जल्द जांच पूरी नहीं हुई, तो सीबीआइ के खिलाफ भी किया जायेगा जोरदार आंदोलन : अग्निमित्रा

Updated at : 27 Aug 2024 1:42 AM (IST)
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जल्द जांच पूरी नहीं हुई, तो सीबीआइ के खिलाफ भी किया जायेगा जोरदार आंदोलन : अग्निमित्रा

आसनसोल थाना घेराव के दौरान विधायक अग्निमित्रा पाल व पुलिसकर्मियों के बीच हुई बकझक

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आसनसोल. आसनसोल साउथ की विधायक सह भाजपा की प्रदेश महासचिव अग्निमित्रा पाल ने कहा कि राज्य पुलिस ने सुनियोजित तरीके से आरजी कर में सबूतों को नष्ट किया. राज्य पुलिस के कारण ही सीबीआइ की जांच प्रक्रिया में देरी हो रही है. चिकित्सक की हत्या को लेकर सीबीआइ अपनी जांच जल्द पूरी कर आरोपियों को सामने नहीं लाती है तो सीबीआइ के खिलाफ भी आंदोलन होगा और सीबीआइ से भी वही सवाल पूछे जायेंगे जो राज्य सरकार की पुलिस से पूछे जा रहे हैं. आरजी कर की घटना को लेकर सोमवार को विधायक श्रीमती पाल के नेतृत्व में आसनसोल थाना घेराव के दौरान उन्होंने ये बाते कहीं. मौके पर जिलाध्यक्ष बप्पा चटर्जी सहित भारी संख्या में नेता व कार्यकर्ता मौजूद थे. गौरतलब है कि अरजी कर की घटना को लेकर शिल्पांचल में विभिन्न संगठनों द्वारा लगातार आंदोलन जारी है. इसी कड़ी में सोमवार को विधायक श्रीमती पाल के नेतृत्व में आसनसोल साउथ थाने के घेराव का कार्यक्रम था. थाने के समक्ष पहुंचने के पहले ही पुलिस ने विधायक को उनके समर्थकों के साथ रोक दिया. जिसके उपरांत थाने के निकट आसनसोल नगर निगम कार्यालय के पास सड़क पर श्रीमती पाल धरने पर बैठ गयीं. पुलिस के खिलाफ नारेबाजी होती रही. थाना प्रभारी के साथ विधायक की काफी देर तक बहस हुई. प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस्तीफे की मांग पर सड़क जाम कर जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया. श्रीमती पाल ने आरजी कर अस्पताल के प्रिंसिपल के ऊपर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अस्पताल में उनके द्वारा ऐसे कई घोटालों का राज महिला चिकित्सक को पता चल गया था. यही कारण है कि एक सोची-समझी साजिश के तहत पहले तो उसके साथ आरोपियों ने रेप किया और फिर उसकी बेरहमी से हत्या भी कर दी. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार व उनकी पुलिस पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उन घटना के बाद क्राइम सीन को रातों- रात सुनियोजित तरीके से नष्ट भी कर दिया गया. घटना को आत्महत्या का रूप देने के लिए क्राइम सीन वाली जगह को बदल भी दिया गया. इस पूरी घटना में ममता सरकार और उनकी पुलिस ने आरोपियों का कहीं ना कहीं साथ देने का काम किया है. यही कारण है कि मामले की जांच के लिए सात दिनों का समय मांगा और इस बीच उन्होंने घटनास्थल पर मौजूद सारे साक्ष्य मिटा दिये. यहीं नहीं आनन -फानन में मृतका के शव का अंतिम संस्कार भी करवा दिया गया. अंतिम संस्कार के लिए पहले से लाइन में लगे दो शवों को हटाकर चिकित्सक के शव का दाह किया गया. अगर जल्द से जल्द सीबीआइ ने मामले की जांच पूरी नहीं की तो उनसे भी वही सवाल किया जायेगा जो ममता सरकार व उनकी पुलिस से किया जा रहा है. साथ ही न्याय के लिए जोरदार आंदोलन होगा.

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