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पत्थर से बनी बांसुरी की धुन लुभा रही लोगों को

Updated at : 25 Jun 2024 10:35 PM (IST)
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पत्थर से बनी बांसुरी की धुन लुभा रही लोगों को

बांकुड़ा का सुसुनिया पहाड़ एक ओर बतौर पर्यटन स्थल प्रसिद्ध है तो दूसरी ओर पत्थर को तराशकर बनायी गयी कलाकृतियों की वजह से भी इलाके की प्रसिद्धि है. सुसुनिया के एक कलाकार ने पत्थर को काटकर बांसुरी बनाने का अभूतपूर्व कार्य कर दिखाया है. लोग पत्थर की बांसुरी की सुरीली आवाज से मंत्रमुग्ध हो रहे हैं.

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प्रणव कुमार बैरागी, बांकुड़ा.

बांकुड़ा का सुसुनिया पहाड़ एक ओर बतौर पर्यटन स्थल प्रसिद्ध है तो दूसरी ओर पत्थर को तराशकर बनायी गयी कलाकृतियों की वजह से भी इलाके की प्रसिद्धि है. सुसुनिया के एक कलाकार ने पत्थर को काटकर बांसुरी बनाने का अभूतपूर्व कार्य कर दिखाया है. लोग पत्थर की बांसुरी की सुरीली आवाज से मंत्रमुग्ध हो रहे हैं. बांसुरी पर सुंदर नक्काशी की गयी है और आम बांसुरी की तरह इस स्टोन बांसुरी से भी खूबसूरत धुन बजायी जा सकती है. हालांकि यह पत्थर से बनी है. पत्थर के अंदरूनी हिस्से को बड़ी कुशलता से तराशकर बांसुरी बनायी गयी है. जिसका उपयोग मधुर धुन बजाने के लिए किया जा सकता है सुसुनिया गांव का पारंपरिक उद्योग पत्थर तराशकर कलाकृतियां बनाने का है. गांव के अधिकांश लोग विभिन्न पत्थर की मूर्तियां बनाने के काम से जुड़े हैं. पत्थर कलाकार अभीक कर्मकार ने करीब 210 दिनों तक धैर्यपूर्वक पत्थर तराश कर यह बांसुरी बनायी है. अभीक कर्मकार ने इस बांसुरी के लिए एमएसएमइ राइट्स पश्चिम बंगाल शिल्प प्रतियोगिता 2023-2024 में प्रथम पुरस्कार जीता है. साथ ही इस बांसुरी को राज्य स्तर पर भी प्रथम पुरस्कार मिल चुका है. बांकुड़ा के सुसुनिया के इस पत्थर कलाकार की बनायी अद्भुत बांसुरी देखकर सभी हैरान रह जाते हैं. पत्थर से बनी होने के बावजूद यह बांसुरी वजन में बहुत हल्की है. बांसुरी पर श्रीकृष्ण के जीवन के कई प्रसंग उकेरे गये हैं. अभीक कर्मकार ने कहा कि बांसुरी का मतलब कृष्ण होता है. इसीलिए भगवान कृष्ण के अवतार से शुरू करके कंस वध को पत्थर की बांसुरी पर चित्रित किया गया है. कलाकार खुद भी नहीं सोच पाया कि पत्थर में भी बांसुरी की ध्वनि लाना संभव है. एक तरह का प्रयोग करने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि इस बांसुरी को बजाकर धुन निकाली जा सकती है. उन्होंने यह भी बताया कि बांसुरी बनाने का कार्य शौकिया तौर पर किया था. जिसे बनाने में छह से आठ महीने लग गये . कार्य कठिन था. बांसुरी बजाने वाले कलाकार पत्थर की बांसुरी से अच्छी धुन निकाल लेते हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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