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प्रभात खबर ने उदंत मार्तंड की परंपरा बढ़ायी आगे मिशनरी पत्रकारिता के दौर की यादें हुईं ताजा : प्रोफसर अमरनाथ

Updated at : 30 May 2025 11:24 PM (IST)
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प्रभात खबर ने उदंत मार्तंड की परंपरा बढ़ायी आगे मिशनरी पत्रकारिता के दौर की यादें हुईं ताजा : प्रोफसर अमरनाथ

डब्ल्यूबीसीएस. प्रभात खबर की मुहिम से मिली सफलता के बाद अखबार की हो रही सराहना

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डब्ल्यूबीसीएस की मुहिम की सफलता ने उदंत मार्तंड के 200 वर्ष पूरे होने की खुशी को कई गुना बढ़ा दिया आसनसोल. डब्ल्यूबीसीएस (एग्जीक्यूटिव) परीक्षा में हिंदी, उर्दू और संताली भाषा को बहाल रखने का सरकार द्वारा निर्देश जारी होते ही प्रभात खबर अखबार को बधाईयां मिलनी शुरू हो गयी. प्रभात खबर अखबार ने इस मुद्दे को लेकर मुहिम छेड़ी और यह जनांदोलन का रूप लिया. काफी उतार चढ़ाव के बाद आखिरकार प्रभात खबर के मुहिम को सफलता मिली, 28 मई को नवान्न मीडिया ग्रुप में यह संदेश जारी किया गया कि डब्ल्यूबीसीएस परीक्षा को लेकर जो दो विज्ञप्तियां जारी हुई थी, उसे स्थगित किया जाता है और पुरानी सिलेबस व पद्धति को बहाल किया जा रहा है. इसकी सूचना लोगों तक पहुंचते ही सभी ने एक स्वर में प्रभात खबर की सराहना की.

हिंदुस्तानियों के हित की इस लड़ाई का नेतृत्व किया प्रभात खबर ने

कलकत्ता विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अमरनाथ ने कहा कि हम देश के पहले हिन्दी पत्र ””””””””उदंत मार्तंड”””””””” के प्रकाशन के दो सौ वर्ष पूरे किये, यह पत्र भी कोलकाता से ही प्रकाशित हुआ था. इस खुशी के बीच डब्ल्यूबीसीएस के इस समाचार ने हमारी खुशियां कई गुना बढ़ा दी. ””””””””उदंत मार्तंड”””””””” “हिन्दुस्तानियों के हित हेत ” में निकला था. हिन्दुस्तानियों के हित की इस लड़ाई का नेतृत्व करके ””””””””प्रभात खबर”””””””” ने ””””””””उदंत मार्तंड”””””””” की परंपरा को आगे बढ़ाया है और मिशनरी पत्रकारिता के दौर का स्मरण दिलाया है. हिन्दी, उर्दू और संताली भाषियों की जितनी बड़ी संख्या पश्चिम बंगाल में है, उतनी किसी भी दूसरे अहिन्दी भाषी प्रान्त में नहीं है. यहां हजारों की संख्या में हिन्दी-उर्दू माध्यम के विद्यालय हैं, कालेज हैं और विश्वविद्यालय भी हैं. सिविल सर्विस की परीक्षाओं से हिन्दी, उर्दू और संताली माध्यम की सुविधा सरकार द्वारा छीन लेने से इन शिक्षण संस्थाओं से पढ़कर निकलने वाले हजारों क्या, लाखों हिन्दी-उर्दू भाषी बंगाल के निवासी विद्यार्थियों का भविष्य अंधकार में हो गया था. अब उन्हें पहले की तरह बंगाल की सिविल सर्विस की परीक्षाओं में बैठने का अवसर मिलेगा और वे बंगाल के अन्य नागरिकों की तरह अपनत्व और समभाव का अनुभव करेंगे तथा पश्चिम बंगाल के विकास में अपनी योग्यता और क्षमतानुसार योगदान देंगे. मैं मुख्यमंत्री माननीया ममता बनर्जी को इसके लिए हृदय से आभार व्यक्त करता हूं और इस आन्दोलन में नेतृत्वकारी भूमिका निभाने के लिए प्रभात खबर को धन्यवाद देता हूं.

प्रभात खबर बना उर्दू, संताली व हिंदीभाषियों की आवाज़, बहुत-बहुत बधाई : सृंजय

देश के प्रख्यात साहित्यकार सृंजय ने कहा कि डब्ल्यूबीसीएस के मुद्दे पर प्रभात खबर ने जिस तरह लोगों को गोलबंद किया, वह काबिले तारीफ है. प्रभात खबर उर्दू, संताली और हिंदीभाषियों का आवाज बना और अंततः हमलोगों का संघर्ष सफल हुआ. जिसके कारण प्रभात खबर को दिल से बधाई. हमलोग नितांत न्यायसंगत और जनतांत्रिक मांग कर रहे थे. हम कहीं से भी कोई अनुचित या अवांछित मांग नहीं कर रहे थे किसी भी राष्ट्र, राज्य और समाज की सर्वांगीण उन्नति तभी होती है, जब वहां के निवासियों के साथ भाषा, क्षेत्र, जाति, धर्म, नस्ल, लिंग आदि को लेकर कोई भेदभाव न हो. इसलिए भी यह सफलता न केवल हिन्दीभाषी, उर्दूभाषी और संथालीभाषी के हित में है, अपितु यह पूरे पश्चिम बंगाल राज्य के हित में भी है.हिन्दी भाषा का एक साहित्यकार होने के नाते मुझे व्यक्तिगत रूप से भी अधिक प्रसन्नता हो रही है कि हमारे सामूहिक प्रयास का असर हुआ और पश्चिम बंगाल की माननीया मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सिविल सेवा परीक्षा की पुरानी स्थिति को फिर से बहाल कर दिया. जिसके लिए उनका आभार.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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GANESH MAHTO

लेखक के बारे में

By GANESH MAHTO

GANESH MAHTO is a contributor at Prabhat Khabar.

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