चहुंओर खुली खदानों से रानीगंज शहर के अस्तित्व पर खतरा, नहीं थमी कोशिश तो होगा बड़ा आंदोलन

ऐतिहासिक शहर रानीगंज के अस्तित्व को बचाने के लिए ''रानीगंज बचाओ मंच'' और ''रानीगंज सिटीजंस फोरम'' आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं.
रानीगंज.
ऐतिहासिक शहर रानीगंज के अस्तित्व को बचाने के लिए ””रानीगंज बचाओ मंच”” और ””रानीगंज सिटीजंस फोरम”” आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं. मंगलवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन के माध्यम से मंच के पदाधिकारियों ने प्रशासन और ईसीएल प्रबंधन के खिलाफ कड़ा रोष जताया. चेतावनी देते हुए दो-टूक कह दिया कि यदि ओसीपी(ओपन कास्ट प्रोजेक्ट) यानी खुली खदानें बना कर शहर को उजाड़ने की कोशिश नहीं रोकी गयी, तो आंदोलन को और उग्र किया जायेगा.”विस्थापन नहीं, अपनाएं पारंपरिक खनन”
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए मंच के प्रतिनिधि प्रदीप नंदी और संयुक्त संयोजक गौतम घटक ने कहा कि जिस तरह से शहर के चारों ओर ओसीपी बनायी जा रही है, उससे रानीगंज के अस्तित्व पर सीधा खतरा पैदा हो गया है. उन्होंने मांग की कि प्रशासन ओसीपी की जगह पारंपरिक खदानों को प्राथमिकता दे, ताकि लोगों को अपनी जमीन से विस्थापित ना होना पड़े.उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन से बार-बार गुहार लगाने के बावजूद उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है. इस अवसर पर राजेन्द्र प्रसाद खेतान, विद्युत पांडेय, श्रवण तोदी,बलराम रॉय सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे।
19 मार्च को मारवाड़ी रिलीफ सोसाइटी के सामने धरना
अपनी मांगों के समर्थन में आगामी 19 मार्च 2026 (गुरुवार) को मारवाड़ी रिलीफ सोसाइटी अस्पताल (नेताजी सुभाष रोड) के निकट सुबह 10:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक एक विशाल धरना प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा. मंच ने शहर के व्यापारियों, नागरिकों व अन्य लोगों से इस ””अस्तित्व की लड़ाई”” में शामिल होने का आह्वान किया है.
मंच की मुख्य मांगों में ओसीपी के जरिए रानीगंज शहर और आस-पास के गांवों को ध्वस्त करने की ””साजिश”” को तुरंत रोकना, रानीगंज को धंसान क्षेत्र घोषित कर घरों की मरम्मत व निर्माण कार्यों पर रोक को हटाना आदि शामिल हैं. इसीएल प्रबंधन से मांग की गयी है कि कोयला निकालने के बाद ””पिट माइनिंग सिस्टम”” के तहत बालू भर कर जमीन सुरक्षित की जाये.मंच के अनुसार, प्रशासनिक अधिकारी केवल मौखिक सहानुभूति दे रहे हैं, लेकिन धरातल पर सुरक्षा का लिखित आश्वासन नहीं मिल रहा है. राजेंद्र प्रसाद खेतान ने कहा कि यह लड़ाई किसी राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि रानीगंज के हर उस नागरिक की है, जो अपनी जड़ों को उजड़ते हुए नहीं देखना चाहता.
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