Iran Rice Exports: ईरान में जारी नागरिक अशांति का असर अब भारत के बासमती चावल निर्यात पर साफ तौर पर दिखाई देने लगा है. भारत के निर्यातकों में इस बात को लेकर हड़कंप मचा हुआ है कि घरेलू बाजार में बासमती चावल की कीमत नहीं मिल रही है और ईरान की अशांति की वजह से उद्योग संगठन इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (आईआरईएफ) के अनुसार, हालात बिगड़ने से ईरानी बाजार में भुगतान में देरी, ऑर्डर रुकने और व्यापारिक अनिश्चितता बढ़ गई है. इसका नतीजा यह हुआ है कि भारत से ईरान जाने वाली खेपें प्रभावित हुई हैं और घरेलू मंडियों में कीमतों पर दबाव बना है. आईआरईएफ ने निर्यातकों को सलाह दी है कि वे ईरान से जुड़े अनुबंधों पर दोबारा विचार करें और भुगतान के सुरक्षित तरीकों को प्राथमिकता दें.
भुगतान में देरी और अनुबंधों पर संकट
उद्योग संगठन का कहना है कि ईरान में आंतरिक अस्थिरता के कारण बैंकिंग चैनल और व्यापारिक माध्यम बाधित हो रहे हैं. कई आयातकों ने मौजूदा प्रतिबद्धताओं को पूरा करने और समय पर भुगतान करने में असमर्थता जताई है. इससे भारतीय निर्यातकों के लिए नकदी प्रवाह और जोखिम प्रबंधन बड़ी चुनौती बनता जा रहा है. आईआरईएफ ने स्पष्ट तौर पर निर्यातकों से आग्रह किया है कि वे ईरानी बाजार के लिए जरूरत से ज्यादा स्टॉक जमा करने से बचें और नए सौदों में विशेष सावधानी बरतें.
ईरान अब भी बड़ा बाजार, लेकिन जोखिम बढ़ा
व्यापारिक आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 के अप्रैल से नवंबर के बीच भारत ने ईरान को 468.10 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य का बासमती चावल निर्यात किया, जिसकी मात्रा लगभग 5.99 लाख टन रही. ईरान ऐतिहासिक रूप से भारत का सबसे बड़ा बासमती बाजार रहा है, लेकिन मौजूदा हालात के चलते चालू वित्त वर्ष में ऑर्डर फ्लो, भुगतान चक्र और कुल निर्यात पर दबाव बढ़ता जा रहा है.
घरेलू मंडियों में गिरती कीमतें बनी चिंता
ईरान संकट का असर अब घरेलू बाजार में भी दिखने लगा है। पिछले एक सप्ताह में ही बासमती की प्रमुख किस्मों की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है. यह गिरावट खरीदारों की झिझक, निर्यात अनुबंधों में देरी और जोखिम बढ़ने की आशंका को दर्शाती है. बासमती 1121 किस्म की कीमत 85 रुपये प्रति किलो से घटकर 80 रुपये प्रति किलो रह गई है. वहीं, 1509 और 1718 किस्मों के भाव 70 रुपये से गिरकर 65 रुपये प्रति किलो तक आ गए हैं. इससे किसानों और व्यापारियों दोनों की चिंता बढ़ गई है.
आईआरईएफ की चेतावनी: अत्यधिक सतर्कता जरूरी
आईआरईएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रेम गर्ग ने कहा, “ईरान ऐतिहासिक रूप से भारतीय बासमती का प्रमुख बाजार रहा है, लेकिन मौजूदा आंतरिक अशांति ने व्यापार माध्यमों को बाधित किया है, भुगतान में देरी की है और खरीदारों के भरोसे को प्रभावित किया है.” उन्होंने निर्यातकों को ऋण जोखिम और डिलीवरी समयसीमा को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी.
वैकल्पिक बाजारों की ओर रुख करने की अपील
आईआरईएफ ने परामर्श जारी करते हुए निर्यातकों और व्यापारियों से पश्चिम एशिया के अन्य देशों, अफ्रीका और यूरोप के वैकल्पिक बाजारों की ओर रुख करने का आग्रह किया है. संगठन का कहना है कि अगर ईरान में यह मंदी लंबी चली, तो भारतीय बासमती उद्योग को नए बाजारों में मजबूती बनानी होगी. प्रेम गर्ग ने कहा, “हम चेतावनी नहीं दे रहे, बल्कि सावधानी बरतने का आग्रह कर रहे हैं. भू-राजनीतिक अस्थिरता के दौर में व्यापार सबसे पहले प्रभावित होता है. निर्यातकों और किसानों दोनों की सुरक्षा के लिए संतुलित रणनीति जरूरी है.”
अमेरिकी शुल्क भी बढ़ा रहे चिंता
आईआरईएफ ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया टिप्पणियों पर भी चिंता जताई है, जिनमें ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाए जाने का संकेत दिया गया है. संगठन ने बताया कि अमेरिका पहले ही भारतीय चावल पर शुल्क 10% से बढ़ाकर 50% कर चुका है. इसके बावजूद अमेरिका को भारत का चावल निर्यात स्थिर बना हुआ है. अप्रैल-नवंबर 2025-26 के दौरान अमेरिका को 2,40,518 टन बासमती और गैर-बासमती चावल का निर्यात हुआ, जबकि पूरे 2024-25 में यह आंकड़ा 2,35,554 टन था.
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आगे और बढ़ सकती है अस्थिरता
आईआरईएफ का कहना है कि यह स्पष्ट नहीं है कि प्रस्तावित 25% शुल्क मौजूदा शुल्क के अतिरिक्त होगा या नहीं. हालांकि, संगठन का मानना है कि भारतीय बासमती की वैश्विक मांग मजबूत है. इसलिए शुल्क बढ़ने पर भी निर्यात पर बहुत बड़ा असर नहीं पड़ेगा. लेकिन, ईरान में जारी घटनाक्रम ज्यादा चिंताजनक हैं. आने वाले हफ्तों में कीमतों, नकदी प्रवाह और व्यापारिक माहौल में और अधिक अस्थिरता देखने को मिल सकती है.
भाषा इनपुट के साथ
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