जेयू को लेकर राज्य सरकार कंफ्यूज: दिलीप

Updated at : 09 Jul 2018 2:33 AM (IST)
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जेयू को लेकर राज्य सरकार कंफ्यूज: दिलीप

कोलकाता : प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष दिलीप घोष पार्टी मुख्यालय में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि वह दाखिला नहीं ले पानेवाले छात्रों के पक्ष में हैं और चाहते हैं कि उनकी पढ़ाई किसी भी तरह से व्याधित नहीं हो. इसके लिए उन्होंने राज्य सरकार से स्पष्ट नीति अपनाने की मांग की है. उन्होंने […]

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कोलकाता : प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष दिलीप घोष पार्टी मुख्यालय में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि वह दाखिला नहीं ले पानेवाले छात्रों के पक्ष में हैं और चाहते हैं कि उनकी पढ़ाई किसी भी तरह से व्याधित नहीं हो. इसके लिए उन्होंने राज्य सरकार से स्पष्ट नीति अपनाने की मांग की है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पूरी तरह कंफ्यूज है.
उल्लेखनीय है कि प्रवेश परीक्षा की मांग को लेकर पिछले कई दिनों से जादवपुर विश्वविद्यालय में छात्र आंदोलन कर रहे हैं. इस कड़ी में छात्रों ने विश्वविद्यालय के कुलपति का तकरीबन 30 घंटे तक घेराव भी किया था. फिलहाल छात्र अनशन पर हैं. छात्रों को अनशन तोड़ने के लिए कुलपति सुरंजन दास ने पत्र देकर अपील भी की है.
पूरे घटनाक्रम को लेकर कुलाधिपति केशरीनाथ त्रिपाठी से मुलाकात कर कुलपति ने लिखित वस्तुस्थिति भी बतायी है. फिलाहल श्वविद्यालय प्रबंधन को कुलाधिपति के निर्देश का इंतजार है.
उनके निर्देश पर ही तय होगा कि जादवपुर विश्वविद्यालय में प्रवेश परीक्षा होगी की नहीं. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए दिलीप घोष ने कहा कि राज्य के शिक्षा मंत्री सुबह एक बयान देते हैं और शाम को उससे मुकुर जाते हैं. राज्य सरकार असमंजस की स्थिति में है. यह समस्या उनकी खुद की बनायी हुई है. लिहाजा पहले इन लोगों को खुद बैठ कर समस्या का हल तलाशना होगा. इसके लिए जरूरत पड़ने पर कुलपति प्रधानाचार्य और शिक्षा जगत के लोगों व छात्र प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर उसका हल तलाशना होगा.
उन्होंने शिक्षा मंत्री पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पार्थ चटर्जी भी क्या करेंगे. वह तो लाचार और बेबस हैं. उन पर कई दफ्तरों की जिम्मेवारी है. इसके अलावा वह तृणमूल कांग्रेस को संभाल ही रहे हैं साथ में तृणमूल छात्र परिषद के नेतृत्व की जिम्मेवारी भी संभाल रहे हैं. जाहिर सी बात है वह कंफ्यूज तो होंगे ही. प्रशासन चलाने की एक पद्धति होनी चाहिए लिहाजा जादवपुर विश्विद्यालय की समस्या को आंदोलन का मुद्दा बनाने की बजाय इसका समाधान करना चाहिए ताकि छात्रों को कोई समस्या नहीं हो.
काॅलेजों में दाखिला के नाम पर हो रही वसूली के सवाल पर उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को पैसा कमाने का जरिया बना दिया गया है. यह प्रक्रिया किसी पार्टी विशेष और नेताओं के लिए भले ही अच्छी हो सकती है लेकिन बंगाल के भविष्य के लिए ठीक नहीं हैं.
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