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एडीडीए ने माना, रानीगंज में बिल्डिंग प्लान पर पाबंदी से हो रहीं दिक्कतें, पर ऐसा करना मजबूरी

गूंज. रानीगंज क्लॉथ मर्चेंट्स संघ की सालाना आम सभा में छाया रहा कंस्ट्रक्शन के नक्शे पर पाबंदी का मुद्दा

एडीडीए चेयरमैन ने दिया सुझाव, किसी प्लान पर एनआइटी की लगी मुहर, तो पास करने पर होगा विचार

बुनियादी मसलों पर एडीडीए के चेयरमैन को कपड़ा व्यापारियों ने सौंपा ज्ञापन

शहर के आर्थिक विकास और ””रानीगंज बचाओ”” के मुद्दे पर हुई गहन मंत्रणारानीगंज. रानीगंज लायंस क्लब सभागार में शुक्रवार को रानीगंज क्लॉथ मर्चेंट्स एसोसिएशन की 35वीं वार्षिक आम सभा का आयोजन किया गया. इस सभा में शहर के व्यापारियों ने रानीगंज में जर्जर होती बुनियादी संरचना और व्यापारिक बाधाओं को लेकर आसनसोल-दुर्गापुर विकास प्राधिकरण(एडीडीए) के अध्यक्ष कवि दत्ता के समक्ष अपनी चिंताओं का पिटारा खोल दिया.

कार्यक्रम में मुख्य रूप से निर्माण कार्य के वास्ते रानीगंज में भवन निर्माण का नक्शा पास करने पर लगे प्रतिबंध का मुद्दा छाया रहा. इसे लेकर दिये गये ज्ञापन को आसनसोल-दुर्गापुर विकास प्राधिकरण (एडीडी) के चेयरमैन कवि दत्ता ने स्वीकार कर लिया. फिर मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद एडीडीए चेयरमैन ने बिल्डिंग प्लान पर लगी पाबंदी के मामले में गेंद केंद्र सरकार के पाले में डाल दी. हालांकि उन्होंने माना कि रानीगंज में ट्रैफिक व इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थिति चिंताजनक है. बिल्डिंग प्लान या नक्शे पर पाबंदी को लेकर उन्होंने स्पष्टीकरण देते हुए कहा, “यह निर्णय केंद्र सरकार के निर्देशों के तहत लिया गया है. इसीएल से उपलब्ध कराये गये नक्शे में कई क्षेत्रों को धंसान प्रभावित बताया गया है. ऐसे में किसी भी हादसे या अनहोनी की जिम्मेदारी के डर से अनुमति देना संभव नहीं है.” अलबत्ता, उन्होंने विकल्प सुझाया कि यदि दुर्गापुर स्थित एनआइटी किसी निर्माण प्लान को सुरक्षित घोषित कर दे, तो उस पर एडीडीए विचार कर सकता है.

निर्माण पर रोक से ठप पड़ा व्यापार

एसोसिएशन और रानीगंज चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष रोहित खेतान ने मजबूती से पक्ष रखते हुए कहा कि पिछले एक वर्ष से भू-धंसान का हवाला देकर 300 मीटर के दायरे में नए निर्माण पर रोक लगा दी गयी है. इससे न केवल नये व्यावसायिक भवन बनना बंद हो गये हैं, बल्कि पुराने भवनों का मरम्मत कार्य भी प्रभावित हो रहा है. उन्होंने ‘रानीगंज बचाओ’ के नारे को दोहराते हुए कहा कि यदि यह प्रतिबंध जारी रहा, तो ऐतिहासिक-व्यापारिक शहर रानीगंज की आर्थिक स्थिति पूरी तरह चरमरा जायेगी.

बाइपास और पार्किंग के लिए सीएसआर फंड पर जोर

संगठन के पूर्व अध्यक्ष सलिल सिन्हा द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन में रानीसायर-गिरजापाड़ा बाइपास की मरम्मत और शहर में तीन पार्किंग जोन बनाने की मांग की गई. इस पर कवि दत्ता ने सुझाव दिया कि चूंकि उस सड़क पर ईसीएल और बालू की गाड़ियां अधिक चलती हैं, इसलिए ईसीएल को अपने सीएसआर फंड से सड़क चौड़ीकरण के लिए राशि देनी चाहिए. पार्किंग के मुद्दे पर उन्होंने इसे पीडब्ल्यूडी का कार्यक्षेत्र बताया, हालांकि उन्होंने इस दिशा में मध्यस्थता का आश्वासन दिया.

मेधावी विद्यार्थियों का हुआ सम्मान

सभा की अध्यक्षता संदीप सोमानी ने की. इस दौरान व्यापारियों ने शहरी सौंदर्यीकरण, ठोस वर्ज्य प्रबंधन और शहर के प्रवेश-द्वारों के निर्माण की भी मांग उठायी. कार्यक्रम में पूर्व अध्यक्ष अनूप सराफ, महेश मोदी और वरिष्ठ समाजसेवी आरपी खेतान ने भी विचार रखे. इस अवसर पर एसोसिएशन की ओर से मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन भी किया गया.

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