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मजदूरी में कटौती से शव वाहकों ने किया कार्य से इनकार, प्लेटफॉर्म पर 17 घंटे पड़ा रहा शव

आसनसोल. रेल लाइनों से शव उठाने के एवज में शववाहक कर्मियों की मेहताना राशि में कटौती के विरोध में हावडा रक्सौल मिथिला एक्सप्रेस ट्रेन के मृत यात्री मोहम्मद करामत (55) का शव उठाने से कर्मियों ने इंकार कर दिया. उन्होंने शनिवार की रात को स्टेशन परिसर में प्रदर्शन भी किया. सनद रहे कि उन्हें पहले […]

आसनसोल. रेल लाइनों से शव उठाने के एवज में शववाहक कर्मियों की मेहताना राशि में कटौती के विरोध में हावडा रक्सौल मिथिला एक्सप्रेस ट्रेन के मृत यात्री मोहम्मद करामत (55) का शव उठाने से कर्मियों ने इंकार कर दिया. उन्होंने शनिवार की रात को स्टेशन परिसर में प्रदर्शन भी किया. सनद रहे कि उन्हें पहले प्रति शव को पोस्टमार्टम घर तक पहुंचाने के लिए एक हजार रूपये की राशि मिलती थी. लेकिन रेलवे बोर्ड ने उसमें कटौती कर उसे सात सौ रूपये कर दिया.

इसके कारण शव सात नंबर प्लेटफॉर्म पर सनद रहे कि अप मिथिला एक्सप्रेस ट्रेन की जेनरल बोगी में खगड़िया जिला के सुलतानपुर (बिहार) निवासी मोहम्मद करामत सफर कर रहे थे. दुर्गापुर के निकट उसने सीने में अचानक दर्द होने लगा. कुछ ही मिनटों में उनकी मौत हो गयी. इसकी सूचना यात्रियों ने आसनसोल जीआरपी को दी. ट्रेन के आसनसोल स्टेशन पहुंचने पर जीआरपी अधिकारी बल के साथ पहुंचे. मौजूद रेल चिकित्सक ने करामत की जांच कर उन्हें मृत घोषित कर दिया. जीआरपी अधिकारी की सूचना मिलने के बाद शववाहक कर्मी विक्की और सिकंदर ने शव को ट्रेन से उतार कर प्लेटफॉर्म संख्या सात पर रख दिया.

परंतु शव को पोस्टमार्टम के लिए आसनसोल जिला अस्पताल ले जाने से उन्होंने साफ इंकार कर दिया. उन्होंने जीआरपी अधिकारियों को कहा कि पहले उन्हें एक शव को जिला अस्पताल पहुंचाने के एवज में एक हजार रुपये मेहनताना मिलता था. परंतु अब उन्हें मात्र सात सौ रूपये दिये जा रहे हैं. इस राशि में प्लास्टिक खरीदारी से लेकर ठेला खर्च सभी शामिल है. इतनी कम राशि में घंटों मेहनत करने के बाद भी कुछ नहीं बचता है. जीआरपी अधिकारियों के काफी समझाने के बाद भी वे शव ले जाने के लिए तैयार नहीं हुए. आसनसोल स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या सात पर ही शव शनिवार की रात से रविवार की सुबह तक पड़ा रहा. वहां से गुजरने वाले यात्रियों ने सुबह-सुबह तीखी प्रतिक्रिया जतायी. जीआरपी अधिकारियों के काफी आग्रह और सोमवार को इस मुद्दे पर रेल के विभागीय अधिकारियों के साथ मेहताना के मुद्दे पर बैठक करने के आश्वासन के बाद विक्की और सिकंदर शव को लेकर दोपहर डेढ़ बजे सात नंबर प्लेटफॉर्म से जिला अस्पताल के लिए निकले.
उन्होंने बताया कि बढ़ती महंगाई को लेकर निजी और सरकारी सभी संस्थानों में मेहताने में वृद्धि की जा रही है. फिर उनके मेहनताने को किस आधार पर घटाया गया है? उन्होंने कहा कि रेल लाइन से शव लाने में काफी परेशानी होती है. कभी-कभी तीन कर्मियों को लगना पड़ता है. उनका मेहताना न्यूनतम तीन हजार रूपये होना चाहिए.
मंडल के जनसंपर्क अधिकारी दिपायन मित्र ने कहा कि शव उठाने को लेकर कुछ विवाद था. जिसे सुलझा लिया गया है. रेल मंडल के सीनियर डीसीएम ए उपाध्याय ने कहा कि रेल बोर्ड से जैसा निर्देश आता है, उसी के अनुरूप पारिश्रमिक का भुगतान किया जाता है. शववाहकों को दिया जाने वाले मेहताना दो नवंबर से एक हजार से घटाकर सात सौ रूपये किया गया है. शव के देर तक स्टेशन पर पड़े रहने के मामले में उन्होंने कहा कि मेहताना को लेकर हो रहे विवाद को कुछ ही देर में सुलझा लिया गया था. पुलिस की कार्रवाई या अन्य कारणों से शव को अस्पताल ले जाने में देर हुई होगी.जीआरपी सूत्रों ने बताया कि यह विवाद सिर्फ कुछ स्टेशनों यथा- आसनसोल, सिउडी, सैंथिया आदि में है. बाकी के स्टेशनों में शव वाहकों के मेहताने में दो सौ रूपयों की वृद्धि हुई है.

Prabhat Khabar Digital Desk
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