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तृणमूल का राज्यपाल की भूमिका पर सवाल

कांग्रेस ने भी जतायी आपत्ति दो दिवसीय होगा कार्यक्रम कोलकाता : पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी व त्रिपुरा के राज्यपाल तथागत राय फरवरी में राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) के फरवरी में कोलकाता में प्रस्तावित सीमा प्रबंधन सम्मेलन में शामिल होंगे. दोनों राज्यपालों ने सम्मेलन में शामिल होने पर अपनी सहमति जतायी है. सीमांत चेतना […]

कांग्रेस ने भी जतायी आपत्ति

दो दिवसीय होगा कार्यक्रम
कोलकाता : पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी व त्रिपुरा के राज्यपाल तथागत राय फरवरी में राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) के फरवरी में कोलकाता में प्रस्तावित सीमा प्रबंधन सम्मेलन में शामिल होंगे. दोनों राज्यपालों ने सम्मेलन में शामिल होने पर अपनी सहमति जतायी है.
सीमांत चेतना मंच के सांगठनिक सचिव जगन्नाथ सेनापति ने यह जानकारी दी. आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारी के अनुसार इस दो दिवसीय सम्मेलन का उद्देश्य सीमा सुरक्षा बल के साथ स्थानीय लोगों के समन्वय को और भी मजबूत करना है. पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश से घुसपैठ व भारत से गायों की तस्करी को देखते हुए ही पश्चिम बंगाल में इस तरह का सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है. आरएसएस समर्थित संगठन सीमांत चेतना मंच द्वारा 10 फरवरी से दो दिवसीय सम्मेलन हो रहा है.
तृणमूल का राज्यपाल…
श्री सेनापति ने कहा कि इस सम्मेलन का उद्देश्य बांग्लादेश से होने वाले घुसपैठ को स्थानीय लोगों की मदद से रोकना है तथा स्थानीय लोगों को संवेदनशील बनाना है, ताकि वे बीएसएफ के जवानों के साथ समन्वय के साथ काम कर सके. उन्होंने कहा कि बांग्लादेश से सटे पश्चिम बंगाल व त्रिपुरा की सीमा गैरकानूनी गतिविधियों का गढ़ बन गया है तथा बांग्लादेशी आतंकी वहां सक्रिय हैं. पदाधिकारियों का कहना है कि बांग्लादेश से सटे सीमावर्ती जिलों में विकास के अभाव के कारण युवा लोग आसानी से आतंकी संगठनों के टार्गेट बन जा रहे हैं, जो राज्य में गैर कानूनी गतिविधियां चलाना चाहती हैं.
श्री सेनापति ने कहा कि मालदा के कालियाचक व उत्तर 24 परगना के बशीरहाट में हाल में ही सांप्रदायिक दंगा इसके उदाहरण हैं. ये गतिविधियां बांग्लादेशी आतंकी गतिविधियों की सक्रियता के कारण ही हो रही है. तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व राज्य के खाद्य मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक ने इस पूरे प्रयास को शांति विघ्न करने वाला प्रयास करार दिया. श्री मल्लिक ने कहा कि आरएसएस जैसे संगठन तथा भाजपा के संगठन राज्य में शांति और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि वे राजनीतिक रूप से तृणमूल कांग्रेस का मुकाबला नहीं कर पा रहे हैं. विधानसभा में विपक्ष के नेता व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अब्दुल मन्नान ने कहा कि राज्यपाल द्वारा किसी पार्टी समर्थित संगठन का कार्यक्रम में शामिल होना स्वीकार नहीं है. त्रिपुरा के राज्यपाल तो पहले ही पार्टी लाइन से बयान देते रहे हैं तथा पश्चिम बंगाल के राज्यपाल भी उन्हीं के नक्शे कदम पर चल रहे हैं.
उन्होंने कहा कि इन राज्यपालों का अतीत सर्वविदित है. वास्तव में वे राज्यपाल के पद पर रह कर भाजपा की नीतियों को क्रियान्वित करने की कोशिश कर रहे हैं. वह आशा करते हैं कि राज्यपाल की पद की गरिमा के अनुकूल वे इस तरह से कार्यक्रम में शामिल होने से खुद को अलग रखेंगे. आयोजकों के अनुसार इस कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल व त्रिपुरा के राज्यपाल के शामिल होने के साथ-साथ प्रधानमंत्री कार्यालय, गृह मंत्रालय व बीएसएफ व सेना के पदाधिकारियों पूर्व अधिकारियों को भी पत्र आमंत्रण पत्र भेजा है. इस सम्मेलन में सीमांत चेतना मंच के त्रिपुरा, असम, मिजोरम, बंगाल व मेघायल को लगभग 500 प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है.
Prabhat Khabar Digital Desk
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