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अवैध निर्माण है बड़ा, पर जुर्माना चाहिए छोटा

Updated at : 01 Aug 2025 11:39 PM (IST)
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अवैध निर्माण है बड़ा, पर जुर्माना चाहिए छोटा

हाइकोर्ट की सख्ती के बाद रानीगंज-जामुड़िया में कारखानों के लिए अवैध निर्माण का मामला गरमाया

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रानीगंज. जामुड़िया और रानीगंज के औद्योगिक क्षेत्रों में कारखानों के लिए अवैध निर्माण का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है. एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी अवैध निर्माण को ना तो तोड़ा गया है – ना ही जुर्माना वसूला गया है. हालांकि 15 दिनों पहले जामुड़िया में दो कारखानों में अवैध निर्माण को तोड़ने पहुंची निगम टीम को वहां के मालिकों ने नाममात्र का जुर्माना देकर बैरंग लौटा दिया. वहीं, मामले में हाल ही में कलकत्ता हाइकोर्ट के जज गौरांग कांत ने आसनसोल नगर निगम पर तल्ख टिप्पणी करते हुए प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है.

200 करोड़ से ज्यादा का जुर्माना, पर कार्रवाई शून्य

आसनसोल नगर निगम ने इन औद्योगिक क्षेत्रों में कई कारखानों पर अवैध निर्माण के आरोप लगाते हुए 200 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया था. पर एक साल बाद भी ना तो जुर्माना अदा किया- ना ही गैरकानूनी निर्माण तोड़ा गया. इसे लेकर हाइकोर्ट ने सवाल उठाया है कि क्या जुर्माना अदा कर देने मात्र से कोई अवैध निर्माण वैध हो जायेगा?

जिलाध्यक्ष व चेयरमैन के साथ कारखाने के मालिकों की बैठक

गुरुवार शाम को रानीगंज के स्पोटर्स असेंबली हॉल में जामुड़िया और रानीगंज के 17 कारखाना मालिकों व निदेशकों के साथ एक बैठक हुई. इसमें पांडवेश्वर के विधायक-सह-पश्चिम बर्दवान तृणमूल कांग्रेस के जिलाध्यक्ष नरेंद्रनाथ चक्रवर्ती, जामुड़िया के विधायक हरेराम सिंह और आसनसोल दुर्गापुर विकास प्राधिकरण (एडीडीए) के चेयरमैन कवि दत्ता के साथ कारखाना मालिकों में राजेंद्र प्रसाद चौधरी, गोपाल अग्रवाल, पवन अग्रवाल, रोहित खेतान, शिवकुमार डालमिया, निरंजन गौरीसरिया, शिव कुमार डालमिया आदि उपस्थित थे. हालांकि इस बैठक में रानीगंज के विधायक तथा एडीडीए के पूर्व चेयरमैन तापस बनर्जी मौजूद नहीं थे. यह मीटिंग पूरी तरह से गोपनीय थी. उद्यमियों ने दोनों विधायकों व एडीडीए के चेयरमैन से गुहार लगायी कि जैसे नगर निगम ने अवैध निर्माण पर 2000 वर्गफीट के हिसाब से जुर्माना लगाया, वो उनके लिए देना संभव नहीं है. एक तो वैसे ही फिलहाल लोहे का व्यापार मंदा चल रहा है, ऊपर से इतने भारी जुर्माने से उनके लिए व्यापार चलाना मुश्किल हो गया है. लिहाजा उन्होंने जुर्माने में रियायत मांगी थी. जिलाध्यक्ष व चेयरमैन ने इस बाबत मेयर के साथ बैठक कर उचित फैसला करने का भरोसा दिया.

सूत्रों की मानें, तो जामुड़िया के एक कारखाने में अवैध निर्माण पर निगम ने 98 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है.

आगे की राह

इस पूरे घटनाक्रम ने आसनसोल नगर निगम की कार्य-प्रणाली पर सवाल उठा दिये हैं. एक ओर, हाइकोर्ट का सख्त आदेश है और दूसरी ओर श्रमिकों की आजीविका का सवाल. नगर निगम के लिए यह दोहरी चुनौती है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि निगम, अदालत के आदेश का पालन करता है या सामाजिक और आर्थिक संतुलन बनाये रखने की कोशिश करता है.

आसनसोल नगर निगम की आपात बैठक

हाइकोर्ट की सख्ती के बाद शुक्रवार को नगर निगम की कमिश्नर अदिति चौधरी ने मेयर विधान उपाध्याय और लीगल सेल की टीम के साथ आपातकालीन बैठक की. इसमें अवैध निर्माण वाले कारखानों की सूची और पहले जारी किये गये नोटिसों की समीक्षा की गयी. हालांकि, अब भी जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है. मेयर ने आगे कहा कि वह कानूनी प्रक्रिया के दायरे में श्रमिकों की आजीविका सुरक्षित रखना चाहते हैं.

मेयर विधान उपाध्याय का बचाव और सफाई

इस बाबत पूछने पर मेयर विधान उपाध्याय ने कहा कि उनके पास हाइकोर्ट के ऐसे किसी आदेश की प्रति नहीं आयी है, लिहाजा वह इस पर टिप्पणी नहीं करेंगे. उन्होंने यह भी बताया कि एक साल पहले जब इन कारखानों में नपाई हुई थी, तब अवैध निर्माण पाया गया था और कारखाना प्रबंधन ने समय मांगा था. तय समय-सीमा बीत जाने के बाद भी जब जुर्माना अदा नहीं किया गया, तब नगर निगम ने कार्रवाई शुरू की. उन्होंने विपक्ष के आरोपों को नकारते हुए कहा कि निगम कोई अवैध काम नहीं करता है. मेयर ने जोर दिया कि नगर निगम अवैध निर्माण को तोड़ देता, तो श्रमिकों की रोजी-रोटी पर संकट आ जाता और तब भी निगम पर ही सवाल उठते, ठीक वैसे ही जैसे फुटपाथ पर दुकान लगानेवालों को हटाने पर होता है. आगे कहा कि सर्वांगीण विकास के लिए सबको सहयोग करना होगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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GANESH MAHTO

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By GANESH MAHTO

GANESH MAHTO is a contributor at Prabhat Khabar.

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