हेडमास्टरों को एक नयी अध्यापन प्रणाली से छात्रों को साइंस पढ़ाने का सुझाव दिया गया है. एप्लीकेशन-आधारित ज्ञान से छात्रों को जोड़ने के लिए टीचिंग-पद्धति को मोडीफाई करने के लिए कहा जा रहा है.
उच्च माध्यमिक काउंसिल द्वारा किये गये अध्ययन व छात्रों की अपील पर काउंसिल की ओर से एक अधिसूचना जारी की गयी है. इसमें सभी एफिलियेटेड स्कूलों के प्रधानाध्यापकों से पढ़ाने की प्रणाली में सुधार करने का सुझाव दिया गया है. काउंसिल के एक अधिकारी का कहना है कि अभी छात्रों की 12वीं की बोर्ड परीक्षा में काफी कम अंक आये हैं. वहीं स्कूलों द्वारा कक्षा 11वीं में, छात्रों का इंटरनल टेस्ट लिया गया, उसमें छात्रों ने अच्छे अंक हासिल किये.
इसके पीछे क्या कारण है, इसका पता लगाया जा रहा है. साइंस में बेहतरीन शिक्षा देने के कुछ उपायों पर जोर दिया जा रहा है. स्कूल वाइज छात्रों के फिजिक्स, केमेस्ट्री, मैथ व बायलोजी में 2016 से 2018 के बीच काफी खराब प्रदर्शन किया गया. काउंसिल की अध्यक्ष महुआ दास ने कहा कि सर्वे की रिपोर्ट बताती है कि छात्र साइंस में पीछे जा रहे हैं. काउंसिल गुणवत्तापरक साइंस शिक्षा देने के लिए नयी नीति बना रही है, स्कूलों को इसी अनुसार काम करना होगा.
साइंस को एक नये तरीके से पढ़ाने के लिए कई प्रयास किये जा रहे हैं, जिससे वे उपरोक्त विषयों में रुची लेकर पढ़ सकें. काउंसिल इस बात से भी हैरान है कि 11वीं में अलग व 12वीं में अलग अंक छात्रों ने हासिल किये हैं. इसका मतलब यही है कि स्कूल अध्यापन प्रणाली को अभी दुरुस्त करने पर ध्यान नहीं दे रहे हैं. काउंसिल ने जो पैरामीटर्स रखे हैं, उन पर स्कूलों को काम करना होगा.
काउंसिल ने स्कूलों को कमजोर छात्रों के लिए नियमित रूप से अतिरिक्त कक्षाएं करवाने व व्यक्तिगत ताैर पर ऐसे छात्रों के लिए ज्यादा ध्यान देने का सुझाव दिया है. कोई समस्या होने पर स्कूल काउंसिल को आगाह कर सकते हैं. काउंसिल स्कूल को हर सहायता देने के लिए तैयार है. कुछ स्कूलों में साइंस के शिक्षकों की कमी है तो कहीं पर्याप्त लेबोरेटरी सुविधाएं नहीं हैं.
जरूरत के हिसाब से रेमेडियल क्लास करने व नयी तकनीक से पढ़ाने के लिए कहा गया है. इस मामले में साइंस शिक्षकों क कहना है कि माध्यमिक व उच्च माध्यमिक के साइंस पाठ्यक्रम में काफी असमानता है, इसलिए छात्र बेहतर नहीं कर पाये हैं. पाठ्यक्रम को रिवाइज्ड किया गया है, ताकि छात्र नया कुछ सीख सकें.
वहीं आइसीएसइ व सीबीएसइ छात्र 10वीं में एरीथमेटिक भी पढ़ते हैं. ये अध्याय माध्यमिक के पाठ्यक्रम में कहीं नहीं हैं, इसलिए भी छात्रों को कठिन लगता है. माध्यमिक बोर्ड ने 9वीं व 10वीं के साइंस पाठ्यक्रम को अपग्रेड किया है. साथ ही अब छात्रों में ज्यादा रुचि पैदा करने के लिए क्लास में नयी तकनीक अपनायी जा रही है.
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