सुफल बांग्ला स्टॉल में बीरभूम के 15 किसानों के आलू

Updated at : 25 Jan 2025 10:30 PM (IST)
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सुफल बांग्ला स्टॉल में बीरभूम के 15 किसानों के आलू

थोक बाजार में किसानों को उनकी फसल की वाजिब कीमत नहीं मिल रही है. इसलिए किसानों से आलू खरीद राज्य सरकार सुफल बांग्ला स्टॉल में भेज रही है.

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राज्य सरकार की पहल से आलू किसानों को राहत का संकेत किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाने की पहल बीरभूम. राज्य सरकार का कृषि प्रेम का एक और नमूना बीरभूम जिले में देखने को मिला. जिले के 15 किसानों से आलू खरीद कर राज्य सरकार की ओर से कोलकाता के सुफल बांग्ला स्टॉल में भेजा जा रहा है. थोक बाजार में किसानों को उनकी फसल की वाजिब कीमत नहीं मिल रही है. इसलिए किसानों से आलू खरीद राज्य सरकार सुफल बांग्ला स्टॉल में भेज रही है. बंगला कृषि विपणन विभाग आलू खरीद रहा है. बीरभूम के 15 किसानों से खरीदे गये सात टन आलू को कोलकाता और जिले के विभिन्न सुफल बांग्ला स्टॉल को भेजा गया है. इससे जिले के आलू किसानों के चेहरे खिले हुए हैं. थोक बाजार में आलू के किसानों को सात रुपये प्रति किलो मिल रहे थे. नतीजतन, किसानों को नुकसान हो रहा था. लेकिन सुफल बांग्ला स्टॉल के लिए किसानों से 10 रुपये 50 पैसे प्रति किलो की दर से आलू खरीदा जा रहा है. किसानों को लाभ होने पर ये लोग काफी खुश हैं. कीमत कुछ हद तक बढ़ गयी है, प्रति किलो 10 रुपये 50 पैस मिल रहे हैं. बीरभूमजिले में आलू की खेती के मुख्य केंद्रों में रामनगर, साटपलशा, कोटासुर, चालती बागान, दुबराजपुर, सैंथिया के दरियापुर और होरीएका क्षेत्र हैं. हालांकि, पिछले कुछ महीनों में सीमा पर आलू का निर्यात बंद होने से स्थानीय किसानों को काफी दिक्कतों हो रही थीं विशेष रूप से झारखंड सीमा के माध्यम से आलू को दूसरे राज्यों में भेजना बंद कर दिया गया था. बीरभूम में आलू की सीधी बिक्री का अवसर कम हो गया था. फलस्वरूप, बाजार में आलू की कीमतें गिरती रहीं और अपनी उपज को बहुत कम कीमतों पर बेचने को किसान मजबूर हुए. लेकिन सरकारी पहल के बाद बाजार में आलू की कीमतें कुछ हद तक स्थिर हो गयी हैं. इस बीच, किसान अपने उत्पादित आलू को थोक बाजार में ऊंची कीमत पर बेचने में भी समर्थ हैं. बीरभूम जिला आलू के व्यापार सचिव दीनबंधु मंडल ने कहा, सरकार की पहल निश्चित रूप से सराहनीय है, लेकिन यह कितना प्रभावी होगा, सटीक कीमत के आधार पर किसानों को भुगतान किया जा रहा है. यदि सीमा पर आलू का निर्यात फिर से शुरू होता है, तो किसानों को बेहतर कीमतें मिल सकती हैं. आलू किसान हृदय मंडल ने कहा, मैं सरकार की पहल का धन्यवाद करता हूं. यदि हम अधिक आलू खरीदते हैं, तो हम अधिक लाभान्वित होंगे. एक अन्य किसान पूर्णचंद्र धर ने कहा, “मैं आलू को लेकर बहुत चिंतित था. बंगाल में अपने आलू की सही कीमत नहीं मिलने को लेकर मायूस हो गया था.”

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