समाज में पारंपरिक त्योहार हैं, तो स्कूली बच्चों के आचरण में भी कमोबेश झलकेंगे

Updated at : 24 Aug 2024 9:39 PM (IST)
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समाज में पारंपरिक त्योहार हैं, तो स्कूली बच्चों के आचरण में भी कमोबेश झलकेंगे

रक्षाबंधन को हाथों में रचायी मेहंदी के कारण कक्षा नौ की एक छात्रा के सेंट मेरी गोरेटी गर्ल्स हाइस्कूल की प्राचार्या से बुरी तरह पिटने के मामले की चहुंओर कड़ी निंदा हो रही है. पीड़ित छात्रा के समर्थन में लोग मुखर होने लगे हैं. इस मुद्दे पर ज्यादातर लोगों की आम राय है कि यदि पारंपरिक त्योहार हैं, तो उनकी झलक व्यक्ति के पारिवारिक व सामाजिक जीवन में भी कमोबेश मिलेगी और समाज से स्कूल या शिक्षा संस्थान भी परे नहीं हैं.

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आसनसोल

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रक्षाबंधन को हाथों में रचायी मेहंदी के कारण कक्षा नौ की एक छात्रा के सेंट मेरी गोरेटी गर्ल्स हाइस्कूल की प्राचार्या से बुरी तरह पिटने के मामले की चहुंओर कड़ी निंदा हो रही है. पीड़ित छात्रा के समर्थन में लोग मुखर होने लगे हैं. इस मुद्दे पर ज्यादातर लोगों की आम राय है कि यदि पारंपरिक त्योहार हैं, तो उनकी झलक व्यक्ति के पारिवारिक व सामाजिक जीवन में भी कमोबेश मिलेगी और समाज से स्कूल या शिक्षा संस्थान भी परे नहीं हैं. इसलिए आरोपी प्राचार्या के आचरण को को किसी भी हाल में उचित या जायज नहीं ठहराया जा सकता. स्कूल में प्राचार्या से छात्रा को मिले दंड को सनातनियों की परंपरा पर ठेस बताया जा रहा है. यह विद्यालय एक क्रिश्चियन अल्पसंख्यक संस्थान होने के बावजूद यहां की अधिकतर छात्राएं हिंदू घरों से आती हैं. ऐसे में किसी विशेष उपलक्ष्य पर तिलक लगाने, हाथ में मौली बांधने या मेहंदी लगाने पर प्राचार्य को इतनी चिढ़ हो गयी कि छात्रा को बुरी तरह पीट दिया. इस मुद्दे को लेकर लोगों में उबाल है.

प्राचार्या का कृत्य भारतीय संस्कृति के प्रतिकूल : नीलांजना सेनगुप्ता

रूपनारायणपुर लायन्स क्लब की अध्यक्ष व शिक्षिका नीलांजना सेनगुप्ता ने कहा कि आसनसोल के एक क्रिश्चियन स्कूल की प्राचार्या का रक्षाबंधन के बाद हाथों में मेहंदी लगे होने के कारण नौवीं कक्षा की छात्रा को शारीरिक व मानसिक दंड दिया जाना सरासर आपराधिक कृत्य है और यह भारतीय संस्कृति के प्रतिकूल है. इस दंड का कारण ना तो अनुशासनात्मक है और ना ही पठन-पाठन संबंधी, अनुशासनात्मक व पठन-पाठन संबंधी मामला होने पर यह निजी मामला हो सकता था, लेकिन यह तो पूरी तरह से सामुदायिक मामला है. ईसाई मिशनरी संस्थान की इस विद्यालय की प्राचार्या के सांस्कृतिक-सामुदायिक विद्वेष के इस मामले का पुरजोर विरोध होना चाहिए.

घटना से स्कूल ही नहीं, पूरा शिल्पांचल शर्मसार : विनय कुमार सिंह

आइसीएमएल संस्था के चीफ कॉर्डिनेटर विनय कुमार सिंह ने कहा कि यह बहुत ही दुखद और शर्मनाक घटना है. विद्यालय प्रबंधन और प्राचार्या को अपने एक छात्रा के साथ इस तरह की कारवाई करने से पहले गम्भीरता से सोचना चाहिए था. उसे मौखिक रूप से या लिखित रूप से समझा सकती थी लेकिन इस तरह से बर्बरतापूर्वक कारवाई उनके मानसिक दिवालियापन को दर्शाता है. भविष्य में ऐसी ओछी हरकत से उन्हें बचने की जरूरत है. विद्यालय प्रबंधन को समाजिक समरसता में विश्वास रखने की जरूरत है और पठन पाठन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए ताकि उनके विद्यालय का नाम हो. यह एक बेहद दुखद घटना है जिससे विद्यालय ही नहीं पूरा शिल्पांचल शर्मशार हुआ है.

स्कूल की प्राचार्या के खिलाफ हो उचित कार्रवाई : अवधेश कुमार

ईस्टर्न रेलवे हाइ स्कूल आसनसोल के सेवानिवृत शिक्षक अवधेश कुमार अवधेश ने कहा कि संत मेरी गोरेटी गर्ल्स हाई स्कूल में मेहंदी लगाने को लेकर जिस प्रकार छात्रा की पिटाई की गई है, इसकी निंदा करता हूं. उस छात्रा ने ऐसा कोई बड़ा अपराध नहीं किया था. रक्षा बंधन पर मेहंदी लगायी थी और वही लेकर स्कूल गयी. स्कूल प्रबंधन यदि इसे अनुशासन भंग मानता है तो उनके माता-पिता को बुलाकर उनको चेतावनी देनी चाहिए थी. किसी भी स्कूल का यही नियम है. छात्रा को समझना चाहिए था. लेकिन छात्रा की पिटाई किये जाने से उसकी मानसिक स्थिति पर बुरा असर पड़ा है. प्राचार्या के खिलाफ उचित कार्रवाई होनी चाहिए.

हमारे स्कूल में भी मेहंदी के साथ आती हैं बच्चियां : सत्यप्रकाश पंडित

आगा बेग म्यूनिसिपल हाइस्कूल के शिक्षक सत्यप्रकाश पंडित ने बताया कि मेहंदी लगाने के कारण छात्रा की पिटाई की गयी है, यह निंदनीय है. शिक्षक ने गलत आचरण अख्तियार किया है. छात्रा मेहंदी लगा ही ली थी तो कोई बहुत बड़ा अपराध नहीं है. हमारे पर्व त्यौहार में परिवार की बच्चियां सृंगार करती हैं. सावन के समय राखी में मेहंदी लगाना एक बहुत ही प्राचीन रस्म है. अगर छात्रा ने मेहंदी लगा लिया तो शिक्षक को उससे अच्छे से बात करके समझना चाहिए था. उनके माता-पिता को बुलाकर बताना चाहिए था. मगर अचानक उसकी पिटाई कर दी. यह बहुत ही बड़ी निंदा करने वाली बात है. इस पर शिक्षक के ऊपर कार्रवाई होनी चाहिए. मैं एक शिक्षक हूं. हमारे स्कूल में भी रक्षा बंधन पर बच्चियों ने मेहंदी लगाया था.

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