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विमानों के लिए मुसीबत बन गये हैं सियार

कोलकाता: नेताजी सुभाष चंद्र बोस एयरपोर्ट में सियार विमानों और एयरपोर्ट प्रशासन के लिए मुसीबत बन गये हैं. सियार एयरपोर्ट के पास लंबी घासों के बीच छिपकर रह रहे हैं. सियारों के एयरफील्ड के आसपास रहना उड़ान की सुरक्षा के लिहाज से भी खतरनाक है. सियारों के रनवे पर आने से दुर्घटनाएं हो सकती हैं […]

कोलकाता: नेताजी सुभाष चंद्र बोस एयरपोर्ट में सियार विमानों और एयरपोर्ट प्रशासन के लिए मुसीबत बन गये हैं. सियार एयरपोर्ट के पास लंबी घासों के बीच छिपकर रह रहे हैं. सियारों के एयरफील्ड के आसपास रहना उड़ान की सुरक्षा के लिहाज से भी खतरनाक है. सियारों के रनवे पर आने से दुर्घटनाएं हो सकती हैं और विमान हादसे का शिकार हो सकता है. उड़ान भरते और उतरते समय हवाई जहाज की गति लगभग 100 किलोमीटर प्रति घंटे की होती है. ऐसे में हवाई जहाज और सियारों के बीच टकराव भी हो सकता है, जो कि खतरनाक है.

उल्लेखनीय है कि यहां पिछले 100 दिनों में दो दर्जन से अधिक बार जाल बिछाये जा चुके हैं. पर, अभी तक सिर्फ 13 सियार ही पकड़े जा चुके हैं.
एयरपोर्ट प्रशासन ने सियार के एक जोड़े पर रेडियो कॉलर भी लगाया है, ताकि उनकी हरकतों पर नजर रखी जा सके.
साथ ही सियारों को पकड़ने के लिए फ्लाइट्स का बचा खाना भी एक तरफ एकत्र किया गया है. उनके लिए कूड़े क्षेत्र का दरवाजा खुला छोड़ा गया है, ताकि वे तलाश में वहां आयें. हालांकि दरवाजा खुला छोड़ना सुरक्षा की दृष्टि से भी ठीक नहीं.
एयरपोर्ट पर सियारों की संख्या इस समय लगभग 100 से ज्यादा है और वह लगातार बढ़ रही है. सियार का एक जोड़ा एक बार में दो से चार बच्चे देता है. उनका गर्भकाल लगभग 63 दिनों का होता है.
वहीं, सियार का बच्चा एक साल में ही प्रजनन के लिए तैयार हो जाता है. प्रशासन की चिंता इन दिनों और बढ़ी हुई है, क्योंकि फरवरी से मार्च के बीच उनके प्रजनन का समय होता है और कुछ ही हफ्तों बाद यह समय आ जायेगा.

अब जाल में भी नहीं फंस रहे, काम नहीं आ रहा चारा भी
सियारों के पुनर्वासन के लिए काम कर रहे प्राकृतिक पर्यावरण और वन्य जीवन सोसाइटी (एनइडब्ल्यूएस) के विश्वजीत रॉय चौधरी ने बताया कि एयरपोर्ट में शुरुआती दिनों में जब जाल बिछाये गये थे, तब कुछ सियार जरूर पकड़े गये थे. उसके बाद जाल में सियारों के फंसने की संख्या घटती गयी. पिंजड़ों के पास कैमरे लगाये गये. कैमरे में देखा गया कि सियार पिंजरों के पास आये, लेकिन चारा देखने के बावजूद वापस लौट गये.
सियार का एक जोड़ा ही जनसंख्या बढ़ाने के लिए होता है काफी
वन्य जीवन संरक्षक शुभांकर सेन गुप्ता ने बताया कि सियार का एक जोड़ा ही जनसंख्या बढ़ाने के लिए काफी होता है. जब तक सारे सियार पकड़कर कहीं और पुनर्वासित नहीं किये जायेंगे एयरपोर्ट पर उनकी संख्या खत्म नहीं होगी.
Prabhat Khabar Digital Desk
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